दक्षिण मुखी (South Facing) घर के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स


दक्षिण मुखी घर: एक परिचय

ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति के जीवन पर प्रत्येक दिशा का सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह दोनों तरह के परिणाम देने वाला हो सकता है। यह सबसे अच्छे परिणाम भी दे सकते हैं तो वहीं यह बिल्कुल विपरित परिणाम देने वाले भी साबित हो सकते हैं। वैसे आम तौर पर यही माना जाता है कि पूर्व पश्चिम, उत्तर दक्षिण, इन चारों दिशाओं में से दक्षिण दिशा में देखता हुआ घर होना सही नहीं रहता है। आमतौर पर यह अस्वीकार्य माना जाता है। अब हम एक बार यह सोचते हैं कि ऐसा कोई विषय आता है कि जहां दक्षिण मुखी मकान या घर लेने के अलावा कोई चारा नहीं है, ऐसी स्थिति में हमें क्या करना चाहिए.

यदि ऐसा होता है, और आपके पास कोई विकल्प नहीं बचा है, तो दक्षिण दिशा में स्थित घर के लिए वास्तु के नियमों का पालन करें। ऐसा नहीं करने पर जीवन में नकारात्मकता आ सकती है, यह जीवन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। इस तरह हमें जीवन में आ रहे इस असर को लेकर चिंतन करना होगा, इसके कारणों की तह तक जाना होगा, तब जाकर आप किसी समाधान तक या निष्कर्ष तक पहुंच सकते हैं। इस लेख में हम दक्षिणमुखी घरों के हानिकारक प्रभावों और दक्षिण-पश्चिम प्रवेश द्वार वाले घरों में रहने वाले लोगों को उससे जुड़े समाधान के बारे में बताने जा रहे हैं।


दक्षिण मुखी घर के लिए वास्तु

घर में सुख शांति के लिए वास्तु शास्त्र के नियमों की पालना करना बेहद जरूरी है। इन नियमों के मुताबिक बनने वाले घरों में शांति और सद्भाव दोनों सहजता से बनी रहती हैं। नियमों की पालना सकारात्मक ऊर्जा के लिए न केवल सही जगह बनाती है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को भी सुचारू करती है। इसके साथ ही यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में जाने से रोकने में भी मदद करती है। यदि आपका घर दक्षिण दिशा की ओर से देखता हुआ है, तो आपको दक्षिण मुखी घर के लिए वास्तु के उपायों की मदद लेनी पड़ सकती है।

वास्तु शास्त्र में बताई गई विधियों के अनुसार दक्षिण पश्चिम दिशा मुख्य दिशाओं में से एक है। इस दिशा का स्वामी ग्रह राहु है। राहु कर्म, लेखा, कल्याण और दृढ़ता को प्रदान करने वाला है। ऐसे में दक्षिण पश्चिम दिशा में घर होने से पैदा होने वाला वास्तु दोष जीवन के इन सभी क्षेत्रों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। यह असुविधा व अराजकता भी उत्पन्न कर सकता है।

अब, आप सोच रहे होंगे कि घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में कौन से वास्तु दोष या वास्तु से जुड़े व्यवधान बन सकते हैं। इस लेख में हम आपको उनकी जानकारी प्रदान करेंगे।

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यदि आपका घर का प्रवेश दक्षिण पश्चिम में है तो क्या होगा?

दक्षिण दिशा में देखते हुए घरों के लिए वास्तु के नियमों का उल्लंघन करना और भी चुनौतियां पैदा करने वाला साबित हो सकता है। इसके प्रतिकूल परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखता है, जिससे जीवन के विभिन्न पहलू प्रभावित होते हैं। यह घर में मौजूद अच्छी ऊर्जा को भी खत्म कर देता है और फिर विपरीत परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती हैं और यह विकास में बाधा डालती हैं। रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करती है।

सबसे पहले हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दक्षिण दिशा में अगर कोई घर बन रहा है तो उसमें वास्तु के नियमों की पालना है, इसका निर्माण वास्तु शास्त्री की देखरेख में हो। ऐसा नहीं होने पर गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा के घर के लिए दक्षिण या पश्चिम में जगह कम होनी चाहिए। इस दिशा में निर्माण कम से कम होना चाहिए। घर में उत्तर या पूर्व में सभी प्रमुख निर्माण करवाए जाने चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बनाया जा सकता है और उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

  • घर दक्षिण दिशा की ओर तिरछा नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर निराशा व्यक्ति को पूरी तरह घेर लेती है और जीवन को प्रतिकूल तरीके से प्रभावित करती है।
  • सेप्टिक टैंक, भूमिगत पानी की टंकियां, नाले या झील भी दक्षिण दिशा में नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने पर घर को यह पूरी तरह खाली कर देते हैं।
  • दक्षिण और पश्चिम में परिसर को बांटने वाले ऊंचे डिवाइडर होने चाहिए। यह निराशा की भावना को घर के अंदर प्रवेश करने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा उत्तर पूर्व दिशा में इस तरह के डिवाइडर कम होने चाहिए, यह सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
  • घर में बड़ी खिड़कियां और दरवाजे उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होने चाहिए। इससे घर में हवा और ऊर्जा के आने का रास्ता साफ और स्पष्ट होना चाहिए।
  • कोशिश करें कि घर में कोई कोना कटे नहीं। कहीं भी कोई कोना कटता है तो यह रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाई पैदा कर सकता है। यह बीमारी और जरूरतों को बढ़ाता है।
  • 32 पदों में से घर का मुख्य मार्ग गृहस्कट नामक पाद में होना चाहिए। वास्तु में इसे मुख्य तौर पर इसे दक्षिण दिशा मुखी घर के लिए सुझाया गया है।
  • दक्षिण मुखी घरों के लिए वास्तु में एक और समाधान बताया गया है। इसके तहत घर में दो प्रवेश मार्ग या प्रवेश द्वार होने चाहिए। एक प्रवेश करने के लिए दूसरा निकास के लिए।
  • किचन दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। इसे एक महत्वपूर्ण वास्तु दोष माना जाता है और अगर इसे अनुकूल तरीके से नहीं रखा गया तो उसमें तुरंत सुधार करवाया जाना चाहिए।
  • दक्षिण दिशा में टी-चौराहा या विधि शूल नहीं होना चाहिए। अन्यथा यह जीवन को अव्यवस्थित कर देता है।

दक्षिण-पश्चिम वास्तु दोष क्या हैं?

आप अपने घर के दक्षिण पश्चिम की ओर एक कमरा रख सकते हैं, जिसका इस्तेमाल पूरे परिवार वाले करें। ऐसा करने पर आपके घर में प्रवेश करने वाले सहजता महसूस करेंगे और लंबे समय तक वहां बने रहेंगे।

ठीक इसके विपरीत अगर आप नहीं चाहते हैं कि आपके घर में लोगों की आवाजाही ज्यादा न हो, बिल्कुल सीमित रहे तो घर के इस कोने में आपको ऐसा कोई पारिवारिक कमरा नहीं बनाना चाहिए।

आमतौर पर सभी जानते हैं कि वास्तु के मुताबिक दक्षिण पश्चिम दिशा में घर के भाग को अच्छा नहीं माना जाता है, उसे त्याज्य माना जाता है। इस नियम का पालन नहीं करने से घर और परिवार में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में विभिन्न मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है, जो इस दिशा में रहने वाले लोगों के लिए जानना जरूरी है।

नीचे दक्षिण-पश्चिम दोषों की सूची दी गई है:

  • दक्षिण पश्चिम में शौचालय
  • दक्षिण पश्चिम में रसोई
  • दक्षिण पश्चिम में खिड़कियां
  • पश्चिम में खुलापन हो और बड़ी खिड़कियां
  • दक्षिण पश्चिम में गृह मार्ग या प्राथमिक प्रवेश मार्ग
  • दक्षिण पश्चिम में बोरवेल या भूमिगत पानी की टंकी
  • दक्षिण पश्चिम में लिविंग रूम

इन दोषों से जुड़े समाधान

जिस तरह बिना चाबी के कोई ताला नहीं खुलता है उसी तरह बिना वास्तु उपचार के वास्तु दोष का समाधान नहीं हो सकता है। हम आपको बताने जा रहे हैं दक्षिण-पश्चिम प्रवेश द्वार से जुड़े वास्तु उपचार।

  • दक्षिण दिशा के प्रवेश द्वार पर भौम यंत्र के साथ बाहुबली हनुमान यंत्र या दक्षिण मुखी यंत्र लगाएं।
  • सेप्टिक टैंकों के कारण पैदा होने वाले वास्तु दोष को टैंक के चारों ओर वास्तु पिरामिड स्ट्रिप्स लगाकर दूर किया जा सकता है। जब रसोई बंद हो जाती है, तो संक्रमण से बचने के लिए लाल जैस्पर पिरामिड और वास्तु मूव बोल्ट लगाना सही रहता है।
  • दक्षिण की ओर तिरछा होने और दक्षिण क्षेत्र का कोना कटे होने के कारण पैदा होने वाले वास्तु दोष को ठीक करने के लिए लाल धातु के हेलिक्स को घुमावदार वर्गों के साथ लगाया जा सकता है।
  • यदि घर का विस्तार दक्षिण दिशा में होता है तो छतों के नीचे वास्तु को सही करने के लिए तांबे की पट्टी लगा कर उसके दुष्परिणामों को दूर किया जा सकता है।
  • वास्तु के अनुसार मुख्य कक्ष में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए पृथ्वी रत्न लगाया जा सकता है। यह दाम्पत्य सुख में वृद्धि करेगा।
  • पहले बताए गए सभी वास्तु उपचारों के अलावा और भी कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें अपनाकर वास्तु दोष को कम किया जा सकता है। इनमें वास्तु लीड एनर्जी हेलिक्स, वास्तु कॉपर एनर्जी हेलिक्स, पीतल, कॉपर, लेड, जिंक, वास्तु एनर्जी क्रिस्टल से बने वास्तु पिरामिड आदि शामिल हैं।

इन सभी वास्तु उपायों की पालना करना आसान है लेकिन, हम इस बात पर जोर देते हैं कि इन उपायों को अपनाने से पहले किसी वास्तु विशेषज्ञ से मार्गदर्शन हासिल करना जरूरी है।

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दक्षिण पश्चिम वास्तु दोष की प्रमुख कमियां

धन की हानि: जो लोग साझेदारी व्यवसाय से जुड़े होते हैं उन्हें अचानक धन हानि होती है। व्यापार में उनकी लागत अचानक बढ़ जाती है, नकदी के प्रवाह में भी व्यवधान उत्पन्न हो जाते हैं। आप शक्तिहीन महसूस करने लगते हैं।

स्वास्थ्य समस्याएं और अप्रत्याशित दुर्घटनाएं: इसके परिणाम स्वरूप छोटी बड़ी दुर्घटनाएं होने का डर बना रहता है। पैरों में चोट लग सकती है। ये दुर्घटनाएं अचानक होती हैं। इसमें आपकी लगी चोट आपको स्थिर कर सकती है, चलने फिरने में परेशानी पैदा कर सकती है। गुर्दे से संबंधित समस्याएं देखी जा सकती हैं।

सामाजिक प्रतिष्ठा: पति-पत्नी के बीच छोटे-छोटे झगड़ों, शंकाओं और वैमनस्य देखने को मिल सकता है। ऐसे में एक जोड़े के बीच संबंध कठोर हो जाते हैं। जीवनसाथी का दूसरों से झगड़ा हो सकता है। संतान अनैतिक कार्यों में लिप्त हो सकती है। यह सब समाज में परिवार की सामाजिक स्थिति को निंदा का शिकार बनाता है।

दक्षिण-पश्चिम वास्तु दोष और इन वास्तु दोष के प्रभावों को देखने के बाद अब समय आ गया है कि आप इन दोषों के बुरे प्रभाव को कम करने के उद्देश्य व इन कमियों के समाधान को समझें। समझने के साथ ही उन्हें लागू भी करेंं।

यहां, ध्यान देने वाली बात यह है कि वास्तु के उपाय वास्तु दोष के प्रभाव को कम कर सकते हैं यह इन दोषों को पूरी तरह दूर नहीं करते हैं ।


समापन

दक्षिण दिशा भी सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के वाइब्स देती है। दक्षिण दिशा वाले घरों के लिए वास्तु का पालन करके आप सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावी और मजबूत कर सकते हैं और नकारात्मक ऊर्जाओं को कमजोर कर सकते हैं। यह परिवार को एक छत के नीचे शांति से रहने के हालात प्रदान करता है। यदि आप इन उपायों का सफलतापूर्वक अपनाते हैं, तो आपके घर की दिशा का प्रभाव पड़ता तो है लेकिन वह पूरी तरह हावी नहीं होती है।

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