वैदिक ज्योतिष में चतुर्थ भाव (Fourth House) का अर्थ

वैदिक ज्योतिष में चतुर्थ भाव आपके मूल स्थान के चारों ओर घूमता रहता है। या फिर यह आपके मूल में लौट जाता है। इसका नाता उन सभी चीजों से होता है, जिन्हें हम अपनी जड़ों से जोड़ सकते हैं। चाहे ये चीजें कितनी भी बड़ी या फिर छोटी क्यों न हों। इनमें हमारे पूर्वजों से लेकर हमारी संपत्ति, भौतिक संपत्ति आदि सभी कुछ शामिल हो सकते हैं। चौथा भाव हमें इसलिए प्रभावित करता है, क्योंकि हम अपने पुश्तैनी संबंधों से जुड़े रहते हैं। चतुर्थ भाव मुख्य रूप से हमारे पूर्वजों, हमारी जन्मभूमि और हमारे आंतरिक संबंधों से जुड़ा हुआ होता है।

चतुर्थ भाव में ग्रहों की स्थिति परिवार के साथ संबंधों पर अपना नियंत्रण रखती है। पारिवारिक संबंधों के साथ मूल्यों एवं विरासत को भी यह नियंत्रित करने का काम करती है। बंधु भाव वैदिक ज्योतिष में चतुर्थ भाव या चतुर्थ घर का प्रतिनिधित्व करता है।


चतुर्थ भाव में ग्रह

ये वे विशेषताएं होती हैं, जो ग्रह जातकों को तब प्रदान करते हैं, जब वे धन भाव या द्वितीय भाव में एक ऊंचे स्तर पर होते हैं। यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि राशि की स्थिति इन ग्रहों की प्रकृति को भी बदल देती है।

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चतुर्थ भाव में सूर्य

सूर्य हमारी आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी गर्मी से हमारा पोषण होता है। हमारे विचारों की शुद्धता में भी बढ़ोतरी इसी की वजह से होती है। चतुर्थ भाव में सूर्य की स्थिति के फलस्वरूप ही हमारी आत्मा पोषण और देखभाल करने जैसे व्यवहार को प्रदर्शित कर पाने में सक्षम होती है। किसी भी व्यक्ति के विचार करने के तरीकों पर यह प्रकाश डालता है। जीवन के प्रति उनमें यह सकारात्मक दृष्टिकोण को विकसित करता है। सूर्य की गर्मी को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि चौथे भाव की शीतलता को यह जला कर खत्म कर सकता है। ऐसे में घर में या फिर किसी भी व्यक्ति के मन में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। संभव है कि अप्रिय या असंतोषजनक घटनाएं भी जिंदगी में घटनी शुरू हो जाएं।

चतुर्थ भाव में चंद्रमा

चंद्रमा मातृत्व से जुड़ा है। यह भावनाओं से रिश्ता रखता है। आप क्या महसूस कर रहे हैं, उससे इसका जुड़ाव होता है। चंद्रमा जब चतुर्थ भाव में होता है, तो यह बिल्कुल सामान्य या अच्छा महसूस करता है। यदि शत्रु ग्रह भाव और चंद्रमा को पीड़ित नहीं करते हैं, तो ऐसे में व्यक्ति की प्रवृत्ति शांत रहती है। भावनात्मक रूप से भी उसमें और विकास होता है। ऐसे व्यक्ति में ममतामयी स्वभाव विकसित होने लगता है, जिसकी वजह से उसके बच्चों के जीवन में उसकी भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण बन जाती है। कुछ प्रेरक शक्ति भी इसके पीछे खड़ी होती है। वे अन्य लोगों की भावनाओं को समझने लगते हैं। फिर भी यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि किसी का लालन-पोषण करने की एवं उनका समर्थन करने की उनमें कितनी क्षमता है।

चौथे भाव में मंगल

मंगल बहादुरी के साथ अनुशासन और आवेग का भी प्रतिनिधित्व करता है। एक ग्रह के रूप में मंगल की पहचान है। चौथे भाव में स्थित होने पर यह बेचैनी को बढ़ाता है। इसका नतीजा यह होता है कि घर में यह ठंडक लेकर आता है। इसके परिणाम की वजह से किसी व्यक्ति का स्वभाव बेहद उग्र हो सकता है। उसमें दूसरों को दोष देने की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है। इतना ही नहीं ईर्ष्या और लालच की भी यह वजह बनता है। इससे छोटे भाई-बहनों और माताओं को समस्या होने लगती है। वैसे, संपत्ति के ग्रह के रूप में देखें तो मंगल किसी भी व्यक्ति के जीवन में अचल संपत्ति और समृद्धि ला सकता है।

चतुर्थ घर में बुध

बुद्धि पर बुध का नियंत्रण तो होता ही है, साथ में संचार, भाषण, रचनात्मकता एवं त्वचा को भी यह नियंत्रित करता है। चौथा घर किसी व्यक्ति के दिमाग में घूम रहे बहुत से विचारों एवं युक्तियों की ओर इशारा करता है। यदि चंद्रमा अच्छी स्थिति में न रहे तो ऐसे में यह भ्रमित कर सकता है। दूसरी और बुध की यह खासियत है कि जीवन ने यह रचनात्मकता लेकर आता है। इतना ही नहीं, जीवन में यह चंचलता भी लाता है। साथ ही कई तरह के काम करने की इच्छा भी यह विकसित करता है। इस तरह के लोगों को सीखने में बड़े ही आनंद की अनुभूति होती है। साथ ही अपनी भाषा में भी सुधार करने की इच्छा उनमें जागती है। हालांकि, यह किसी व्यक्ति की मां के लिए बीमारी लेकर आ सकता है। साथ ही मां के लिए यह समस्याओं की वजह भी बन सकता है।

चौथे घर में बृहस्पति

बृहस्पति एक ऐसा ग्रह है, जिसका संबंध दर्शन और अध्यात्म से है। नतीजा इसका यह होता है कि इस भाव में इसके स्थित होने से किसी व्यक्ति के अंदर सीखने और सिखाने में अत्यधिक रुचि विकसित हो जाती है। साथ ही वे इसके लिए प्रयास भी करने लगते हैं। ज्ञान और अंतर्ज्ञान का ग्रह भी बृहस्पति को माना गया है। यह किसी व्यक्ति को यह समझने में सहायता करता है कि उसे क्या कहा जा रहा है। साथ ही वर्तमान घटनाओं के आधार पर वह भविष्य को किस तरीके से देख सकता है। ऐसे व्यक्ति की मां बहुत ही अच्छी तरह से पढ़ी-लिखी एवं बुद्धिमान हो सकती हैं। इससे यह व्यक्ति उनका मार्गदर्शन प्राप्त करके एक बहुत ही अच्छा नेता बन सकता है। अच्छी तरीके से वह देखरेख करने वाला बन सकता है। साथ ही एक मार्गदर्शक की भूमिका भी निभा सकता है।

चतुर्थ भाव में शुक्र

कामुक सुख और विलासिता से शुक्र ग्रह जुड़ा हुआ है। इसका परिणाम यह होता है कि चौथे भाव में यह ग्रह एक बहुत ही सुंदर घर प्रदान कर सकता है। साथ ही पसंद की सभी सुंदर चीजें भी यह उपलब्ध करा सकता है। इससे लोगों का ध्यान उज्जवल और चमकदार चीजों की ओर आकर्षित हो जाता है। ये चीजें लोगों (व्यवहार) के रूप में भी हो सकती हैं या फिर किसी वस्तु के रूप में भी। इन्हें यह जान लेना चाहिए कि जो एकदम सही और शुद्ध नजर आ रहा है, वह हमेशा ऐसा नहीं होता है। इसे समझने के लिए अत्यंत सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। ध्यान रखना होता है कि बाहरी स्वरूप से मन प्रभावित न हो।

चौथे भाव में शनि

शनि एक ऐसा ग्रह है, जो वैराग्य और भय का प्रतीक है। इसी का नतीजा यह होता है कि न तो जातक और न ही उसकी मां अच्छी स्थिति में रह पाती हैं। शनि बचपन में ही उदासी लेकर आता है। साथ ही बचपन में इसके कारण जातक को काफी अपमान भी सहना पड़ता है। अब इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि यह प्रवृत्ति तब भी जारी रहती है, जब वह व्यस्क बन जाता है। हम सभी यह जानते हैं कि हमारा बचपन ही हमारी बाकी जिंदगी को आकार देने का काम करता है। जिस तरह की परिस्थितियां ऐसे लोगों को मिलती हैं, उनकी वजह से उनमें आत्मविश्वास की काफी कमी हो जाती है। साथ ही वे आत्मग्लानि से भी भरे रहते हैं। ये चीजें उनके नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं। ऐसे जातकों की मां को कोई पुरानी बीमारी हो सकती है। इससे वे जिंदगी भर पीड़ित रह सकती हैं।

चतुर्थ घर में राहु

उथल-पुथल के साथ विस्थापन वाले ग्रह के रूप में भी राहु की पहचान है। साथ ही यह उलझनें भी पैदा करता है। इस भाव में राहु बिल्कुल ऐसा ही करता है। यह परेशान करने वाली भावनाओं को पैदा करता है। दुनिया के प्रति दृष्टिकोण को भी यह नकारात्मक बना देता है। साथ ही यह एक ऐसा दृष्टिकोण जातक के अंदर विकसित करता है, जिसकी वजह से उसका ध्यान खुद पर केंद्रित हो जाता है। इसकी वजह से जातक दूसरे लोगों को दबाव में डालते हैं और अपनी भावनात्मक इच्छाओं को उनके जरिए पूरा करने की उम्मीद रखते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि जिंदगी के सभी चरणों में परिपक्वता की कमी रहती है। साथ ही जातक हमेशा गैर जिम्मेदारी के साथ पेश आता है।

चौथे घर में केतु

चौथे भाव में केतु के होने की वजह से जातक अपने विचारों में उलझने लगता है। उसकी धारणा भी पूरी तरीके से स्पष्ट नहीं हो पाती है। चौथा भाव भावनात्मक रूप से हमारे स्वयं की स्थिति को दर्शाता है। बाकी दुनिया से यह हमें जुड़ने की अनुमति प्रदान करता है। केतु खुद का विश्लेषण करने की क्षमता को घटा देता है। किसी के भी साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने के सामर्थ्य में भी यह कमी लाता है। इसकी वजह से किसी जातक की जिंदगी में ये सारी चीजें बाधित हो जाती हैं। हर चीज उन्हें धोखा प्रतीत होने लगती है और इसी के धुंध में जातक की जिंदगी ढक जाती है।


चतुर्थ भाव में राशि चिह्न

अपने परिवार और अपनी भावनाओं के प्रति जो आपका ऊर्जावान दृष्टिकोण होता है, ज्योतिष में चतुर्थ भाव उसे प्रदर्शित करता है। इससे वायु राशि वाले अपनी बुद्धि और बात करने की क्षमता का इस्तेमाल परिवार को एक सूत्र में बांधने के लिए कर पाते हैं। उसी तरह से अग्नि राशि वाले रचनात्मकता का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही एक्शन में भी वे आ जाते हैं। पृथ्वी राशि वाले व्यवहारिक होते हैं। वे थोड़े रूढ़िवादी भी होते हैं। जल राशि वाले अपनी भावनात्मक ऊर्जा का निवेश करते हैं। वे परिवार को पूरा बनाने के लिए करीबी रिश्तों पर निर्भर हो जाते हैं।

चतुर्थ भाव पर मेष का नियंत्रण

मेष एक जल भाव के साथ एक अग्नि चिह्न है। इस राशि/भाव के संयोजन से जो लोग पैदा होते हैं, वे परिवार के साथ बातचीत करते रहते हैं। अपनी गहरी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए वे खुली सोच पर भरोसा करते हैं। साथ ही परंपरागत तरीके से हटकर सोचने की इनकी आदत होती है। वैसे, स्वतंत्र तरीके से जो इनकी सोचने की चाहत होती है, इसके लिए परिवार की तरफ से भी इन्हें पूरा सहयोग मिलता है। नकारात्मक पहलू पर गौर किया जाए, तो अपनी आजादी के लिए इनका घर ही इनका पहला रणक्षेत्र बन जाता है। मेष चतुर्थ भाव के लोग जब बच्चे होते हैं, तो उन्हें बहुत ही अधिक आजादी पसंद होती है। वे अपनी आंतरिक भावनाओं की खोज कर सकते हैं। ऐसा वे तब करते हैं, जब वे संघर्ष कर रहे होते हैं। जीवन के अनुभवों को वे इस तरह से बनाते चले जाते हैं। उनके परिवार की जो मनमौजी भावना होती है, उन्हें भी वे शांत कर सकते हैं।

चतुर्थ घर पर वृषभ का नियंत्रण

वृषभ एक जल राशि के साथ पृथ्वी चिह्न है। यही वजह है कि इस राशि/भाव के संयोजन के अंतर्गत जो लोग जन्म लेते हैं, वे जिद्दी स्वभाव के होते हैं। साथ ही वे पारंपरिक तरीके से चलने वाले भी होते हैं। पारिवारिक और आंतरिक भावनाओं को वे संभाल कर रखने वाले होते हैं। वे सहयोग करने वाले और स्थिर होते हैं। इससे जीवन में खुद को विकसित करने में उन्हें बड़ी मदद मिलती है। अब नकारात्मक तरीके से देखें तो पारिवारिक कलहों से वे सबक सीखते हैं। इसके जरिए वे परिवार में सामंजस्य बैठाने के लिए प्रेरित होते हैं। अपनी रोजाना की जिंदगी में वृषभ चतुर्थ भाव के जातकों को अनुष्ठान करना पसंद होता है। वे अपनी दिनचर्या का पूरी तरीके से पालन करते हैं। उन्हें निरंतरता भी पसंद होती है। जैसे-जैसे वे बड़े होते जाते हैं, रूढ़िवादी मूल्यों के वे पक्ष होते चले जाते हैं। साथ ही ये अपने परिवार की रीढ़ भी बनते चले जाते हैं।

चौथे भाव पर मिथुन का नियंत्रण

मिथुन जल भाव के साथ एक वायु चिह्न है। यही वजह है कि इस राशि/भाव के संयोजन के अंतर्गत जिन लोगों का जन्म होता है, वे एक परिवार का हिस्सा बनकर रहना बहुत पसंद करते हैं। इनमें संवाद करने का कौशल होता है, जिसकी वजह से संचार तकनीकी, सूचनाओं और नेटवर्किंग आदि के जरिए ये अपनी अंतरात्मा से जुड़ी भावनाओं का पता लगा लेते हैं। सकारात्मक रूप से बात करें तो ये परिवार के बारे में कहानी के रूप में सब कुछ बताने वाले होते हैं। परिवार के सभी सदस्यों से ये खुले होते हैं। नकारात्मक रूप से देखें तो इन्हें किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मदद की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए होता है कि बड़ी आसानी से ये विचलित हो जाते हैं। इनके जीवन में एक ऐसे मार्गदर्शक की कमी होती है, जो सुरक्षित तरीके से इनका मार्गदर्शन कर सके। मिथुन चतुर्थ भाव के जातक अपने माता-पिता के साथ अपने साथियों से भी बड़े होने के दौरान निरंतर सीखना पसंद करते हैं। साथ ही मानसिक रूप से वे इनसे जुड़े रहते हैं। इनके अंदर कितनी भी गहरी भावनाएं क्यों न हो, इनकी आत्मा तक पहुंचने से पहले ये इनके दिमाग से होकर गुजरती हैं।

चौथे घर पर कर्क का नियंत्रण

कर्क जल राशि है, जो इस भाव को नियंत्रित करती है। यही कारण है कि इस राशि/भाव के संयोजन के अंतर्गत जन्म लेने वाले लोग एक परिवार के रूप में रहना पसंद करते हैं। वे अपनी भावनाओं का पता लगाते हैं। ठीक तरीके से पोषण पर इनका ध्यान रहता है। करुणा की भावना भी इनके अंदर होती है। इन सभी चीजों को माध्यम बनाते हुए ये अपनी अंतरात्मा की भावनाओं का पता लगाते हैं। ये ऐसे लोग होते हैं, जो अपने परिवार की तरफ से देखभाल के योग्य होते हैं। सकारात्मक रूप से देखें तो ये अपने परिवार के लिए इसके दिल और आत्मा से कम नहीं होते हैं। ये यादों को संजो कर रखने वाले होते हैं। नकारात्मक तरीके से देखें तो ये भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने का फायदा अपने बड़े ही नजदीकी लोगों पर हक जताने के लिए करते हैं। कर्क चतुर्थ भाव के जातकों को रिश्तेदारों के साथ वक्त बिताना बड़ा पसंद होता है। वे अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ अपनी जनजाति की संस्कृति के बारे में भी जानना पसंद करते हैं। इनकी गहरी भावनाएं इनकी आत्मा में भी उतर जाती हैं, जो जिंदगी में हमेशा इन्हें आगे लेकर जाती हैं।

चतुर्थ भाव पर सिंह का नियंत्रण

अब चूंकि सिंह एक जल भाव के साथ एक अग्नि राशि है, इसलिए इस राशि/भाव के संयोजन के तहत जो लोग पैदा होते हैं, वे अपने परिवार के साथ संवाद स्थापित करने के लिए और अपनी गहरी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अपनी कल्पनाओं और अपने प्रदर्शन पर अधिक भरोसा करते हैं। खुद में रहकर इन्हें आनंद लेना पसंद होता है साथ ही अपने परिवार के साथ भी ये जुड़ना चाहते हैं। ये अपने परिवार के लिए ऐसे व्यक्ति से कम नहीं होते, जिसका भविष्य उज्जवल हो। जो न केवल रचनात्मक हो, बल्कि एक विचारक भी हो। साथ ही जो हमेशा मनोरंजन करने वाला हो। अब नकारात्मक पक्ष की बात करें तो इनके अंदर संकीर्ण विचार भी पनप जाते हैं। लोकप्रियता हासिल करने की इनके अंदर प्रबल चाहत विकसित हो जाती है। इस राशि के अंतर्गत जो लोग पैदा होते हैं, रचनात्मक रूप से उन्हें चीजों में भाग लेना पसंद होता है। अलग-अलग अवसरों पर और अलग-अलग गतिविधियों के लिए इन्हें जमा होना अच्छा लगता है। अपने परिवार में जिंदगी भर ये किसी-न-किसी तरह से केंद्र बिंदु की तरह बने रहते हैं। इनके अंदर यह इच्छा इनकी भावनाओं के जरिए प्रवाहित होती रहती है कि इन्हें हर तरह से सम्मान मिले। यही चीज इन्हें सफलता की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित भी करती है।

चौथे भाव पर कन्या का नियंत्रण

अब चूंकि कन्या एक जल राशि के साथ एक पृथ्वी चिह्न है, इसलिए इस राशि/भाव के संयोजन के अंतर्गत जिन लोगों का जन्म होता है, वे अपने परिवार के साथ अपनी आंतरिक भावनाओं के मामले में भेदभाव करने की प्रवृत्ति वाले होते हैं। साथ ही वे इसे लेकर बड़े ही सावधान भी होते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि अपने परिवार को ये अधिकतम सेवा दे सकें। दूसरों का ये सहयोग करते हैं। अपने परिवार से ये हमेशा नई चीजें सीखते रहते हैं। इनके परिवार की जो जानकारी होती है, सकारात्मक तरीके से ये इन्हें संभाल कर रखते हैं और एक अच्छे प्रबंधक की भूमिका निभाते हैं। नकारात्मक पक्ष को देखें तो इनके जो पारिवारिक रिश्ते हैं, उनमें छोटी-छोटी चीजों के लिए ये व्यवधान पैदा करते हैं। इसके कारण ये जो भी बोलते हैं, उसकी वजह से लगातार झुंझलाहट पैदा होती रहती है। कन्या चतुर्थ भाव में जन्म लेने वाले जातक जानते हैं कि पारिवारिक जिंदगी को कैसे संभाल कर रखना है। साथ ही वित्तीय मामलों को भी संभालना ये जानते हैं। आहार के साथ घर के लोगों की देखभाल एवं कई अन्य जरूरतों को भी ये बहुत ही अच्छी तरीके से संभाल लेते हैं। इनके अंदरूनी गहरे विचार इनकी भावनाओं में उतर आते हैं, जो इन्हें मददगार बनाते हैं।

चतुर्थ घर पर तुला का नियंत्रण

तुला जल भाव के साथ एक वायु राशि है। फिर भी इस राशि/भाव के संयोजन के अंतर्गत जन्म लेने वाले जातक एक परिवार का हिस्सा रह कर जिंदगी गुजारना पसंद करते हैं। इनकी जो विश्लेषणात्मक क्षमता होती है, उनके जरिए और संवाद के माध्यम से ये अपनी आंतरिक भावनाओं के बारे में पता लगा लेते हैं। अपने पारिवारिक जीवन को ये बहुत ही व्यवस्थित तरीके से रखना चाहते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच बेहतर सामंजस्य चाहते हैं। ये शांतिदूत की तरह परिवार के लोगों को जोड़ कर रखते हैं और उनकी सेवा करते हैं। सकारात्मक रूप से देखें तो ये इस बात को समझते हैं कि सभी लोगों को खुद पर नियंत्रण रखना चाहिए। ये परिवार के लोगों की अपेक्षाओं को भी लगातार मध्यस्थता करके नियंत्रित करते रहते हैं। नकारात्मक पक्ष की बात करें तो ये सभी को खुश करने की कोशिश करते रहते हैं। भले ही सभी खुश हों या न हों। तुला चतुर्थ भाव के लोग अपने रिश्ते को सुचारू तरीके से चलाने और घर में शांति बनाए रखने में आनंद महसूस करते हैं।

चौथे घर पर वृश्चिक का नियंत्रण

वृश्चिक जल राशि के साथ एक जल चिह्न है। इस राशि/भाव के संयोजन वाले लोगों को भी परिवार का हिस्सा बन कर जिंदगी जीना पसंद होता है। ये अपने आवेग, अपनी ताकत और अपनी एकीकृत भावनाओं के जरिए अपनी अंतरात्मा से जुड़ी इच्छाओं का पता लगा लेते हैं। अपने परिवार के अंदर ये गतिशीलता कैसे बनाए रखें, इसके बारे में सीखना पसंद करते हैं। अपने लाभ के लिए ये अपने परिवार को भी इस्तेमाल में लाते हैं। सकारात्मक रूप से देखे तो अपने परिवार के लिए ये खुद को बदलना पसंद करते हैं। नकारात्मक पहलू पर नजर डालें, तो अपने परिवार पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए ये कई बार चीजों को रहस्यमय बनाए रखते हैं। कई बार इन इनमें धोखा देने की भी प्रवृत्ति होती है। वृश्चिक चतुर्थ भाव के लोग अपने परिवार से जो भावनात्मक चीजें सीखते हैं, उन्हें ये अपनी ताकत के रूप में विकसित करना चाहते हैं। यदि ये कुछ व्यक्त करना चाहते हैं, तो इनके अंदर गहराई में छुपी भावनाएं इनकी आत्मा के जरिए प्रवाहित होती हुईं इनकी आंखों से झलकनी शुरू हो जाती हैं।

चतुर्थ भाव पर धनु का नियंत्रण

धनु एक जल भाव के साथ एक अग्नि राशि है। इसलिए इस राशि/भाव के संयोजन के अंतर्गत जो लोग पैदा हुए हैं, वे अपने परिवार के साथ जुड़ने के लिए और अपनी गहरी भावनाओं को विकसित करने के लिए खोज, अधिपत्य और रोमांच पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। वे चाहते हैं कि उनके परिवार का दृष्टिकोण पूरी दुनिया को लेकर हो। वे अपने परिवार के लिए हमेशा नई चीजें खोजते हैं। परिवार के लिए नए विचारों और मूल्यों की खोज में रहते हैं। जहां तक पारिवारिक रिश्तों की बात होती है, तो ये इसमें काफी अपेक्षाएं रखते हैं। साथ ही ये दमन करने वाले भी हो सकते हैं। धनु चतुर्थ भाव के लोग परिवार वालों को पूरी दुनिया के समक्ष लाते हैं। ये पूरी दुनिया की चीजों को परिवार के सामने लेकर आते हैं। इनकी जो आंतरिक भावनाएं होती हैं, ये इन्हें पूरी दुनिया की यात्रा करने के लिए प्रेरित करती हैं। इनकी इच्छा होती है कि ये अपने आप को और व्यापक बनाते चले जाएं।

चतुर्थ घर पर मकर का नियंत्रण

मकर राशि एक जल भाव के साथ एक पृथ्वी राशि है। इसलिए जब परिवार और इनके आंतरिक भावनाओं की बात आती है, तो इस राशि/भाव संयोजन के तहत पैदा हुए जातक बड़ी ही जिम्मेवारी से पेश आते हैं। ये कर्तव्यों का पालन करने वाले और परिस्थितियों के अनुसार बढ़ने वाले होते हैं। इन्हें पहल करना पसंद होता है। अपने परिवार के प्रति अपनी जवाबदेही से ये सीखना चाहते हैं। सकारात्मक तरीके से ये अपने परिवार का भार उठा लेते हैं। बहुत ही अच्छी तरीके से ये हर चीज का प्रबंध करते हैं। एक पर्यवेक्षक के रूप में परिवार पर ये नजर रखते हैं। इनके नकारात्मक पक्ष की बात करें तो ये कई बार कुछ ज्यादा ही नियंत्रित करने वाले और अपेक्षा करने वाले हो सकते हैं। परिवार के सदस्यों के साथ ये इस तरह से व्यवहार करते हैं, जैसे वे श्रमिक हों। मकर चतुर्थ भाव के लोग अपने परिवार के लिए लक्ष्य निर्धारित करना पसंद करते हैं। समृद्धि कैसे आए, इसके लिए ये परिवार वालों का मार्गदर्शन करते हैं। इन्हें जो उपलब्धियां मिलती हैं पारिवारिक परिप्रेक्ष्य में ये इनकी आंतरिक भावनाओं को गतिशीलता प्रदान करती हैं।

चतुर्थ भाव पर कुंभ का नियंत्रण

कुंभ एक जल राशि के साथ एक वायु राशि है। इसलिए राशि/भाव के संयोजन वाले लोगों को परिवार से जुड़ना पसंद होता है। ये अपने मूल्यों, अपनी मित्रता और अपनी भूमिका निभाने की क्षमताओं के माध्यम से अपनी अंतरात्मा की भावनाओं का पता लगा लेते हैं। ये एक तरीके से सोशल इंजीनियर होते हैं, जो पारिवारिक जीवन में अपने स्थान की खोज में रहते हैं। सकारात्मक पक्ष को देखें तो ये अपने परिवार के सभी सदस्यों की आदर्श भूमिका को अच्छी तरीके से समझते हैं। साथ ही एक समूह के रूप में इन्हें इस्तेमाल करना भी जानते हैं। नकारात्मक रूप को देखें तो ये अपने परिवार को एक सामाजिक प्रयोग में बदलने की कोशिश करते हैं। ऐसे में ये सभी की भावनाओं का बहुत ही कम ख्याल रखते हैं। कुंभ चतुर्थ भाव के लोग आदर्श परिवार बनाने की कोशिश हमेशा करते हैं। इनके अंतरात्मा की भावनाएं इनके दिमाग के जरिए प्रवाहित होती हैं और इसके जरिए ये अपने अंदर झांक कर खुद से परे चीजों को भी देख पाते हैं।


चौथा भाव क्या दर्शाता है?

कुंडली के निचले भाग में स्थित चौथा भाव घर और परिवार का प्रतिनिधित्व करता है। चतुर्थ भाव में स्थित जन्म का ग्रह मां या इसके समकक्ष रिश्ते के साथ जातक के संबंध और घरेलू चीजों पर उनके अनोखे दृष्टिकोण को भी प्रदर्शित करता है।


मैं अपने चतुर्थ भाव को सक्रिय कैसे करूं?

यदि आप दूसरों के लिए खुशियां लेकर आते हैं, तो चतुर्थ भाव स्वतः सक्रिय हो जाता है। आशीर्वाद धन्यवाद जैसे शब्द के रूप में मिलते हैं। चतुर्थ भाव खुशियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यदि आप खुशियां और आनंद फैलाते हैं, तो इससे चतुर्थ घर सक्रिय हो जाता है।


समापन

पूरे लेख का सार देखें तो चतुर्थ भाव दरअसल माता के गर्भ से लेकर समाधि तक की यात्रा को प्रदर्शित करता है। यह सब हमारी जड़ों तक, हमारे मूल स्थान तक और उस जगह तक आता है, जिसे हम घर कहते हैं। वहीं दूसरी ओर यह हमें यह याद भी दिलाता है कि हमें वही लौट जाना चाहिए, जहां से हम आए थे। यह भाव सांसारिक ज्योतिष में मातृ, प्रकृति, मौसम, जलवायु और खान आदि का प्रतिनिधित्व करता है।