आत्मा की अंधेरी रात – बेहतर जीवन की दिशा में कदम


आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में आत्मा की अंधेरी रात को समझें

आत्मा की अंधेरी रात के दौरान आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए आत्मा ऐसी जगह पर पहुंच जाती है, जहां पर कि आपका ध्यान उस पर चला जाए। धीरे-धीरे आप अपनी त्रिआयामी जिंदगी से खुद को अलग होता हुआ महसूस करते हैं। अपने अंदर से झूठे मूल्यों को बाहर करके अपने एक नए स्वरूप के लिए जगह बनाते हैं। आपके नए स्वरूप के साथ आपकी आत्मा और आपका स्वत्व तालमेल बैठा लेता है। जब आप इस अंधकार रूपी सुरंग के लगभग अंत तक पहुंच जाते हैं, तो आपके अंदर जो कुछ होता है, वह आपको अपनी आत्मा को दिशा दिखाने के लिए प्रेरित करता है। वास्तव में खुद पर पकड़ बनाने की शुरुआत इसे ही कहते हैं।

आपका दिल और आपकी आत्मा लगातार आपको पुकार रही है। आप भी अब अपनी आत्मा की पुकार को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। अपनी जिंदगी में आप पहली बार अपनी आध्यात्मिक रूप से आ रही आवाज को सुन सकते हैं। आप अपने वास्तविक स्वरूप में लौट रहे हैं। यही प्रेम है।


रात की आत्मा कितनी देर तक रहती है?

आत्मा की अंधेरी रात तब तक रहती है, जब तक कि आप जग नहीं जाते और एक अच्छे इंसान के रूप में खुद को नहीं बदल लेते। वैसे, ये एक रात से ज्यादा वक्त तक यह रहती है। कुछ लोगों का यह कहना है कि उन्होंने लोगों को 7 दिन, 3 महीने या डेढ़ साल तक भी इससे गुजरते हुए देखा है।
कई ऐसे उदाहरण भी मौजूद हैं, जिनमें कई वर्षों या दशकों तक इनसे गुजरने की बातें सामने आई हैं। इस दौरान ऐसा लगता है जैसे दिन रात में बदल गए हैं। नतीजा इसका यह होता है कि समय ज्यादा लंबा लगने लगता है। बड़े ही दर्द के साथ बीत रहे हर सेकेंड को आप महसूस करते हैं।
वास्तव में यह जो प्रक्रिया है, यह जटिल और दर्द का एहसास कराने वाली प्रतीत हो सकती है। फिर भी जो हो रहा है, उसका विरोध करते हुए हम सिर्फ उस समय को बढ़ाने की बात कर रहे हैं, जब हम आत्मा की अंधेरी रात का अनुभव कर रहे हों। इसके सामने आत्मसमर्पण करने और उत्पन्न होने वाले सभी संदेह और भ्रम का सामना करने की बजाय इनका विश्लेषण करना है और हमें अपनी पुरानी जिंदगी से जुड़े रहने का ही मार्ग चुनना है।
कुछ लोग पूरी दृढ़ता के साथ अपनी आत्मा के मूल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तैयार होने से पहले दिव्यता यानी कि ज्ञान से परिपूर्ण इस मार्ग में उतरकर आगे बढ़ने का मार्ग तलाश लेते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो इसे नहीं मानते और पुरानी और नई चीजों के बीच में वे झूलते रहते हैं, जबकि वास्तव में वे इनमें से किसी से भी नहीं जुड़ पाते हैं।
हमारी जिंदगी में कोई बिंदु ऐसा आता है, जब हम आत्मा की अंधेरी रात का अनुभव कर सकते हैं। हमारे जीवन का यह पल वास्तव में पवित्र भी होता है और दर्द का अनुभव कराने वाला भी। इस वक्त हम यह महसूस कर सकते हैं कि हमारी जिंदगी ने अपने अर्थ को खो दिया है। न केवल अपने आसपास के लोगों से, बल्कि ईश्वर और इस दुनिया से भी हम खुद को अलग-थलग महसूस करने लगते हैं।


आत्मा की अंधेरी रात के पीछे की कहानी और इसका अर्थ

डार्क नाइट यानी कि आत्मा की अंधेरी रात लंबे समय से प्रचलित एक रोमन कैथोलिक शब्द है, जिसे कि आध्यात्मिक सूखापऩ के तौर पर भी जाना जाता है। कैथोलिकों के लिए यह एक ऐसी अवधि होती है, जो कि आपको मजबूत बनाने के उद्देश्य के साथ एक आध्यात्मिक संकट के रूप में आती है। जब आप अत्यधिक शक्ति प्राप्त कर लेते हैं, तो इससे ईश्वर को प्राप्त करने की अपनी जीवन यात्रा में आप ज्यादा मजबूती से आगे बढ़ते रहते हैं।

इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण संत टेरेसा हैं। उनके बारे में हर कोई जिक्र करता आया है। उनकी डायरी के पन्नों को जब आप देखते हैं तो आप पाते हैं कि उनका जीवन कितना खोखला और अर्थहीन होने की भावनाओं से भरा हुआ था। मदर टेरेसा का मॉडल रिकॉर्ड के रूप में अब तक सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी परिस्थति का उन्होंने 1948 से अपने जीवन के अंत (1997) तक सामना किया था।

आत्मा की अंधेरी रात के कुछ और भी उदाहरण हैं, जो दस्तावेजों में अच्छी तरह से संजों कर रखे गये हैं। स्पेनिश रहस्यवादी सेंट जॉन ऑफ द क्रॉस के भी इस बारे में 16वीं शताब्दी के दस्तावेज मौजूद हैं। आत्मा की अंधेरी रात का नाम उनकी कविता के नाम पर ही रखा गया था। अपनी कविता में ईश्वर के साथ एक रहस्यमयी मुलाकात के लिए वे आत्मा के मार्ग के बारे में बताते हैं। वे बताते हैं कि यदि आप दिव्य शक्ति से मिलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो अंधेरी रात आपके लिए बहुत ही जरूरी होती है। इस यात्रा के लिए इसमें दो चरणों का हवाला दिया गया है। इनमें इंद्रियों की शुद्धि और आत्मा की शुद्धता शामिल हैं।


आत्मा की अंधेरी रात के संकेत और लक्षण

यदि आप आत्मा की एक अंधेरी रात के अनुभव से गुजर रहे हैं, तो इसका सबसे आम संकेत यह है कि वास्तविकता से आप दूर भागने लगते हैं। खुद को आप भ्रमित महसूस करते हैं और आपको ऐसा लगता है जैसे कि आपने अब तक जो कुछ भी किया है, वह सब बेकार चला गया है। आप यह मानते हैं कि किसी भी तरह की खुशी हासिल करने के आप योग्य नहीं हैं। आप खुद को खोया-खोया सा महसूस करते हैं। ये सभी तरह की भावनाएं आपके खुद के अस्तित्व पर सवालिया निशान भी लगाने लगती हैं।

वास्तव में जितना आप अंधेरे में उतरते हैं, उतने ही आप खुद को असहाय महसूस करते चले जाते हैं। ईश्वर की अवधारणा पर भी आपको भरोसा नहीं रह जाता है। ईश्वर की उपस्थिति पर आप संदेह करने लगते हैं। आपको हर चीज पर तरस आने लगता है। आप समझ नहीं पाते हैं कि आखिर यह है क्या। ज्यादातर इसमें डिप्रेशन के लक्षण देखने के लिए मिलते है। चिकित्सा से जुड़ी समस्या की बजाय यह दर्शन से अधिक संबंधित होता है। वह इसलिए कि भावनाओं के पैदा होने का कोई ऐसा आधार नहीं होता, जो कि तर्क की कसौटी पर खरा उतरे।

आत्मा की अंधेरी रात हमारी आत्मा की एक छोटी सी मौत के रूप में महसूस होती है। वास्तव में यह हमारे अहंकार की एक छोटी सी मौत होती है। आपको डराने के लिए यह नहीं है। मगर क्या आपको यह नहीं महसूस होता कि आपके अहंकार की इससे मौत हो रही है? हर किसी को कम-से-कम एक बार तो इससे जरूर गुजरना जाना चाहिए, ताकि बच्चों की तरह उनमें एक बार फिर से शुद्ध हृदय और दिमाग विकसित हो सके।


अंधेरे का अनुभव करने के पीछे की वजह

किसी भी व्यक्ति को यह जानना चाहिए कि जब वे प्रकाश में यानी की उम्मीदों में भरोसा करते हैं, तो कैसा महसूस होता है। शैतान यदि नहीं होता तो भगवान दिव्य हैं, यह भी तो नहीं पता चल पाता। कलाकारों के लिए भी एक ही सूत्र काम करता है। दुख का अनुभव करने से ही उन्हें सभी भावनाओं को समझने में मदद मिल पाती है। एक अंधेरी रात ही आपको जीवन में सबसे अच्छी चीजों को पाने के लिए मजबूर करती है।

जब आप अपनी खामियों को समझ लेते हैं, तभी आप एक बेहतर भविष्य की तरफ देख पाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यदि आपने पहले कभी भी रात नहीं देखी है, तो आप जाग कैसे सकते हैं। भगवान बुद्ध की कथा इसका एक सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। दुनिया उन्हीं लोगों के लिए सबसे शानदार थी, जिन्होंने कभी दुख सहना नहीं जाना था।

भगवान बुद्ध के लिए चीजें पूरी तरीके से बदल गई थीं, क्योंकि उन्होंने जीवन के दुखों को महसूस किया। उन्होंने इन्हें पहचाना। उनका मोहभंग हो गया। जो भी चीजें कभी अस्तित्व में हुआ करती थीं, हर चीज पर उन्होंने सवाल उठाए। सभी कष्टों को आत्मसात करने से उनका जीवन पूरी तरीके से बदल गया। आत्मा की काली रात भी बिल्कुल आपके साथ ऐसा ही करती है।

अंधेरी रात का अनुभव करने की एक और व्याख्या यह भी हो सकती है कि हम अपने वास्तविक अस्तित्व के बारे में जागरूक हो जाते हैं। जैसे-जैसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा के जरिए हम आगे बढ़ते हैं, वैसे-वैसे हमें यह एहसास होने लगता है कि मानव रूप से परे भी एक दुनिया मौजूद है। हमें काफी मजबूती से यह एहसास होता है कि हमारा भौतिक अस्तित्व, हमारी योग्यताएं और हमारी इच्छाएं कुछ भी नहीं पर आधारित हैं और यह चीज हमें हैरान करती है। जीवन में इसके लिए एक बड़ा झटका लगना जरूरी होता है।

जीवन में हमें जिन भी चीजों की जानकारी है और जिनके साथ हम काम कर रहे हैं, उनमें से कोई भी शाश्वत नहीं है। इस ज्ञान को पाने के बाद अपने खुद के मूल्य पर हमें संदेह करने की वजह मिल जाती है। एक अलग ही वास्तविकता का अनुभव करने की ओर हम बढ़ रहे हैं। वह इसलिए कि हम खुद को छोड़कर जा रहे हैं। यह जो नई वास्तविकता का अनुभव हमें हो रहा है, वह कोई ऐसी चीज है, जो हमने पहले कभी भी नहीं देखी। साथ ही यह भयानक भी है। आपको ऐसा महसूस होता है जैसे किसी सपने से आप जाग गए हैं और आप किसी बहुत अंधेरी वाली जगह पर हैं।

वर्तमान में जो वास्तविकता है, उससे हम डरते हैं। इसके बारे में हमें कुछ भी जानकारी नहीं होती। नए तथ्यों से हम डरते हैं, क्योंकि इसके बारे में हमें कुछ भी नहीं मालूम होता है। अज्ञात चीजों का भय हमें अलग-अलग नकारात्मक भावनाओं का अनुभव करने की ओर धकेलता है। इनमें पछतावा, शर्मिंदगी और प्यार में असमर्थता जैसी भावनाएं शामिल होती हैं।


ज्योतिष में आत्मा की अंधेरी रात का मतलब

भारतीय वैदिक ज्योतिष के मुताबिक एक काली रात शनि के विनाशकारी प्रभाव की वजह से आती है। वह इसलिए कि शनि ठंडा, भारी और मूड बदलने वाला भी है। आपको भी ऐसा ही महसूस होता है। आप अपनी आत्मा की अंधेरी रात के दौरान कई तरह की नकारात्मक भावनाओं को झेल पाते हैं। शनि की भी जो अवधि होती है, वह शरीर से भावनात्मक और शारीरिक तौर पर दर्द एवं पीड़ा दोनों को बाहर निकालने में मदद करती है।

जब इसका अंत होता है तो आपको अपने कर्मों के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए आपको तैयार हो जाना होता है। सबसे अच्छी बात यह होती है कि शनि कलात्मक प्रतिभा और ज्ञान से संबंधित है। आपको नुकसान बहुत होता है, लेकिन अच्छी तरह से आप बाहर आ जाते हैं।

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आत्मा की अंधेरी रात से बाहर निकलना

जी हां, अंधरी रात आप पर काफी जुल्म करेगी। नर्क से आपको गुजारना पड़ेगा। फिर भी अंत में आप एक मजबूत इंसान के रूप में उभर कर सामने आएंगे। यह जो परिवर्तन हो रहा है, इसे यदि आप और आरामदायक बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए इस बात को स्वीकार कर लेना बहुत ही जरूरी है कि आपको जिन चीजों का भी अनुभव हो रहा है, वे पूरी तरीके से स्वाभाविक हैं। निराशा को आपको सहना पड़ेगा। अपनी सभी नकारात्मक भावनाओं को आपको समझना और उन्हें स्वीकार भी करना होगा। आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका इन्हें सहना और इनके साथ ही आगे बढ़ना है।

इससे पहले कि सत्य के आधार पर आपको संदेह होना शुरू हो जाए, अपने जीवन में आपको बड़े झटकों का अनुभव होगा। हिंसा, दुर्व्यवहार और झकझाेर कर रख देने वाले भावनात्मक झटके आपको पूरी तरीके से हिला सकते हैं। आपको इनसे गुजारना है और सभी भावनाओं का सम्मान करना है। यदि आप अपनी गहरी भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, तो इसी सुरंग में आप और आगे बढ़ते चले जाते हैं। बाहर निकलने के लिए आपको इन चीजों को गले लगाने की जरूरत होती है। इनसे सीखना पड़ता है। साहस रखना होता है। दया भाव रखना पड़ता है। सबसे महत्वपूर्ण चीज खुद के प्रति प्रेम रखना होता है। जब आप नफरत पर प्यार को चुन लेते हैं, तो फिर इसका जादू आप देख सकते हैं।

यदि आप ऐसा करना शुरू कर देते हैं, तो चीजें आपको बेहतर नजर आनी शुरू हो जाएंगी। आपको यह मालूम पड़ जाएगा कि आप अकेले भले ही हैं, लेकिन वास्तव में आप अकेले हैं नहीं। वह इसलिए कि किसी बड़ी चीज का आप हिस्सा बने हुए हैं। जीवन के साथ-साथ खुद के प्रति आपमें एक नई भावना जगेगी और आपमें गहरा प्रेम विकसित हो जाएगा। आप आत्मनिर्भर बनने की इच्छा रखेंगे और सभी सामाजिक संरचनाओं को भी आप भूल जाएंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि आप टूट कर और खींच कर अपने आपको वापस ले आएंगे। यही किसी के भी पास सबसे मूल्यवान संपत्ति होती है। दिन के खत्म होने पर यह कुछ और नहीं‚ बल्कि परमेश्वर के पास लौटना होता है।


समापन

आत्मा की अंधेरी रात एक सप्ताह से 20 साल तक चल सकती है। फिर भी समय कितना भी क्यों न लगे, इसका उद्देश्य आपको ईश्वर के साथ जोड़कर अपने आध्यात्मिक लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करना होता है। आत्मा की अंधेरी रात का अनुभव आपके जज्बे और के लिए बिल्कुल द्वार बंद करने जैसा होता है। किसी इंसान के जीवन में जो सबसे चुनौतीपूर्ण वक्त आता है, यह उनमें से एक है।

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यहां पर आप एक ऐसी दुविधा को देखते हैं‚ जो पहले से ही मौजूद है। हालांकि‚ यहां पर उद्देश्य बस यही था कि आपको रोशनी में लाया जाए। ऐसा शायद ही कभी होता है जब आपको यह लगता है कि आपकी अंतरात्मा पूरी तरह से खाली हो गई और केवल शून्य शेष रह गया है। यहीं पर आपको एक बड़ी तस्वीर नजर आती है। जीवन में आप सभी अच्छी चीजों को देखना शुरू कर देते हैं। किसी और चीज से ज्यादा छोटे-छोटे पलों की आप सराहना करने लगते हैं। यही वह चीज है, जिससे आप परवाह करने वाले, दयालु, सम्मान करने वाले और विनम्र बन जाते हैं। जो कुछ भी आपके पास मौजूद है, उसके लिए आप आभार प्रकट करने लगते हैं।