भारत के ऋषि मुनि, जिनके बारे में आपको जानना चाहिए?

पूरी दुनिया में सत्य ही एक शाश्वत प्रेरक शक्ति है। ऐसा माना जाता है कि मानवता अब तक सत्य की ताकत की वजह से ही जीवित है। भारत के महान संतों ने इस देश में मानवता के सर्वोच्च आदर्शों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत के इन प्रख्यात संतों ने देश में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में भी विशेष योगदान दिया है।

साधु-संतों ने हमेशा यह कोशिश की है कि लोगों को बेहतर और आनंदमय जीवन जीना नसीब हो। सत्य के वास्तविक मूल्य को उन्होंने हमेशा महसूस किया है और सांसारिक कष्टों से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए हमेशा ही उनका उचित मार्गदर्शन भी किया है। लंबे अरसे से सकारात्मकता के साथ मानव कल्याण की भावना से यह देश भरा हुआ है। भारत के सभी प्राचीन साधु-संतों का यही कहना है कि अध्यात्मवाद और प्रसन्नता ही मानव कल्याण के प्राथमिक स्रोत हैं। तो आइए इन 6 महान भारतीय संतों के बारे में अधिक गहराई से जानते हैं।


ऋषि विश्वामित्र

भारतीय संतों की सूची में विश्वामित्र को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक गायत्री मंत्र के निर्माता विश्वामित्र ही हैं। विश्वामित्र के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि एक क्षत्रिय परिवार में उन्होंने जन्म लिया था। हालांकि खुद को उन्होंने एक ब्रह्मऋषि के रूप में परिवर्तित कर लिया और सर्वोच्च स्वयं का उन्होंने एहसास किया।

ब्रह्मऋषि की उपाधि हासिल करने से पूर्व अपनी जिंदगी में विश्वामित्र को बहुत सी बाधाओं का सामना करना पड़ा था। आध्यात्मिक उपलब्धियां प्राप्त करने के लिए विश्वामित्र ने ध्यान और कठोर तपस्या की थी। रामायण एवं महाभारत जैसे भव्य महाकाव्यों से विश्वामित्र की जिंदगी जुड़ी हुई है। महाभारत के आदि पर्व में मेनका नामक अप्सरा के साथ भी विश्वामित्र के रिश्ते की कहानी का चित्रण है। निश्चित रूप से वे भारत के महान संतों में से एक हैं।

भारत के इस महान संत की कुछ उपलब्धियों के बारे में बात करें तो इसमें ऋग्वेद के तीन मंडलों के साथ गायत्री मंत्र शामिल है। विश्वामित्र भी भारत के उन 24 प्राचीन संतों में से एक हैं, जो गायत्री मंत्र के संपूर्ण अर्थ को समझने का सामर्थ्य रखते हैं।


ऋषि वशिष्ठ

महान ऋषि वशिष्ठ भगवान राम के गुरु थे। वे भारत के एक मशहूर संत हैं, जो इतिहास में प्रमुख स्थान रहते हैं। इसके अलावा पूरे सूर्यवंश के भी वशिष्ठ गुरु हैं। साथ ही भारत के 7 महान संतों के तारों के समूह सप्तऋषि का भी वे हिस्सा हैं। आदि शंकराचार्य द्वारा वशिष्ठ को हिंदू दर्शन के वेदांत स्कूल का पहला संत भी माना गया है।

ऋग्वेद के सातवें मंडल के लेखक के रूप में भी ऋषि वशिष्ठ जाने जाते हैं। योग वशिष्ठ और वशिष्ठ संहिता में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। ऋषि वशिष्ठ ने जो स्वयं भगवान राम को शिक्षा दी थी, इन्हीं शिक्षाओं का योग वशिष्ठ समूह है।
ऋषि वशिष्ठ के जीवन से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसा कहा जाता है कि दिव्य गाय कामधेनु और उनकी संतान नंदिनी ऋषि वशिष्ठ के ही पास थीं। विश्वामित्र और वशिष्ठ के बीच जो संघर्ष हुआ था, उसके बारे में भी कई कहानियां प्रचलित हैं।


ऋषि अगस्त्य

भारत के महान ऋषि अगस्त्य को भगवान शिव के अवतार के रूप में भी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि समुद्र की गहराई में जो दानव छिपे हुए थे, उन्हें निकालने के लिए उन्होंने पूरे समुद्र का पानी पी लिया था। ऋषि अगस्त्य के बारे में एक दिलचस्प मान्यता यह भी है कि बिना माता-पिता के ही वे अस्तित्व में आ गए थे। उनका जन्म मशहूर भारतीय संतो में से एक ऋषि वशिष्ठ के साथ मिट्टी के घड़े में हुआ था।

शैववाद यह मानता है कि वशिष्ठ पहले तमिल सिद्धक थे। साथ ही ऋषि अगस्त्य के बारे में रामायण में कई कहानियां पढ़ने को मिलती हैं। तमिल व्याकरण का उन्हें संस्थापक माना जाता है, जो कि अगस्त्यम (अगत्तीयम) के नाम से जाना जाता है। ऋषि अगस्त्य के नाम कई भजन, अगस्त्य संहिता और अगस्तीमाता जैसे कई महान कार्य है। रत्न और हीरे के बारे में अगस्तीमाता में बताया गया है। साथ ही अन्य आभूषण बनाने के बारे में भी इसमें जानकारी दी गई है।


ऋषि कश्यप

भारतीय इतिहास के महान संतों में ऋषि कश्यप को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वे भी सप्तर्षियों में से एक हैं। अथर्ववेद के मुताबिक कश्यप एक महान विद्वान हैं। महान भारतीय संत कश्यप को देवों, असुरों और नागों के साथ संपूर्ण मानव जाति का भी पिता माना गया है।

ऋषि कश्यप की दो पत्नियां थीं, जिनके नाम अदिति और दिति हैं। अग्नि और आदित्य अदिति की संतान हैं, जबकि दैत्य (दानव) दिति की संतान हैं। भारतीय चिकित्सा विज्ञान पर ऋषि कश्यप ने कई गहन रचनाएं की हैं। उनका उल्लेखनीय काम कश्यप संहिता आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जिसमें खास तौर पर बाल, रोग स्त्री रोग और प्रसूति के बारे में बताया गया है।


ऋषि वेदव्यास

वेद व्यास, जो कि महर्षि वेदव्यास के नाम से भी जाने जाते हैं, वे सात चिरंजीवी में से एक हैं। प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत, जिसमें कौरवों और पांडवों के बीच के महान युद्ध की कहानी लिखी गई है, इसकी रचना इन्होंने ही की थी। ऐसा माना जाता है कि महर्षि वेद व्यास ने सनक और सनानंद जैसे प्रख्यात भारतीय संतों के मार्गदर्शन में अपना अध्ययन पूरा किया था। भारत के महान संत ऋषि वशिष्ठ के परिवार में उनका जन्म हुआ था। साथ ही त्रिदेवों में से एक भगवान विष्णु के समान ही इन्हें सम्मानित माना जाता है।

महर्षि वेद व्यास ने ब्रह्मसूत्र और 18 पुराणों की रचना की थी। भागवत उनकी सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि देवऋषि नारद ने महर्षि वेद व्यास को अपनी जिंदगी के अंतिम लक्ष्य के रूप में भागवत को लिखने के लिए प्रोत्साहित किया था। उनकी प्रख्यात कृति महाभारत के बारे में भी एक रोचक तथ्य प्रचलित है। दरअसल महाभारत की रचना तो वेद व्यास ने की थी, मगर इसे लिखा था भगवान गणेश ने। वे भारत के महान संतों की सूची में चमक रहे हैं।


ऋषि भृगु

भारत के सबसे करिश्माई संतो में से एक के रूप में ऋषि भृगु की गिनती होती है। इनके बारे में ऐसा माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र के रूप में इनका जन्म हुआ था। ब्रह्मांड का प्रजापति यानी कि निर्माता भी इन्हें माना गया है। वह इसलिए कि इन्होंने अपने पिता भगवान ब्रह्मा की सृष्टि के निर्माण के दौरान मदद की थी। ऋषि भृगु ने भगवान विष्णु की छाती पर अपने पैर रखने का प्रयास किया था, जिसकी वजह से भगवान विष्णु की छाती पर एक निशान पड़ गया। इस चिह्न को अद श्रीवत्स के नाम से जानते हैं।

ज्योतिष पर अपने मशहूर काम की वजह से ये भारत के महान संतों में गिने जाते हैं। उनका यह काम भृगु संहिता के नाम से जाना जाता है। दुनिया के संपूर्ण जीवन-भविष्यवाणियां भृगु संहिता में शामिल हैं। ऋषि भृगु को भृगु संहिता के संकलन के लिए मानव जाति की संपूर्ण जन्मकुंडली जमा करनी थी। इसे ज्योतिष पर पहली किताब भी माना जाता है।

भारत के संत की बात आती है तो लोगों को अक्सर हैरानी होती है कि भारत में इतने सारे संत हैं। ईसाई धर्म में सेंट गोंसालो गार्सिया को भारत की पहला संत माना गया है। वे भारत की पहली महिला संत भी हैं। भारत के इन महान ऋषियों और संतों ने हमेशा सत्य, आध्यात्मिकता और भक्ति के मार्ग को ही अपना कर इन पर अपने कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने मानव कल्याण को हमेशा अपने मन में रखा और अपने नाम पर एक नया युग भी इन्होंने स्थापित किया। वास्तव में भारत संतों और ऋषियों की भूमि है, जिन्होंने यात्रा थोड़ी की और मानवता की सच्ची विशेषता प्रदर्शित की।