प्रेरक और सक्षम महिलाएं, जिनके बारे में जानना जरूरी है?

हिंदू धर्म में महिलाओं को विशेष स्थान प्राप्त है। कहा भी जाता है कि जहां नारियों की पूजा की जाती है, वहां देवता निवास करते हैं। यही कारण है कि स्त्रियों को देवी की उपाधि भी दी जाती है। ऐसी कई महिलाएं हैं जो मजबूत और सशक्त प्रतीक हैं, जिनकी बुद्धिमत्ता अपने आप में अद्वितीय हैं। वे किसी तरह के परिचय की मोहताज नहीं है। हम आपको यहां हिंदू पौराणिक कथाओं के बारे में बताने जा रहे हैं। ऐसी कथाएं जिसमें महिलाओं ने अपनी कर्तव्यपरायणता और समर्पण से मिसाल कायम की है। यह सोचना भी बहुत मुश्किल है कि पृथ्वी पर इस तरह की सशक्त महिलाएं रही होंगी।

अगर हम संस्कृति की बात करें तो संस्कृति के विकास में हमेशा महिलाओं की अहम भूमिका होती है। ये महिलाएं न केवल हिंदू पौराणिक कथाओं का हिस्सा हैं बल्कि इन्होंने दुनिया भर में धर्म की ध्वजा बड़ी शान से फहराई है, इन्होंने एक अहम भूमिका निभाई है। अगर बात आज की करें तो आप बताइए कि एक घर चलाने वाली महिला को हम उसका कितना श्रेय प्रदान करते हैं। शायद नहीं मिल पाता, लेकिन यह कहने में हमें कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि महिलाओं का काम वास्तव में तारीफ करे काबिल है। इसका पूरा श्रेय इन महिलाओं को मिलना चाहिए, जिसके वो काबिल हैं। ये महिलाएं न केवल अपनी सुंदरता बल्कि अपने गुणों के लिए भी सदियों से पहचानी जाती रही हैं।

हम आपको हिंदू कथाओं से जुड़ी कुछ इसी तरह की प्रेरक महिलाओं के जीवन के बारे में कुछ बताने जा रहे हैं। इनके बारे में बताने के लिए हम ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते हैं। ये महिलाएं वास्तव में मां शक्ति के सही स्वरूप को परिभाषित करती हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में?


अरुंधति

अरुंधति ऋषि वशिष्ठ की पत्नी हैं। अरुंधति एक बहुत ही बुद्धिमान ब्राह्मण लड़की थी, जो सदैव वेदों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहती हैं, वेदों के बारे में गहरा ज्ञान रखती थी। कहते हैं वेदों में बहुत ही गहरा ज्ञान होता है, इन्हें जानने के लिए व्यक्ति को पूरी गहराई में उतरना होना है, यह केवल विशेष व्यक्ति ही कर पाते हैं। वे ही वेदों के आशय के समझ पाते हैं। अरुंधति कई विधाओं में पारंगत थी और कई कलाओं को जानती थीं। बुद्धि की दृष्टि से वे अपने पति से भी कम नहीं थीं। अरुंधति का अपने पति के प्रति समर्पण बहुत अधिक था। इतना अधिक की कोई भी उन्हें अलग नहीं कर सकता था। जब वे एक दूसरे से दूर होते थे, तो भगवान से एक दूसरे के कल्याण और सुरक्षा की प्रार्थना किया करते थे।

भगवान शिव उन पर बहुत प्रसन्न थे। इतने प्रसन्न की एक बार ऋषि वशिष्ठ की अनुपस्थिति में वे अरुंधति के शिष्य बनकर पूरे एक साल तक उन्हीं के आश्रम में रहे, उनके सुरक्षा का ध्यान रखते रहे। उनकी भक्ति से प्रभावित होकर भगवान शिव ने देवी अरुंधति के आकाश में अपने पति ऋषि वशिष्ठ के समकक्ष स्थान प्रदान किया। अब भी वे आकाश में एक साथ तारों के रूप में नजर आते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में अरुंधति को एक बहुत सम्मानजनक स्थान प्राप्त है। उन्हें नमन करते हैं।


सीता

हिंदू पौराणिक कथाओं में महिलाओं को प्रेरित करने वाली कहानियों की बात करें और देवी सीता का नाम न लें, ऐसा नहीं हो सकता है। यह बात सीता के नाम के बिना बिल्कुल अधूरी ही है। सीता, हिंदू धर्म से जुड़े महाकाव्य रामायण का एक प्रमुख किरदार है। यह वह महिला चरित्र है जिसके इर्द गिर्द पूरा महाकाव्य बसा हुआ था। सीता को उस समय की पृथ्वी की सबसे आकर्षक व सुंदर महिला कहा जाता है।

एक अहम बात यह भी है कि वे इतनी सुंदर थी कि उनकी सुंदरता का वर्णन शब्दों में करना संभव नहीं है। वे ना तो पैदा हुई थीं न ही बनाई गई थी। कहा जाता है कि त्रेता युग में सीता महादेवी लक्ष्मी का ही एक अवतार थी। वे लक्ष्मी का एक स्व-प्रकट रूप थी, जिसे मिथिला साम्राज्य के राजा जनक ने पृथ्वी के गर्भ में खोजा था। सीता का विवाह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम से हुआ था, जो भगवान विष्णु के अवतार थे।

सीता में अविश्वसनीय साहस था। वह हमेशा अपने स्वाभिमान के लिए खड़ी रहती थीं। अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर में देवी सीता ने अपनी गरिमा और कर्तव्य दोनों का निर्वाह किया और सदैव सही और कठोर निर्णय लिए। उन्होंने हमेशा भगवान श्री राम की मर्यादा का मान बनाए रखा। वह अंत में अपने जीवन का अंत करते हुए वापस धरती माता में समां गई।


मंदोदरी

महाकाव्य रामायण में एक प्रेरक महिला और भी है जो हिंदू पौराणिक कथाओं की सर्वश्रेष्ठ महिलाओं में से एक है। हम बात कर रहे हैं राक्षस राजा रावण की रानी मंदोदरी की। वह एक अद्भुत पत्नी थी, क्योंकि वह अपने पति से प्यार करती थी और उसके बुरे कामों के बावजूद उसका सम्मान करती थी। हम उनके बारे में जानते हैं और पता करते हैं कि आखिर क्यों वे बुरे कर्मों के बावजूद अपने पति को प्रति समर्पित थी। कहा जाता है कि वह बेहद तेजस्वी और उदार थीं।

सही बात तो यह है कि किसी आदमी से प्यार करना आसान काम है, लेकिन किसी बुरे व्यक्ति से, पापी व्यक्ति से प्रेम करना यह आसान नहीं है। मंदोदरी रावण के बुरे कामों को जानती थी और उसे रोकने के लिए उसे समझाने की भी कोशिश की थी। लेकिन पूरे जगत को ज्ञात है कि रावण कितना जिद्दी था। उसने जीवन भर अपनी पत्नी का ध्यान रखा, उससे जुड़ी सारी जिम्मेदारियां पूरी की और अपने कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ा, शायद यही वजह है कि मंदोदरी को समर्पण रावण के बुरे कर्मों के बावजूद इतना अधिक था।


द्रौपदी

यदि आपने कभी महाभारत की कहानी सुनी है, तो आप जानते हैं कि एक महिला के कारण एक महाकाव्य युद्ध हुआ था। उस महिला का नाम था द्रौपदी। पांचों पांडवों की पत्नी द्रौपदी को पांचाली भी कहा गया था। द्रौपदी को उनकी पवित्रता और नारीवाद के लिए परिभाषित किया जाता है।

एक चौंकाने वाली बात यह है कि उनका जन्म राजा द्रुपद के दरबार में एक यज्ञ से हुआ था। द्रौपदी निस्संदेह उस युग की सबसे खूबसूरत महिला थीं। वह कई नैतिक गुणों की स्वामिनी थी। भारतीय शास्त्रों के अनुसार द्रौपदी इतिहास में भारतीय प्रेरणादायक महिलाओं की पहली नारीवादी हैं।


सावित्री

सावित्री और सत्यवान की कथा संभवतया सभी ने सुन रखी होगी। अगर आपने नहीं सुनी है तो आपको अपने बड़ों से पूछनी चाहिए। चलिए हम आपको बताते हैं देवी सावित्री के बारे में। सावित्री ने अपने पति का जीवन मृत्यु के देव यम से वापस ले लिया था। सावित्री का जन्म उनके माता-पिता के लिए मानो भगवान का आशीर्वाद ही था। सावित्री में बचपन से ही एक सुंदर आकर्षण और ज्ञान था। ऋषि नारद ने भविष्यवाणी की थी कि सत्यवान के पति की मृत्यु शादी के एक वर्ष में हो जाएगी। यह जानने के बाद सावित्री हमेशा रक्षा के लिए अपने पति के साथ रहती थी।

लेकिन एक दिन सत्यवान बहुत बीमार हो गए, यम उनकी आत्मा को अपने साथ ले गए। अर्थात् उनकी मृत्यु हो गई। सावित्री ने अपने पति की आत्मा को लेकर यम को जाते हुए देखा। वह उनका पीछा करने लगी और यम लोग तक पहुंच गई। यम उसकी निष्ठा और दृढ़ संकल्प से चकित थे। यम ने सावित्री को अपने पति के आत्मा के अलावा बहुत कुछ देने की बात कही, लेकिन सावित्री नहीं मानी, वह टस से मस नहीं हुई । यमदेव ने उसकी निष्ठा से प्रसन्न होकर उसे एक वर मांगने के लिए कहा, सावित्री ने वरदान स्वरूप अपने पति सत्यवान के जीवन को यम देव से मांग लिया। आखिर में यम को सावित्री के पति का जीवन लौटना पड़ा। वे इनकार नहीं कर सके।


अंत में...

हिंदू धर्म में ये पांच महिलाएं अपने गुणों के लिए जानी जाती हैं। ये महिलाएं शक्ति, ज्ञान और करुणा का उल्लेखनीय उदाहरण हैं। उन्होंने खुद पर भरोसा किया और उन्होंने दुनिया को उन पर विश्वास भी दिलाया। इसलिए कहते हैं कि अगर हम किसी चीज को पाने की ठान लें तो कुछ भी हासिल कर सकते हैं।