आठवें भाव में बृहस्पति का अर्थ


परिचय

क्या सबसे बड़े का अभिनंदन हम नहीं करेंगे, कहिए? बृहस्पति जो हमारे बड़े ही प्रिय आध्यात्मिक गुरु हैं, ये इतने भव्य और महान हैं कि ये जहां जाते हैं, वहां इनका स्वागत होता है। ऐसे परोपकारी ग्रह बृहस्पति के आठवें भाव में होने का अर्थ यह है कि जातक न केवल आशावादी हो सकता है, बल्कि उसके सहयोगी होने की भी पूर्ण संभावना रहती है। ज्योतिषीय सिद्धांत यह भी सुझाता है कि आठवें भाव में बृहस्पति यदि हो, तो अपने जीवनसाथी से भी धन प्राप्त करने में सहयोग मिल सकता है। क्या वाकई में ऐसा होता है? जी हां, न केवल अपने साथी से, बल्कि अपने परिवार के अन्य सदस्यों और दोस्तों से भी धन प्राप्त करने में आपको मदद मिल सकती है। नैतिकता, कृतज्ञता और उम्मीद, ये सभी बृहस्पति की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। के आपकी पहुंच के लिए, आपके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए और अच्छी संभावना के लिए भी मार्ग प्रशस्त करता है।

अत्यंत ही शुभ माने जाने वाले गुरु यानी कि बृहस्पति आप पर कृपा बरसाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। फिर भी यदि पीले रंग का यह ग्रह किसी अशुभ ग्रह के प्रभाव में आ जाता है, तो ऐसे में जातक के जीवन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है। इसकी वजह से आपके विवाह संबंध में तो समस्याएं आ ही सकती हैं, साथ में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं संतान से जुड़ी परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं। अब आप में से कुछ लोग यह जरूर सोच रहे होंगे कि बृहस्पति का आठवें भाव में होना अच्छा होता है या बुरा? तो बिना एक भी मिनट बर्बाद किए हम आगे बढ़ते हैं सबसे प्रासंगिक उत्तर की खोज में।


क्या आठवें भाव में बृहस्पति का होना अच्छा है?

यदि बृहस्पति अष्टम भाव का स्वामी हो और दूसरे भाव में स्थित हो, तो बृहस्पति जिस भाव से गुजर रहा है, उस भाव की वजह से आपको प्रतिकूल नतीजे प्राप्त हो सकते हैं। यहां गोचर बृहस्पति की शक्ति को जांचना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। सामान्य तौर पर अष्टम भाव में बृहस्पति की उपस्थिति को जातक को सहज ज्ञान से युक्त बनाने वाला माना जाता है। साथ ही जातक को और अधिक परिश्रम करने की जरूरत पड़ती है। जातक पहेलियां एवं रहस्यमयी चीजों को सुलझाने में दिलचस्पी लेने लगते हैं। मजबूत गुरु का अपनी स्वयं की राशि में गोचर यह दर्शाता है कि किसी भी स्वास्थ्य से संबंधित समस्या या फिर बीमारी को जातक दूर कर सकता है। जातकों को आध्यात्मिक जीवन की ओर आगे बढ़ने में यह सहयोग करता है। वहीं, जिन लोगों का बृहस्पति कमजोर होता है, उन्हें स्वास्थ्य से संबंधित कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

अष्टम भाव में बृहस्पति मुख्य रूप से जिन क्षेत्रों को प्रभावित करता है, वे निम्नवत हैं:

  • कॅरियर में प्रगति
  • पेशा
  • विश्लेषणात्मक कौशल
  • धन और संपत्ति

बृहस्पति के आठवें भाव में गोचर का सकारात्मक प्रभाव

बृहस्पति जब भी अष्टम भाव में गोचर करता है, तो इससे जातकों को अपनी रणनीति में सुधार करने का अवसर मिल जाता है। वे अपने सबसे पसंदीदा विषयों पर शोध कार्य और गहनता से जांच भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं, जातक बहुत जल्द किसी भी मुद्दे की जड़ तक पहुंच सकते हैं, जिससे कि उन्हें एकदम सटीक उत्तर ढूंढने में मदद मिलती है। साथ ही समस्याओं को सुलझा लेने का एवं रहस्यों का पता लगा लेने का उनके पास यह एक बड़ा ही मजेदार समय हो सकता है। अपने जीवनसाथी से वे एक बार फिर से भावनात्मक एवं भौतिक दोनों ही तरीके से जुड़ जाते हैं। कुछ नहीं करने वाली चीजों को करने के लिए वे अपने साथी के साथ बिस्तर पर लेट जाते हैं।

अष्टम भाव में यदि बृहस्पति का गोचर होता है, तो जातकों को अपनी योजना को और बेहतर बनाने का आशीर्वाद मिल सकता है। एक बार जब ऐसा हो जाता है, तो अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए वे अपनी योजनाओं को पूरी तरीके से पूरा कर पाते हैं। इतना ही नहीं, सकारात्मकता के साथ रहस्यवाद में भी जातक का भरोसा विकसित होना शुरू हो जाता है और अपने जीवन में वे आध्यात्मिकता को ढूंढ सकते हैं। साथ ही जातकों को एकदम नई ऊर्जा प्राप्त होती ही है। साथ में उन्हें सकारात्मक ऊर्जा भी मिल सकती है, जो कि वे पूरी दुनिया में फैलाना चाहते हैं। ऐसा इसलिए कि उनका यह मानना होता है कि यदि वे ऐसा करेंगे, तो इससे उन्हें अच्छी चीजें वापस मिल सकती हैं। इन सबके अलावा यह भी उल्लेखनीय है कि अष्टम भाव में बृहस्पति को लेकर वैदिक ज्योतिष यह बताता है कि ये जातक बहुत मेहनत करते हैं। उनके व्यक्तित्व में भी सुधार आता है, जिसकी वजह से वे अच्छे इंसान बनते हैं। साथ ही वे अपने साथी के प्रति वफादार रहते हैं। इसके अलावा जिन जातकों के अष्टम भाव में गुरु होता है, वे संपत्ति और अन्य विरासत में भी और वित्तीय लाभ प्राप्त करके उनमें बढ़ोतरी कर सकते हैं। ससुराल से भी जातक को उत्तराधिकार प्राप्त होने की संभावना रहती है। मानसिक आघात, जो उन्हें कभी पहुंचा है, उन्हें ठीक करने के लिए ये अधिक सहज, दयालु और बेहद संवेदनशील हो जाते हैं।

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जिन जातकों का गुरु आठवें भाव में होता है, वित्तीय मामलों को संभालने में वे बहुत ही कुशल होते हैं। यही कारण है कि अच्छे आर्थिक हालात पर उनकी मजबूत पकड़ हो सकती है। कुंडली के मुताबिक जातकों में ऐसी मानसिक क्षमताएं हो सकती हैं, जिनका इस्तेमाल वे सामान्य तौर पर अपने कष्टों एवं परेशानियों को ठीक करने के लिए करते हैं। यदि घर आठवें भाव के बृहस्पति के नकारात्मक रूप से प्रभावित हो गया है, तो धीरे-धीरे जीवन में इसके बाधा उत्पन्न करने की आशंका रहती है। ऐसे में जातक स्वभाव से थोड़े छिपाने वाले बन सकते हैं। अपने करीबी लोगों के साथ में भी वे बहुत सी बातों को साझा करने से बचने लगते हैं। सामाजिक रूप से वे पूरी तरीके से सक्रिय रहते हैं और कम प्रयास करके भी एक बड़े सामाजिक समूह का निर्माण कर लेते हैं। ये एक बड़े ही वफादार और समर्पित जीवन साथी होते हैं। ये केयर करने वाले परिवार के सदस्य होते हैं। साथ ही दोस्तों के भी बहुत अच्छे दोस्त बने जाते हैं। जिन जातकों का बृहस्पति अष्टम भाव में होता है, उन्हें देखभाल करने वाला और प्यार करने वाला जीवनसाथी मिल सकता है।


गुरु के अष्टम भाव में गोचर का नकारात्मक प्रभाव

जिन जातकों का बृहस्पति अष्टम भाव में कमजोर या फिर प्रतिकूल स्थिति में होता है, उन्हें इस शुभ ग्रह से आशीर्वाद नहीं मिल पाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि बृहस्पति का अशुभ ग्रहों से संबंध हो जाता है। इससे गुरु अन्य ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव में आ जाता है। इस तरह से बृहस्पति अपनी इस संगति की वजह से जातकों की आर्थिक स्थिति में रुकावटें पैदा कर सकता है। इतना ही नहीं, विरासत वाली संपत्ति से संबंधित लंबित कार्यों में भी यह अवरोध और विलंब उत्पन्न कर सकता है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो बृहस्पति के नकारात्मक प्रभाव से पीड़ित जातकों को मलेरिया, हैजा या अन्य वायरल संक्रमण से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा उन्हें मांसपेशियों में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। जोड़ों में भी उन्हें दर्द सता सकता है। बृहस्पति के नकारात्मक प्रभाव की वजह से आकस्मिक मृत्यु भी हो सकती है और किडनी तक फेल हो सकते हैं।

यदि गुरु आठवें भाव में वक्री हो जाए तो जातक के जीवन पर बहुत ही बुरा असर पड़ सकता है। वे अंतर्मुखी हो जाते हैं। सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने से वे बचने लगते हैं। उनसे कितना भी पूछा जाए, लेकिन वे अपने विचारों को साझा नहीं करते हैं। अपने नजदीकी लोगों के साथ भी वे ज्यादा वक्त नहीं बिताते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि एक संतुलित व्यक्तित्व बनाए रखने के लिए उनका संघर्ष शुरू हो जाता है। भावनात्मकता उनसे दूर होने लगती है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि किसी के लिए भी उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। इसकी वजह से जातक की जिंदगी में कई बड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


बृहस्पति के लिए कौन-सा भाव बुरा है?

दसवें भाव में शुक्र या बुध का संयोजन बृहस्पति ग्रह के जातकों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह सच है कि बृहस्पति कभी भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता है, मगर यदि शनि, राहु या केतु जैसे अशुभ ग्रहों से यह जुड़ जाए, तो ऐसे में जातकों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका प्रबल हो जाती है। छठे, सातवें और दसवें भाव को बृहस्पति के लिए प्रतिकूल माना जाता है। बृहस्पति के छठे भाव में होने का अर्थ यह है कि पीले ग्रह का बुध और केतु के साथ संयोजन होने वाला है। ऐसे में जातक बहुत स्वार्थी बन जाते हैं। वहीं, शुक्र का सप्तम भाव में स्थित होना जातकों को मिला-जुला परिणाम दे सकता है। पेशे का भाव जो कि दसवें भाव के रूप में जाना जाता है, यह शनि के स्वामित्व में होता है। इसलिए शनि के लक्षण वाले जातक ही सिर्फ सकारात्मक नतीजों का स्वाद चख सकते हैं। दसवें भाव में शनि के साथ गुरु का संयोजन जातकों के लिए मानसिक तनाव देने वाला साबित हो सकता है।

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समापन

अंत की तरफ बढ़ते हुए हमारे लिए इस ब्लॉग में लिखी गई बातों पर एक बार फिर से नजर डालने का वक्त आ गया है। हमें ऐसा लगता है कि आपको बृहस्पति के अष्टम भाव में होने के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो चुकी है। हमने कुछ सकारात्मक लक्षणों के बारे में जाना कि ऐसे जातक आध्यात्मिकता को प्राप्त कर सकते हैं। उनमें विश्लेषणात्मक कौशल विकसित हो सकता है। साथ ही अपने काम में भी वे दक्षता हासिल कर सकते हैं। नकारात्मक लक्षणों के बारे में भी हमने जाना कि जातकों को स्वास्थ्य संबंधी और आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। तो चलिए, हमारे लिए अब लाइट बुझाने का वक्त आ गया है, लेकिन आप इस एस्ट्रो-टेक प्लेटफार्म पर ऐसे ही और ब्लॉग्स के लिए स्क्रॉल करते हुए आगे बढ़ सकते हैं।