शिवजी के 108 नाम और उनकी महिमा

हिंदू पौराणिक कथाओं में, तीन मुख्य देवता हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव)। इन्हें सामूहिक रूप से त्रिदेव के नाम से जाना जाता है। ब्रह्मा निर्माता हैं, विष्णु रक्षक हैं, और शिव संहारक हैं।

आदि शंकराचार्य ने कहा था, मुझे क्षमा करें, हे शिव! मेरे तीन सबसे बड़े पाप। मैं काशी की यात्रा पर आया था, यह भूलकर कि आप सर्वव्यापी हैं। आपके बारे में सोचते हुए, मैं भूल गया कि आप सोच से परे हैं। आपसे प्रार्थना करते हुए, मैं भूल गया कि आप शब्दों से परे हैं।

शिव का अर्थ है ज्ञान देना। इस प्रकार, जो ज्ञान का अहसास कराते हैं, वे शिप हैं। इन्हें रुद्र के रूप में भी जाना जाता है, वह पूर्ण आत्म का बोध करवाते हैं। वे हमेशा दीप्तिमान रहते हैं और ब्रह्मांड को भी प्रकाशित करते हैं। शिव की उपस्थिति में भय और नकारात्मक ऊर्जा सब गायब हो जाती हैं। जब शिव प्रसन्न होते हैं तो सुंदर फूलों की वर्षा होती है और सुगंध फैलती है। नि:संदेह, भगवान महेश के 108 नामों का पूरे मन और भक्ति के साथ जप करने से आपके सभी संकट दूर हो जाएंगे।

क्या आपने कभी इस 108 संख्या पर गौर किया या सोचा है? 108 का अंक शुभ माना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण हिंदू देवताओं में से एक, भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता है। शिव पुराण भगवान शिव को समर्पित सबसे पुराने हिंदू धार्मिक ग्रंथों में से एक है, जिसमें भगवान शिव के लिए 108 संस्कृत नाम हैं, जिनमें से प्रत्येक भगवान की एक विशेष विशेषता को दर्शाता है।

अष्टोत्तर शतनामावली पढऩे के लाभ

  • सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है
  • दुख मिटता है
  • रोगों से मुक्ति मिलती है
  • मन में शांति मिलती है
  • भाग्य और सौभाग्य मिलता है
  • स्वयं से साक्षात्कार होता है
  • चेतना जागृत होती है

अगर कोई शिव के 108 नाम का जाप करने में सक्षम नहीं है, तो क्या करें?

शिव के 108 नामों का जाप 108 मनकों की जप माला से किया जा सकता है। कम से कम एक माला तो जपना ही चाहिए, जिससे अधिकतम लाभ मिल सके। इसमें भी विशेष रूप से रुद्राक्ष की माला पूरी करनी चाहिए। माला शांत मन और पूरी तन्मयता के साथ जपनी चाहिए। ऐसे में किसी भी चूक से आपको वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे। यह केवल मंत्र बोलने या दोहराने के बारे में नहीं है। शुद्ध चैतन्य से जप करें। यदि कोई 108 नामों का जाप करने में सक्षम नहीं है, तो शिव पंचाक्षरी मंत्र ‘ओम नम शिवाय का जाप किया जा सकता है।

भगवान शिव के 108 नामों को पढऩे का विशेष समय और तरीका

इन नामों का जाप कभी भी स्थिर मन से किया जा सकता है। इसे सुबह साफ कपड़े और शांत मन से करना सबसे अच्छा होता है। आप 108 नामों का जाप करके शिवलिंग का अभिषेक भी कर सकते हैं। यह भी बेहद फायदेमंद होगा। आप हर हर महादेव भी कह सकते हैं। श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित होता है। नाम जप के लिए सोमवार भी अनुकूल रहता है। इसके साथ महाशिवरात्रि के दिन इन नामों को जपना बेहतर परिणाम देने वाला होता है।

शिव के 108 नाम और उनका अर्थ

नाम अर्थ
ओम शिव नम:भगवान शिव को नमन
ओम महेश्वराय नममहान भगवान शिव को नमन
ओम शम्भवे नम: आनंद स्वरूप वाले भगवान को प्रणाम
ओम पिनाकी नम:पिनाक धनुष धारण करने वाले, धर्म की रक्षा करने वाले भगवान को नमन
ओम शशिशेखराय नम: सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले प्रभु को प्रणाम
ओम वामदेवाय नम: हर प्रकार से प्रसन्न करने वाले और शुभ परिणाम देने वालेे भगवान
ओम विरुपक्षय नम: निर्मल छवि वाले भगवान को नमन
ओम कपर्दिने नम: घने उलझे बालों वाले प्रभु को प्रणाम
ओम निललो हिताय नम: सुबह की लालिमा की तरह लाल सूरज सरीखे भगवान को प्रणाम
ओम शंकराय नमःसभी समृद्धि के स्रोत को नमन
ओम शुलपाणी नम: हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले परमेश्वर को प्रणाम
ओम खतवांगिने नम:खटिया का एक पाया रखने वाले भगवान को प्रणाम
ओम विष्णुवल्लभ नम: भगवान विष्णु के प्रिय शिव को प्रणाम
ओम शिपिविष्टाय नम: ऐसे भगवान जिनका स्वरूप से दुनिया प्रकाशित होती है
ओम अंबिकानाथाय नम:अंबिका के भगवान को नमन
ओम श्रीकांताय नम: जिसका कंठ नीला चमक रहा हो, ऐसे भगवान को नमन
ओम भक्तवत्सल नम: भगवान जो अपने भक्तों को बच्चों की तरह प्यार करते हैं
ओम भवाय नम: ऐसे ईश्वर को नमन, जो स्वयंभू हैं
ओम सर्वाय नम: शिव, जो सब कुछ हैं
ओम त्रिलोकेशय नम: शिव को नमन जो तीनों लोकों के स्वामी हैं
ओम शितकांथाय नम: ऐसे प्रभु को प्रणाम, जिसका कंठ गहरा नीला है
ओम शिवाप्रियाय नम: शक्ति को प्रिय भगवान को नमन
ओम उग्राय नम: अविस्मरणीय उपस्थिति वाले भगवान को नमन
ओम कपालिन नम: भगवान जो कपाल अपने साथ रखते हैं
ओम कामरीय नम: काम पर विजय प्राप्त करने वाले शिव को नमन
अंधकासुर सुदनाय नम: अंधकासुर का वध करने वाले प्रभु को प्रणाम
ओम गंगाधराय नम:अपने बालों में गंगा नदी को धारण करने वाले भगवान को नमन
ओम ललताक्षय नम: रचना के भगवान को प्रणाम
ओम कलाकालाय नम: शिव को नमन जो काल के भी काल हैं
ओम कृपानिधये नम: ईश्वर को प्रणाम, जो करुणा देवता है
ओम भीमाया नम: शिव को प्रणाम, जिनकी शक्ति अद्भुत है
ओम परशु हस्तय नम: हाथ में परसा रखने वाले भगवान को प्रणाम
ओम मृगपाणी नम:जंगल में आत्मा की देखभाल करने वाले भगवान को नमन
ओम जटाधरय नम: शिव, जो उलझे हुए बालों को धारण करते हैं
ओम कैलासवासिणे नम:ऐसे भगवान को प्रणाम करते हैं जो कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं
ओम कवचिने नम: कवच धारण करने वाले भगवान को प्रणाम
ओम कठोराय नम:शिव को प्रणाम, जो सभी विकास का कारण हैं
ओम त्रिपुरान्तकाय नम: प्रभु को प्रणाम, जिन्होंने तीन राक्षसी नगरों का नाश किया है
ओम वृष्णकाय नम: नंदी की सवारी करने वाले भगवान को प्रणाम
वृषभरुधाय नम:शिव को प्रणाम, जो बैल की सवारी करते हैं
ओम भस्मोधुलिता विग्रहाय नम: भस्म रमाने वाले प्रभु को प्रणाम
ओम सामप्रिया नम: सामवेद के मंत्रों से प्रसन्न होने वाले भगवान को प्रणाम
ओम स्वरमैया नम: स्वरों में निवास करने वाले भगवान को नमन
ओम त्रैइमुर्तये नम: ऐसे प्रभु को प्रणाम, जिनकी तीन रूपों में पूजा की जाती है
ओम अनिश्वरय नम: अविवादित भगवान को नमन
ओम सर्वज्ञाय नम: ईश्वर को प्रणाम, जो सब कुछ जानते हैं
ओम परमात्मामने नम: परम आत्मा को नमन
ओम सोमसुरग्नि लोचनाय नम: सोम, सूर्य और अग्नि जैसे प्रकाश वाले नेत्रों को प्रणाम
ओम हविषे नम: जिन्हें घी की आहुति देते हैं, ऐसे भगवान को प्रणाम
ओम यज्ञमयाय नम:सभी यज्ञ संस्कारों के शिल्पी को प्रणाम
ओम सोमाया नम: चंद्र सी चमक और रहस्य भरी दृष्टि वाले भगवान को नमन
ओम पंचवक्त्रया नम: पांच गतिविधियों के भगवान को नमन
ओम सदाशिवाय नम:सदा शुभ परोपकारी शिव
ओम विश्वेश्वरय्या नम: ब्रह्मांड के सर्वव्यापी शासक को नमन
ओम वीरभद्राय नम: वीरों में अग्रणी शिव को प्रणाम
ओम गणनाथाय नम: गणों के देवता को नमन
ओम प्रजापताये नम: सृष्टिकर्ता को नमन
ओम हिरण्यरेतसे नम: स्वयं में से शुभ आत्माओं को उत्पन्न करने वाले भगवान को नमन
ओम दुर्धशाय नम: अजेय रहने वाले भगवान को नमन
ओम गिरीशाय नम: पवित्र पर्वत कैलाश के राजा को प्रणाम
ओम गिरीशाय नम: हिमालय के भगवान को नमन
ओम अनघय नम: शिव को नमन, जो अभय रहने के लिए प्रेरित करते हैं
ओम भुजंगभूषणाय नम: सर्पों से आभूषण से सुशोभित रहने वाले प्रभु को प्रणाम
ओम भारगय नम: ऋषियों में अग्रणी प्रभु को नमन
ओम गिरिधनवणे नम: ऐसे ईश्वर को प्रणाम, जिनका अस्त्र पर्वत है
ओम गिरिप्रिया नम:भगवान को नमन जो पहाड़ों को पसंद करते हैं
ओम कृत्तिवाससे नम:चर्म पहनने वाले भगवान को प्रणाम
ओम पुररताये नम: भगवान जो जंगल में निवास करते हैं
ओम भगवते नम: समृद्धि के भगवान को नमन
ओम प्रमथाधिपय नम:प्रथम गणों के अधिपति भगवान को नमन
ओम मृत्युंजय नम: मृत्यु के विजेता को नमन
ओम सुक्ष्मतनवे नम: सूक्ष्मतम शरीर वाले भगवान को प्रणाम
ओम जगद्व्यापिने नम:शिव को नमन, जो जगत को पोषण करते हैंं
ओम जगद्गुरुवे नम:समस्त विश्व के गुरु को नमन
ओम व्योमकेशाय नम:भगवान जिनके बाल आकाश की तरह व्यापक फैले हुए हैं
ओम महासेनाजनकाय नम: महासेना की उत्पत्ति करने वाले प्रभु को नमन
ओम चारुविक्रमाय नम: भटके तीर्थयात्रियों के संरक्षक को प्रणाम
ओम रुद्राय नम:भगवान को नमन जो स्तुति के योग्य हैं
ओम भुतपताये नम:जीवित प्राणियों और भूतों के प्रेरणा को नमन
ओम स्थानवे नम: दृढ़ और अचल जगत के देवता को नमन
ओम अहिरबुधन्याय नम: कुंडलिनी को धारण करने वाले भगवान को नमन
ओम दिगंबराय नम:शिव को प्रणाम, जिनके वस्त्र ब्रह्मांड हैं
ओम अष्टमुर्तये नम:भगवान को प्रणाम, जिनके आठ रूप हैं
ओम अनेकात्माने नम: ईश्वर को नमन, जो एक आत्मा है
ओम सात्विकाय नम:असीम ऊर्जा के भगवान को नमन
ओम शुद्ध विग्रहाय नम: ईश्वर जो सभी संदेह और असंतोष से मुक्त है, उन्हें प्रणाम
ओम शाश्वताय नम: शिव को नमन, जो अनंत और शाश्वत हैं
ओम खंडपराशवे नम: मन की निराशा को दूर करने वाले भगवान
ओम अजय नम: जन्म रहित भगवान को प्रणाम, उसे प्रणाम
ओम पापविमोचकाय नम: भगवान को नमन जो सभी बंधनों से मुक्त करते हैं
ओम मृदय नम: दया दिखाने वाले प्रभु को प्रणाम
ओम पशुपतये नम: पशुओं के स्वामी को प्रणाम
ओम देवाय नम: देवी देवताओं में सबसे प्रमुख भगवान को नमन
ओम महादेवाय नम: देवों के देव महादेव को नमन
ओम अव्यय नम:जो कभी न बदले, ऐसे भगवान को प्रणाम
ओम हरये नम: शिव को प्रणाम, जो सभी बंधनों को भंग कर देते हैं
ओम पशुदंतभिदे नम: पूषा के दंते उखाडऩे वाले भगवान को प्रणाम
ओम अव्यग्रय नम: भगवान जो स्थिर और अडिग हैं
ओम दक्षध्वराहराय नम: दक्ष के अभिमानी यज्ञ का नाश करने वाले
ओम हरय नम: पापों को हरने वाले भगवान को प्रणाम
ओम भगनेत्रभिदे नम: शिव जिन्होंने भग को सबक सिखाया
ओम अव्यक्तय नम: शिव को नमन, जो सूक्ष्म हैं और अदृश्य हैं
ओम सहस्रक्षय नम: असीम रूपों के भगवान को नमन
ओम सहस्रपदे नम: हजार पदों वाले भगवान को नमन
ओम अपवर्गप्रदय नम: सब कुछ प्रदान करने वाले मोक्षदाता को प्रणाम
ओम अनंताय नम: अनंत भगवान को नमन
ओम तारकया नम: भगवान मुक्तिदाता को नमन
ओम परमेश्वराय नम: परमेश्वर भगवान को नमन

अंत में..

भगवान शिव के नामों की अपनी महिमा है। ये नाम जपने से जीवन में न केवल सफलता मिलती है बल्कि सही राह और सही दिशा भी हासिल होती है।  कहते हैं कि 108 नामों की महिमा है, जो शांति की राह पर मन को ले जाती है और सुकून मिलता है।  यह जीवन में प्रकाश फैलाते हैं और भक्ति में मन रमता है। जीवन में मौजूद सारी परेशानियां दूर होने लगती है।