नारद जयंती क्यों और कैसे मनाया जाता है

हिंदू धर्म में देवर्षि नारद या नारद मुनि, ब्रह्मा, ब्रह्मांड के निर्माता और तीन सर्वोच्च देवताओं में से एक (त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के पुत्र हैं। नारद मुनि देवताओं के दिव्य दूत और भगवान विष्णु के प्रिय भक्त हैं। वे जहां भी जाते हैं, नारायण नारायण का जाप करते हैं। प्रतिवर्ष नारद मुनि की जयंती को नारद जयंती के रूप में मनाया जाता है।

देवर्षि नारद एक संगीतकार हैं और वे अपने साथ एक खड़ताल और वीणा रखते हैं। वे बुद्धिमान कहानीकार होने के साथ ही उनमें दूसरों को ज्ञान देने की पर्याप्त समझ भी है। महाभारत और रामायण के महाकाव्यों में भी नारद मुनि की कई कहानियां हैं। उन्होंने भगवान विष्णु भक्त प्रह्लाद के जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नारद मुनि ने असुर हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद को शिक्षा-दीक्षा दी। यह भी माना जाता है कि उन्हें एक बार ब्रह्मा के महान पुत्र दक्ष प्रजापति ने शाप दिया था।


नारद मुनि की जयंती - नारद जयंती 2022

हिंदू धर्म के पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार नारद जयंती ज्येष्ठ महीने में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर पड़ती है। इसके विपरीत, अमावस्या कैलेंडर में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर नारद जयंती पड़ती है। चंद्र महीने के दो अलग-अलग नाम हैं, लेकिन हिंदू धर्म के दोनों कैलेंडर में नारद जयंती एक ही दिन मनाई जाती है।

इस वर्ष नारद जयंती गुरुवार, 17 मई 2022 को है। बुद्ध पूर्णिमा, नारद जयंती से ठीक एक दिन पहले बुधवार, 16 मई, 2022 को है। नारद जयंती और बुद्ध पूर्णिमा दोनों ही हिंदू कैलेंडर में हमेशा ही पास-पास की तिथियां में होती हैं। पिछले साल 2022 में भी 2022 की तरह हिंदू त्योहार नारद जयंती और बुद्ध पूर्णिमा की तिथियां एक दिन के अंतराल में आई थी, 7 मई और 8 मई।


नारद जयंती 2022 मुहूर्त समय

मास – पूर्णिमांत – ज्येष्ठ
अमंता – वैशाख
दिन – गुरुवार
दिनांक – 17 मई 2022
कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि शुरू – 16 मई 2022 को शाम 09: 43 बजे से
कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि समाप्त – 17 मई 2022 को दोपहर 06:25 बजे तक


कौन हैं नारद मुनि?

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, नारद मुनि भगवान ब्रह्मा के मानसपुत्र हैं, जो तीन त्रिदेवों (ब्रह्मा निर्माता, विष्णु पोषणकर्ता, महेश संहारक हैं) में से एक हैं। कई हिंदू नारद मुनि को महर्षि कश्यप के पुत्र के रूप में भी
मानते हैं। साथ ही, कई लोग यह मानते हैं संत त्यागराज और पुरंदरदास उनके अवतार थे। नारद मुनि भगवान नारायण या भगवान विष्णु के एक महान अनुयायी और भक्त हैं। देवर्षि ने किसी से विवाह नहीं किया और वह ब्रह्मचारी रहे।

विष्णु पुराण और अन्य पुराणों में यह उल्लेख है कि नारद मुनि तीन लोकों, स्वर्ग लोक, पाताल लोक और मृत्यु लोक (पृथ्वी) में घूम रहे हैं। हर जगह यात्रा करते हुए वे भगवान विष्णु का नाम जपते हैं और नारायण-नारायण कहते हैं। उनके पास एक महत्वपूर्ण काम है, वे जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाने के लिए सलाह देते हैं। यही वजह है कि हिंदू संस्कृति में नारद जयंती 2022 एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन लोग नारद मुनि के मार्गदर्शन और ज्ञान के लिए उनकी पूजा करते हैं।

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नारद जयंती 2022 और पत्रकार दिवस

नारद मुनि, जिन्हें देवर्षि के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे बौद्धिक लोगों में से एक हैं। उनके पास तीनों लोक में किसी भी स्थान की यात्रा करने की विशेष शक्तियां हैं। कई बार उनके शरारती
व्यवहार और देवी-देवताओं और अन्य लोगों को समाचार साझा करने से अजीब स्थिति पैदा होती है। वे भगवान विष्णु के भक्त हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए भजन गाने के साथ-साथ वीणा और खड़ताल बजाते रहते हैं।

इधर की बात उधर करना उनका स्वाभाविक व्यवहार रहा और वे ऐसी स्थितियों का खूब आनंद लेते हैं। वे एक जगह से दूसरी जगह जाने और पूरे ब्रह्मांड के आस-पास होने वाली हर नई चीज को साझा करना पसंद करते हैं। नारद मुनि के ये गुण उन्हें धरती का पहला पत्रकार बनाते हैं। यही वजह है कि पत्रकार बिरादरी ने नारद जयंती को पत्रकार दिवस के रूप में भी मान्य किया है।


नारद मुनि की कहानी

ऐसा माना जाता है कि नारद मुनि पिछले जन्म में गंधर्व के रूप पैदा हुए थे। उनकी मां भगवान विष्णु की भक्त थीं। वे साधु-संतों के घरों पर काम किया करती थीं। संतों ने अपनी सेवाओं और भक्ति के कारण नारद को उनके पिछले जीवन में आशीर्वाद दिया। समय के साथ, वह भी भगवान विष्णु के भक्त बन गए।

अपनी मां के निधन से व्यथित होकर वे जंगल में ध्यान करने चले गए। उनकी तपस्या और भक्ति से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। वह नारद के सामने प्रकट हुए और उन्हें अपने वास्तविक आध्यात्मिक रूप के बारे में बताया। पिछले जीवन में अपनी मृत्यु के बाद नारद, देवर्षि के वास्तविक दिव्य रूप में परिवर्तित हो गए। यही वजह है कि हिंदू लोग नारद जयंती मनाते हैं, क्योंकि वह उसी दिन वे अपने दिव्य रूप में परिवर्तित हुए थे।

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नारद जयंती 2022 पर पूजा विधान

नारद जयंती पर पूजा विधान इस प्रकार किया जाता है-

  • हिंदू धर्म में लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद नारद जयंती का पूजा विधान शुरू करते हैं।
  • भक्त नारद जयंती पर विष्णु पूजा करते हैं, क्योंकि नारद मुनि, भगवान विष्णु के अनुयायी थे।
  • इस विधान में विष्णु आरती शामिल है। लोग भगवान विष्णु को तुलसी और फूल चढ़ाते हैं।
  • नारद जयंती पूजा विधान के अंत में लोग ब्राह्मणों को दान देते हैं और अन्य लोगों को भी भोजन देते हैं।

नारद जयंती 2022 उपवास

भक्त नारद जयंती पर उपवास रखते हैं और नीचे दिए गए रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करते हैं:

  • लोग भगवान विष्णु और नारद मुनि को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न संस्कृत श्लोकों और भजनों का पाठ करते हैं।
  • नारद जयंती पर व्रत करते समय अनाज और दाल खाना सख्त वर्जित है।
  • यदि कोई कुछ खाना चाहता है, तो उन्हें नारद जयंती पर फल और दूध देने लेने की अनुमति है।
  • कई भक्त रात में सोते भी नहीं हैं और भजन गाकर जागरण करते हैं और भगवान विष्णु के लिए मंत्र पढ़ते हैं।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना लाभकारी माना जाता है।
  • नारद जयंती व्रत के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला मंत्र भगवान विष्णु के एक हजार नामों की सूची है।

यहां हम नारद जयंती 2022 और नारद मुनि या देवर्षि के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं। वह भगवान विष्णु के सबसे बड़े भक्तों में से एक हैं। आइए, हम भगवान विष्णु और ऋषि नारद से संपूर्ण मानवता की भलाई के लिए प्रार्थना करें।