वैदिक ज्योतिष में प्रथम घर (First house), होगा क्या असर

वैदिक ज्योतिष में 12 भावों या घरों का उतना ही महत्व है जितना कि 12 राशियों का होता है। उनमें से प्रत्येक भाव का व्यक्ति के विकास और प्रगति पाने के तरीके पर अनूठा प्रभाव पड़ता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सभी प्राणियों को उनके घरों और ग्रहों के आधार पर 144 बुनियादी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। ज्योतिष प्रत्येक घर के प्रभाव और उस पर मौजूद ग्रह के स्थान का आकलन करता है। यह जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को लेकर आने वाले समय के लिए एक सही चित्र सामने लेकर आता है।

वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव को लग्न कहा जाता है और यह राशि चक्र से शुरू होता है जो कि व्यक्ति के मूलभूत रवैये को उसके मूलभूत नजरिए को प्रभावित करता है। आपके जन्म के समय पडऩे वाला सबसे पहला ग्रह प्रथम भाव कहा जाता है। यह जन्म समय पर क्षितिज पर मौजूद राशि की डिग्री पर आधारित होता है। इसे स्वयं का घर भी कहा जाता है और यह व्यक्ति की यात्रा और प्रारंभिक जीवन परिस्थितियों की शुरुआत का प्रतीक है। प्रथम भाव का महत्व किसी की वास्तविक क्षमता को निर्धारित करने का होता है। यह उन विलक्षण विशेषताओं को निर्धारित करता है जो जीवन भर हर व्यक्ति की मदद करती हैं।


कुंडली के पहले भाव में ग्रह

प्रथम भाव में सूर्य

आपके ज्योतिषी चार्ट के पहले घर में सूर्य की स्थिति आपको बहुत ऊर्जा और बहुत आत्मविश्वास प्रदान करेगी। यह आपको स्वार्थी और प्रभावशाली भी बना सकता है। आप एक प्राकृतिक सेनानी हैं , हर चुनौती से लडऩा जानते हैं, परेशानी से पीछे नहीं हटते हैं। इस घर में एक सकारात्मक सूर्य इंगित करता है कि आपका बचपन परेशानी से मुक्त था। आपका रवैया लापरवाह है और आप आलसी भी हो सकते हैं।

प्रथम भाव में चंद्रमा

चंद्रमा अगर प्रथम भाव में होता है तो यह ग्रह आपको एक मिलनसार व्यक्तित्व का स्वामी बनने का आशीर्वाद देता है। फिर भी आप अपने कार्यों में विश्वास की कमी महसूस कर सकते हैं और आप अस्थिरता से पीडि़त हो सकते हैं। आप बहुत अधिक समय तक दूसरों को खुश करने का प्रयास कर सकते हैं। आपमें बच्चों जैसे गुण हैं। आप अपने आप पर काबू नहीं रख पाते हैं। आप भावनाओं से भरे होते हैं। आपके खर्च चाहकर भी कम नहीं रहते हैं। यह आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

प्रथम भाव में बृहस्पति

इस भाव में बृहस्पति दर्शाता है कि आप एक दयालु व्यक्ति हैं, आपका अच्छा दृष्टिकोण हैं और अच्छे इरादे हैं। आपके पास एक बड़ा दिल है। आप बहुत आशावादी हैं, जिसमें पर बार सच्चाई को नहीं देख पाते हैं। असलियत को नजरअंदाज कर लेते हैं। बृहस्पति विकास और विस्तार की राह दिखाने वाला ग्रह है, इसलिए पहल भाव में इसकी उपस्थिति बताती है कि आपके व्यक्तित्व के विकास की बहुत गुंजाईश है।

प्रथम भाव में शुक्र

शुक्र एक प्यारा और सुंदर ग्रह है। जब शुक्र अपनी राशि के पहले घर का मालिक होता है तो अपने आप पास के लोगों को आसानी से आकर्षित कर लेता है। वे आलस्य, सपनों से समझौता करने और कामुकता के प्रति भी अपने झुकाव को रोक नहीं सकते हैं। आप लोगों को आसानी से आकर्षित करते हैं, इससे चीजें बहुत ही आसान हो जाती है। लेकिन आप सावधान रहें अपने कौशल का अपनी प्रतिभा का गलत इस्तेमाल न करें। उनसे अनुचित लाभ न लें।

प्रथम भाव में मंगल

मंगल आगर कुंडली के पहले घर में है तो यह उग्र और अत्यधिक ऊर्जावान बना देता है। यह कार्यों में जल्दबाजी कराता है। बेहतर होगा कि आप धीरे-धीरे और धैर्य से काम लें। ऊर्जा, साहस, शक्ति, दृढ़ता के साथ मंगल आपको आक्रामकता का आशीर्वाद देता है।

प्रथम भाव में बुध

आपकी कुंडली के प्रथम भाव में अगर बुध है तो जीवन के बारे में एक जिज्ञासु और प्रयोगात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है। आपके पास ठोस बौद्धिक शक्तियां भी हो सकती हैं। आप जल्दी से आसपास की परिस्थितियों के अनुकूल हो सकते हैं। आप बिना रुके बार-बार लगातार बातचीत कर सकते हैं, आप बातूनी हो सकते हैं।आप बुद्धिमान, सहज, प्रेरक, लेकिन कभी-कभी अधीर होते हैं।

प्रथम भाव में शनि

यदि आपके प्रथम भाव में शनि है तो आप संभवतया लंबे और पतले हैं। स्वभाव से आप गंभीर हैं और अंतर्मुखी हो सकते हैं। आप वफादार, समर्पित और भरोसेमंद हो सकते हैं। इसके साथ ही आप अपने जीवन में मुश्किल हालातों में बिताए बचपन के साथ ही मीठी सफलता का अनुभव भी करेंगे।

प्रथम भाव में राहु

अगर कुंडली के प्रथम भाव में राहु है तो आप में जीवन के लिए जुनून होगा। इसके साथ ही सामाजिक रूप से आप प्रतिष्ठा हासिल करना चाहेंगे। आपकी प्रबल इच्छा है कि दूसरे आपकी क्षमता और खासियतों की प्रशंसा करें और उनकी सराहना करें। राहु आपको एक प्रभावशाली व्यक्तित्व प्रदान करेगा और आपको परम्परागत जीवन से इतर कुछ अलग तरह का जीवन जीने का मौका देगा। नीच का राहु आपको अवैध आचरण की ओर ले जाता है। अगर राहु पर किसी शुभ ग्रह की नजर या प्रभाव नहीं है तो संभव है कि आप नशे के आदी हो सकते हैं। नशीली दवाओं के प्रति आपकी आसक्ति जरूरत से ज्यादा हो सकती है।

प्रथम भाव में केतु

आप की कुंडली के पहले घर में केतु हैं तो आपके साथ कई दोष हो सकते हैं। आपके पास एक चुंबकीय व्यक्तित्व है और आप थोड़े रहस्यमय व्यक्ति भी हैं। लोगों को आपको समझने में मुश्किल होती है। यदि केतु आपके प्रथम भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है तो आपको स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। आपकी सहनशीलता पर विपरीत असर हो सकता है।

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प्रथम भाव में राशियां और उनका प्रभाव

पहले घर में मेष राशि

मेष राशि राशि चक्र की पहली राशि है, इस पर मंगल ग्रह का प्रभुत्व होता है। मेष राशि आध्यात्मिकता का पहला भाव होती है। यह 00 से लेकर 30 डिग्री तक होती है, वृषभ पर आकर खत्म होती है। मेष राशि चल और स्वाभाविक रूप से स्थिर अग्नि तत्व राशि है। यहां सूर्य उच्च का होता है और शनि कमजोर हो जाता है। यह ग्रह के मूलत्रिकोण का प्रतीक है।
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पहले घर में मेष राशि का होना यानी यह आपको चुस्त, सक्रिय, भावुक, बोल्ड, स्वतंत्र, महत्वाकांक्षी आदि बनाता है। पहले घर पर सूर्य और मंगल के प्रभाव के कारण जातक लंबे, कोमल और बहुत गोरी त्वचा वाले नहीं होते हैं। इनमें यह गुण होना संभव नहीं होता है। मेष राशि प्रथम भाव में होने के कारण दूसरों की बात सुनना उनके लिए संभव नहीं होता है, मानो यह उनके लिए एक चुनौती जैसा होता है। वे दूसरों की राय पर अमल करने की बजाय अपनी योजना पर ही काम करना पसंद करते हैं। इस राशि के जातक को अहंकार संतोष दे सकता है। वहीं समस्याएं आपके मूड को खराब कर सकते हैं।

पहले भाव में वृषभ राशि

वृषभ राशि चक्र की दूसरे नम्बर की राशि होती है। इसका स्वामी शुक्र होता है। यह 30 डिग्री से 60 डिग्री को कवर करता है। वृषभ राशि का तत्व पृथ्वी है। पहला पृथ्वी त्रिकोण वृषभ, कन्या और मकर राशि का बनता है। वृषभ राशि में चंद्रमा उच्च का होना और केतु कमजोर का होना स्वाभाविक होता है।

पहले घर में वृषभ राशि आपको आकर्षक स्वरूप का स्वामी बनाती है। आपकी ऊंचाई मध्यम होती है और शारीरिक आकार सही होता है। प्रथम भाव में वृषभ राशि चिन्ह भावनात्मक रूप से स्वयं पर नियंत्रण और स्थिर सोच देता है। यह अपने आस पास के लोगों को आनंद, चतुराई, विलासिता, संगीत और प्यार प्रदान करता है। शनि, बुध और शुक्र ग्रह मोत्रिकोण राशि के कारण वृषभ राशि में त्रिनेत्र भाव में पडऩे के कारण शुभ ग्रह होने की प्रवृत्ति रखते हैं। दसवें घर की स्थिति और अन्य कारकों के आधार पर, प्रथम घर में वृषभ राशि वाले जातक फिल्म, कानूनी, मंत्री, होटल, आभूषण और पशुधन आदि में अपना कॅरियर बनाते हैं।

पहले घर में मिथुन राशि

मिथुन तीसरी राशि है और कुंडली के 60 से 90 अंश तक फैली हुई होती है। इस घर बुध ग्रह द्वारा शासित होता है और इसमें वायु तत्व को दोहरा प्रभाव होता है। इस घर में कोई भी ग्रह उच्च या नीच का नहीं होता हैं।

पहले भाव में मिथुन राशि जातक को एक अच्छी लंबाई के साथ ही अच्छे होठों की देन देती है। जातक के अंग सुगठित होते हैं और यदि बुध अच्छे भाव के साथ स्थित हो तो सुंदर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। पहले भाव में मिथुन राशि मानसिक रूप से मन को चंचल बनाती है। यह एक अच्छा रवैया, अच्छा संवाद और अच्छी बुद्धि देती है।

प्रथम भाव में कर्क राशि

कर्क राशि चक्र की चौथी राशि है। चंद्रमा इस पर शासन करता है, इसका स्वामी होता है। कर्क राशि की गति स्थिति 90 से 120 डिग्री के बीच होती है। कर्क एक स्थिर राशि है और इसमें जल तत्व के साथ प्रकृति में चल अवस्था में है। बृहस्पति उच्च का रहता है और मंगल स्थिर होता है।

कर्क राशि का पहला भाव आपको आलसी, दयनीय, संवेदनशील, भावुक और बुद्धिमान बनाता है। प्रथम भाव में कर्क आपको गोरे दांत, छोटा कद, छोटे अंग, बड़ी छाती, मोटी गर्दन, गोल चेहरा प्रदान करता है। इसके जातक बहुत शांत प्रवृति के हो सकते हैं, वह कोई भी कदम उठाने से पहले सभी बातों का ध्यान रखता है, सभी सलाह को अमल में लाना है। प्रथम भाव में बुध आपको बहुत ज्यादा बात करने को मजबूर कर सकता है। बुध का इस रवैया या प्रभाव से जातक को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है।

प्रथम भाव में सिंह

सिंह राशि चक्र की पांचवीं राशि है। इस पर सूर्य का शासन होता है, सूर्य इसका स्वामी होता है। सिंह राशि 120 से 150 तक फैली हुई है। यह अग्नि के समुदाय से जुड़ी एक अन्य राशि है, इसके अलावा इनमें मेष और धनु राशि भी शामिल होती हैं। इसके साथ अग्नि तत्व स्थिर होता है। यहां कोई ग्रह उच्च का नहीं है, और ना ही कोई ग्रह कमजोर होता है।

प्रथम भाव में सिंह राशि एक अच्छी कद काठी प्रदान करता है। इसके जातक सुंदर और लंबा होता है। अगर आप के पास अच्छी क्षमता है तो ही आप रह पाएंगे नहीं तो आपको कोई न कोई गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बृहस्पति के कारण आपको स्थानीय लोगों के लिए एक बेहतरीन वक्ता बनने का मौका मिल सकता है। प्रथम भाव पर मंगल का प्रभाव कम बाल और चौड़ा माथा प्रदान करेगा। सिंह के पहले भाव में होने के कारण आप दिखने में बहुत अच्छे होंगे। आपके व्यक्तित्व में चुंबकीय आकर्षण नजर आएगा।

प्रथम भाव में कन्या राशि

प्रथम भाव में कन्या राशि का होना एक अच्छे शरीर या शारीरिक सौष्ठव का प्रतीक होता है। ऐसा जातक आमतौर पर लंबा और बुद्धिमान होता है। गंभीर परेशानी के दौरान पर वह बुद्धि का उपयोग करके उसका समाधान तलाश सकता है। बृहस्पति उसके लिए मातृभाषा बन सकता है। मंगल के पहले घर पर प्रभाव के कारण कम बाल और एक चौड़ा ललाट देखने को मिलेगा।

पहले भाव में कन्या राशि दुबले-पतले शरीर, सुंदर नाक और आंखों की बनावट के लिए जिम्मेदार होती है। जातक हमेशा से अच्छी सुगंध, एक बेहतर स्वाद और मीठी वाणी का स्वामी होता है। वे अत्यधिक बुद्धिमान और गणितीय कौशल के साथ अच्छी तरह से योग्य साबित होते हैं।

प्रथम भाव में तुला राशि

तुला राशि चक्र की सातवीं राशि है, जो 180 और 210 डिग्री के बीच फैली हुई है। तुला दूसरी एयर ट्राइन राशि होती है। यह चल राशि होती है और आध्यात्मिकता से जुड़ी होती है। इस राशि पर शुक्र का शासन होता है, शुक्र इसका स्वामी होता है। ऐसे में यह इस जगह शनि को उच्च और सूर्य को कमजोर करता है।

प्रथम भाव में तुला राशि सुंदर, विलासिता और समृद्धता का प्रतीक होती है। कला और कलाकृतियों के मामले में इनकी नजर पारखी होती है। तुला राशि के जातक बड़े, पतले, सुडौल, अच्छी त्वचा और आकर्षक लोग होते हैं। पहले घर में तुला राशि का जातक रचनात्मकता, आनंद, आशावाद, संवेदनशीलता और कल्पनाशीलता से भरपूर होता है।

पहले घर में वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि चक्र की आठवीं राशि होती है। इसका स्वामी मंगल होता है, जो 210 से 240 डिग्री तक फैली हुई है। कर्क और मीन राशि के साथ मिलकर यह एक मोक्ष त्रिकोण बनाता है। वृश्चिक राशि में चंद्रमा कमजोर हो जाता है।

पहले भाव में वृश्चिक राशि का होना आपको मध्यम कद का बनाता है लेकिन इसके साथ ही यह आपको एक उत्कृष्ट रहस्यमय व्यक्तित्व और एक आकर्षक शरीर देता है। इनकी सुंदर नाक और आंखें इनके स्वरूप को आकर्षक बनाती हैं तो इनका माथा भी चौड़ा हो सकता है। पहले भाव में रहकर वृश्चिक आपको एक गहन विचारक, आध्यात्मिक, रहस्यमय, भावुक, विचारशील और साथ ही चतुर और व्यंग्यात्मक व्यक्ति बनाता है।

पहले घर में धनु राशि

धनु राशि चक्र की नवीं राशि है। यधनु राशि 240 से 270 डिग्री तक होती है। धनु राशि का स्वामी ग्रह बृहस्पति है। यह थोड़े चौंकाने वाली राशि होती है, यह दोहरेपन, उग्रता के साथ ही धर्मकर्म का मेल है।

पहला घर धनु राशि जातकों को विशेषताओं से भरपूर बनाता है। ये जातक को दुबला बनाता है। इन जातकों के पैर सुगठित और सुंदर होते हैं। इनकी मौजूदगी बड़ी शांतिपूर्ण होती है। जातक आम तौर पर शांत स्वभाव के होते हैं, लेकिन इनके अंदर ही अंदर आग धधक रही होती है। जातक आशावादी होते हैं। ये अपने परिवार व आस पास के लोगों की देखभाल करना पसंद करते हैं।

प्रथम भाव में मकर राशि

मकर राशि चक्र की दसवीं राशि होती है। यह 270 से 300 डिग्री के बीच फैली हुई होती है। इसका स्वामी शनि ग्रह होता है। यह कार्डिनल में अंतिम राशि होती है। यहपृथ्वी तत्व से जुड़ी होती है। यहां बृहस्पति कमजोर है और मंगल उच्च का होता है। मकर राशि चल होती है।

प्रथम भाव में यह राशि जातक को मध्यम आकार के शरीर के साथ एक मोटी गर्दन, मोटे बाल और बड़े दांत प्रदान करती है। जातक के मन में आस पास के लोगों के प्रति ईमानदार, मेहनती और स्वार्थी और गर्व की अनुभूति करवाता है। ग्रहों की यह स्थिति लोगों की सलाह का पालन करने के लिए प्रेरित करती है।

पहले घर में कुंभ राशि

कुंभ राशि चक्र ग्यारहवीं राशि होती है और राशिफल के 300 से 330 डिग्री तक फैली हुई है। इसमें शनि का प्रभुत्व होता है। यह हवादार और स्थिर प्रकृति का होता है। कुंभ राशि में कोई भी ग्रह उच्च का नहीं होता है।

प्रथम भाव में कुंभ राशि का जातक एक बड़ा सिर और अच्छी तरह से सुगठित कदकाठी का होता है। उसे एक अच्छा स्वरूप प्राप्त होता है। मानसिक रूप से ये जातक लोग बहुत उद्यमी, मेहनती, बुद्धिमान, जानकार और विचारशील होते हैं।

पहले घर में मीन राशि

राशि चक्र की अंतिम राशि मीन होती है। यह 330 से 360 डिग्री तक फैली होती है। यह एक जल राशि होती है, जिसका स्वामी बृहस्पति होता है। यह मोक्ष की राशि में अंतिम होती है।

पहले भाव में मीन राशि होने का मतलब है कि शारीरिक रूप से एक मध्यम ऊंचाई होती है। इसके साथ ही तीखी नाक, गोलाकार कंधे, बड़ी जांघें जातक को प्राप्त होती हैं। जातक की उपस्थिति आमतौर पर सुंदर होती है, जब तक बृहस्पति या मीन किसी नीच ग्रह से पीडि़त न हो। पहले भाव में मीन राशि वाले व्यक्ति को दयालु, भरोसेमंद, ईमानदार, दयालु और नेक बनाता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुंडली में पहला घर किसका होता है?
प्रथम घर स्व का यानी अपना घर होता है। यह भौतिक और शारीरिक पहलू का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मतलब है कि यह हमारे शरीर के शीर्ष भाग यानी चेहरे की संरचना, सिर, दिमाग आदि के बारे में वर्णन करता है। मेष राशि काल पुरुष कुंडली पर शासन करती है।

क्या होगा अगर पहला घर खाली है?
कुंडली की ओर ले जाने वाली राशि लग्न है। खाली प्रथम घर का मतलब है कि व्यक्ति अनिश्चित और मानसिक रूप से मजबूत है। ऐसा व्यक्ति आमतौर पर जीवन में अधर्मी होता है और अपने व्यक्तित्व और अपने जीवन में प्रगति के प्रति बहुत लापरवाह होता है।


समापन

अगर इसके बारे में संक्षेप में बात करें तो पहला भाव व्यक्ति के निर्णयों को प्रभावित करता है। यह पसंदीदा, पसंद, नापसंद और जीवन के सामान्य व्यवहार की पहचान करता है।

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