हिंदू पौराणिक कथाओं के बारे में आश्चर्यजनक तथ्य

आप वह हैं जिस पर आप विश्वास करते हैं। आप वह बन जाते हैं, जो आप मानते हैं, कि आप बन सकते हैं।” – भगवद गीता

हिंदू धर्म सबसे पुराना है, जिसकी जड़ें आज से लगभग 5000 से 10,000 ईसा पूर्व तक खोजी जा सकती हैं। आज हम यहाँ सिर्फ धर्म से जुड़ें हुए केवल तथ्यों के बारे में ही जानकारी देंगे। आज आप यहाँ ‘हिंदू पौराणिक कथाओं’ के ज्ञान और तथ्यों को लेकर रोचक और अनोखी चीजे पढ़ेगे। इसके साथ ही हम आपको एक टास्क भी देना चाहते हैं, इन तथ्यों को पढ़कर आपको यह जानना होगा, की पहले से आप इनके बारें में कितना जानते है।

भारतीय पौराणिक कथाएं हमेशा लोगों के बीच जिज्ञासा का विषय रही हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के तथ्यों के बारे में सबसे अच्छी बात यह है, कि ब्रह्मांड और इसकी प्रकृति के रहस्यमय विचारों को हमारे वेदों और शास्त्रों में असाधारण रूप से चित्रित किया गया है। इसकी कई बातें हमारे आधुनिक विज्ञान से भी मिलती जुलती है। तो फिर देर किस बात की। तो तैयार हो जाइए ‘हिंदू पौराणिक कथाओं के बारे में अज्ञात तथ्यों की ज्ञानवर्धक सवारी के लिए।


कैसे हुआ ब्रह्मांड का निर्माण

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ। इस बात को लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित है। लेकिन उनमें से जो सबसे ज्यादा व्यापक रूप से स्वीकृत की गई है। उसके अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति ॐ से हुई है। ऐसा माना जाता है जब ॐ की उत्पत्ति हुई। उससे पहले इस संसार में सिर्फ अँधेरा सागर था। कहीं भी जीवन का कोई नामो निशान नहीं था। हिंदू पौराणिक कथाओं और अन्य शास्त्रों, वेदों में कहा गया है, कि ब्रह्मा जी ने दो अन्य देवताओं के साथ ब्रह्मांड का गठन किया था। जिनके नाम थे भगवान शिव और भगवान विष्णु। जैसा कि हम सभी जानते हैं, ये तीनों हिंदू धर्म में प्रमुख देवता हैं।


क्या है आधुनिक विज्ञान और वेदों के बीच संबंध

हिंदू धर्म के पवित्र वेद दुनिया के सबसे पुराने लिखित ग्रंथों में से एक है। जिनके बारे में हमारा आधुनिक विज्ञान यह जानकर हैरान है, कि लगभग 1500 बीसी पुराने वेदों में ब्रह्मांड के बारे में इतना कैसे लिखा गया। जिसे वैज्ञानिक अभी भी खोज रहे हैं। ऐसे कई तथ्य है, जिन्हें आज का विज्ञान खोज रहा है। वो बातें हमारे वेदों में पहले से ही लिखी जा चुकी है। यही कारण है कि हिंदू पौराणिक कथाएँ और ज्योतिष दुनिया भर में सुपर लोकप्रिय हैं।


क्या पृथ्वी अंतिम गंतव्य है

व्यापक रूप से मान्यता यह है, कि पृथ्वी आत्मा को निर्वाण प्राप्त करने का अंतिम मार्ग है। आत्मा को हर कोई अमर मानता है। कहाँ जाता है की आत्मा अपने कर्मों के आधार पर शरीर को धारण करती है। अपने कर्मों के आधार आत्मा किसी शरीर में प्रवेश करती है। आत्मा अपने अस्तित्व के पथ पर विभिन्न संसारों और आयामों से गुजरती है। आत्मा को मोक्ष प्रदान करने के लिए शरीर को कठिन तपस्या से गुजारना पड़ता है। मोक्ष प्राप्त करने के लिए शरीर और आत्मा दोनों पर्याप्त रूप से स्वच्छ होना जरूरी होता है। हमारे वेदों में वर्णित है, की कर्म चक्र के आधार पर, इंसान की आत्मा को परम मोक्ष मिल सकता है। इस बात को आप इस तरह समझ सकते हैं, भगवान के पास हमारे सभी कर्मों का बहीखाता होता है। आपके कर्मों के आधार पर वो यह निर्णय लेते है, कि व्यक्ति को अपने जीवन चक्र में दोबारा वापिस भेजना है या आत्मा को मोक्ष प्रदान करना है।


क्यों हैं हिंदू धर्म में अधिक महाकाव्य

दुनिया में किसी भी अन्य धर्म की तुलना में भारत में सबसे ज्यादा महाकाव्य हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है, भारत में देवताओं की सूची अपने आप में अंतहीन है। हर जगह के हिसाब से अलग-अलग देवताओं की पूजा व्यक्ति करता है। उनको लेकर स्थान के अनुसार कई कहानियां और दंतकथाएं प्रचलित होती है। यहीं कहानिया प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को सर्वोत्तम तरीके से जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन करती हैं। वैसे हिन्दू धर्म में, रामायण, भगवद गीता और महाभारत को सबसे पवित्र और लोकप्रिय माना जाता है। भारतीय पौराणिक कथाओं के बारे में सबसे अच्छी बात यह है, कि जितना अधिक आप गहराई में जाएंगे, आपको इसके शुद्ध ज्ञान और समृद्धि का एहसास होगा।


कई ग्रहों से संबंधित जीवों के बारे में भी बताता है हमारा धर्म

ऊपर पढकर आपको लग रहा होगा की हम किसी एलियन के बारे में बात कर रहे है, पर ऐसा नहीं है। हम हिंदू पौराणिक कथाओं के बारे में बात कर रहे हैं, जिनमें पहले से बताया गया है, की इस दुनिया में गंधर्व, किन्नर, नागा और अप्सरा जैसे अन्य प्रकार के कई प्राणी मौजूद है। यह हमारे जैसे सामान्य मनुष्य नहीं हैं, बल्कि अन्य ब्रह्मांडों में रहते हैं। इन सब को पढ़कर आपको आश्चर्य हो रहा होगा। पर यह हकीकत है। जिनको आज के समय में हम एलियन कह रहे हैं, वो हमारे वेदों में पहले से लिखा जा चूका है बस उस समय हमारे ज्ञानियों ने उनको नाम अलग दे दिया है।


देवताओं और राक्षसों के बीच मुख्य 12 युद्ध

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार तीन लोक है। जिन्हें हम त्रिलोक कहते हैं। स्वर्ग, धरती और पाताल के बारे में कहा जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच जितने भी युद्ध हुए, वो सब इन्हीं लोकों पर हुए। ऐसा माना जाता है की राक्षसों और देवताओं के बीच मुख्य रूप से बारह युद्ध लड़े गए थे। उनमें से हिरण्यकश्यप, नरसिंह, वराह, वामन, कोलाहल, आदिबाका और अंधक-वध नामक युद्ध हुए। अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा की आखिर इतने युद्ध हुए तो जीत किसकी हुई। बेशक, उन सभी में, देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की।


असुरों को मारने वाले दिव्य हथियार

दिलचस्प बात यह है कि अतीत में लड़ाई के लिए कई तरह के अस्त्रों का प्रयोग किया गया। यदि हिन्दू धर्म के बारें में आपको थोड़ी सी भी जानकारी है, तो आपको समझ आएगा हर देवी-देवता के पास उनका एक ख़ास अस्त्र होता है। यह उनकी ख़ास शक्ति कहलाती है। जब भी कोई युद्ध होता था। तो देवी देवता उन्हीं अस्त्रों का इस्तेमाल करते थे। जैसे; ब्रह्मास्त्र, त्रिशूल, शिव धनुष, गरुड़ अस्त्र और वरुणास्त्र, चक्र। इसके अलावा भी कई ऐसे अस्त्र हुए है, जिनके द्वारा देवी और देवतायों ने असुरों का वध किया था।


भगवान शिव - विनाश के देवता

त्रिदेवों में भगवान शिव को संहार का देवता माना गया है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव की तुलना में और किसी के पास सृष्टि के अंतिम विनाश की इतनी क्षमता नहीं है। जितनी उनके पास है। भगवान शिव को इसलिए ही देवों के देव महादेव कहा जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में शिव को सभी देवताओं की तुलना में विनम्र और सरल भी माना जाता है। कहा जाता है की शिवजी का क्रोध बहुत भयानक होता है। उनकी तीसरी आँख में समस्त सृष्टि के विनाश की ताकत समाई हुई है।

यदि आपके आराध्य शिव जी है, और उनके बारे में आप पढ़कर डर गये, हो तो घबराने की जरूरत नहीं है। शिवजी आज भी वही सरल और योगी है। उनका तीसरा नेत्र तभी खुलता है, जब हमारी सृष्टि परिवर्तन मांगती है। आज भी भगवान शिव को महायोगी के रूप में भी जाना जाता है, और भारत के हर हिस्से में उनकी पूजा की जाती है।


33 करोड़ देवी-देवता

हिंदू देवताओं के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है की हमारी पौराणिक कथाओं में देवी- देवतायों की संख्या 33 करोड़ बताई गई है। यह आकड़ा आपको अवास्तविक लग सकती है, लेकिन यह एक वास्तविकता है, और हम इससे इनकार नहीं कर सकते। वेदों के अनुसार केवल 33 प्रमुख देवता हैं, बाकी जो संख्या है, उसके बारे में माना जाता है की यह केवल उनके अवतार हैं। अधिकांश हिंदू परिवार अपने घरों में प्रतिदिन मुख्य देवताओं की पूजा करते हैं।


निष्कर्ष

हमारे पास बस एक ही जीवन है, जिसमें हमें अपनी धर्म, परंपराओं और संस्कृतियों के बारे में जान लेना चाहिए। यदि हम अपने हर दिन को दिवाली के रूप में मनाएं और होली की तरह खुशियों के रंग बिखेरें। तो हमारा जीवन बहुत ही खुशहाल हो सकता है। ‘हिंदू पौराणिक कथाओं के बारे में रोचक तथ्य’ और कहानियां इतनी सारी है कि यदि आप इनके बारें में पढ़ना शुरू करेगे तो यह उम्र कम पड़ जायेगी। यदि आप इनको समझना शुरू करते हैं तो आपके लिए कई जन्म कम पड़ जायेगे।