बेसमेंट वास्तु में जाने बेसमेंट से संबंधित जानकारी


सारांश

वास्तुशास्त्र के हिसाब के घर के नीचे बेसमेंट बनाया जाना अच्छा शगुन नहीं है। इसे बनाने से बचना चाहिए, इसके सकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देख सकते हैं। इसकी वजह से आपको परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन, कई बार ऐसी स्थिति भी निर्मित हो जाती है, कि बेसमेंट बनाना आवश्यक हो जाता है। ऐसी स्थिति में वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लें, साथ ही वास्तु के हिसाब से ही बेसमेंट का निर्माण करवाएं।

बेसमेंट का ज्यादातर भंडारण, पार्किंग या फिर कोई उपकरण रखने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा भी कई बार लोग बेसमेंट में परिवार के साथ इनडोर गेम खेलते हैं, यहां तक कि प्रोजेक्टर की मदद से आप यहां पर फिल्म देख सकते हैं, जिससे एकदम बड़े पर्दे पर फिल्म देखने जैसी फीलिंग आती है। बेसमेंट को सोने या रहने के लिए उपयोग नहीं किया जाता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर के नीचे एक तहखाने या एक खाली जगह नहीं रखना चाहिए, यह आपके लिए अच्छा शगुन नहीं होता है।


घर के नीचे पार्किंग या किसी अन्य उद्देश्य से बेसमेंट बनवाना वास्तु के अनुसार ठीक नहीं है, जैसा की पहले ही बताया है। आप इसे सामान्य तौर पर भी देखें, तो यह आपको सही नहीं लगेगा। आप खुद इस बात को समझ सकते हैं कि बेसमेंट में कभी भी दिन का उजाला पूरी तरह नहीं जाएगा। आसपास की मिट्टी से पानी की निकासी की अतिरिक्त समस्याएं उत्पन्न होगी। हालांकि यह समस्याएं आप आधुनिक उपकरणों से हल कर सकते हैं। लेकिन वास्तु विज्ञान के अनुसार यह सही नहीं, इससे आपको हमेशा कुछ न कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए आपको बेसमेंट के निर्माण के समय ही इन बातों का ध्यान रखना होगा, तो आपको वास्तु दोष से छुटकारा मिल जाएगा।

  • वास्तु के अनुसार बेसमेंट घर में उत्तर, उत्तर-पूर्व, या फिर पूर्व में ही होगा, तो बेहतर रहेगा। ये आपके लिए काफी लाभदायक साबित होगा।
  • इससे आपके बेसमेंट में सूरज की रोशनी भी आ सकेगी और ऊर्जा का स्तर बढ़ेगा।
  • आप अपने बेसमेंट के अंदर के डिवाइडर को अपनी पसंद के रंगों से रंग सकते हैं। इससे आपके अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
  • बेसमेंट बनवाते वक्त आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि बेसमेंट का एक चौथाई हिस्सा जमीन के ऊपर, जिस बेसमेंट में सूरज की रोशनी आसानी से पहुंच सके। यह आपके बेसमेंट के सूखा और गर्म रखेगा। इससे डिवाइडर को मजबूती मिलेगी।
  • बेसमेंट के दक्षिण और पश्चिम हिस्से में भारी चीजें रखने की सलाह दी जाती है, यह एक दम सही रहेगा। यदि दक्षिण-पश्चिम कोने को भी जमीन से ऊपर ही रखते हैं, तो यह शाम के वक्त भी आपके बेसमेंट में सूरज की किरणें पड़ेगी। आपको बेसमेंट बनाते समय ऊंचाई से समझौता नहीं करना चाहिए।
  • अगर आप दक्षिण पश्चिम भाग पर भर रख कर बैलन्स बनाने के लिए बेसमेंट का निर्माण करने की योजना बना रहें हैं तो ये बहुत ही उत्तम विचार है।
  • चूंकि यह स्थान जमीनी स्तर से नीचे है, इसलिए सुनिश्चित करें कि सेलर की ऊंचाई से समझौता न किया जाए।
  • इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि बेसमेंट की हाइट कम से कम नौ फीट होनी चाहिए।
  • बेसमेंट का आकार वर्गाकार होना चाहिए, अर्थात जितनी उसकी लंबाई उतनी ही चोड़ाई होगी, तो ठीक रहेगा। क्योंकि इससे परिवर्तनशीलता और शांति मिलती है।
  • आपको अपना बेसमेंट भी साफ रख ना चाहिए, क्योंकि अगर आप बेसमेंट को साफ नहीं रखेंगे, तो वह जाने वाले व्यक्ति के अंदर नकारात्मक ऊर्जाएं प्रवेश करेंगी। इसलिए कोशिश करना चाहिए कि आपके घर का बेसमेंट एरिया भी एकदम साफ हो।

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बेसमेंट वास्तु : क्या ना करें ?

अपने घर में अगर आप वास्तु को ध्यान में रखकर तहखाने का निर्माण कराएंगे, तो यह आपके लिए अच्छे परिणाम लेकर आएगा।

वास्तु शास्त्र के अनुसार को घर में तहखाना (बेसमेंट) बनाना ही नहीं चाहिए। लेकिन, फिर भी आप ऐसा करते हैं, तो यह समझना चाहिए कि आपको किन किन बातों का ध्यान रखना है। साथ ही किन किन चीजों को सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

  • तहखाने (बेसमेंट) का निर्माण वास्तु का ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। इससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होगी। हम आपको कुछ बातें बता रहें हैं, जिनका आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए…
  • बेसमेंट दक्षिण, दक्षिण-पूर्व या पश्चिम दिशाओं में स्थित नहीं होना चाहिए, इसे वास्तु शास्त्र में अशुभ माना जाता है।
  • बेसमेंट में भारी वस्तुओं को उत्तर या पूर्व की ओर नहीं रखना चाहिए। सूर्य की रोशनी बेसमेंट में पहुंच सकें इसके लिए उसे खुला रखना चाहिए।
  • बेसमेंट में जाने वाली सीढ़ी मजबूत होनी चाहिए। सीढ़ियां उत्तर-पूर्व की बजाय दक्षिण-पश्चिम कोने में बनाना अधिक लाभदायक होगा।
  • दीवारों पर हल्के रंग का प्रयोग करें, अगर आप दीवार पर गहरा रंग लगाते हैं, तो यह निराशावादी साबित हो सकता है। इसलिए ऐसे रंगों के उपयोग से बचें।
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार बेसमेंट की स्थिति घर में रहने वालों के लिए शांतिपूर्ण माहौल पैदा करता है, खुशियों की वजह बनती है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है।

सामान्य प्रश्न (FAQs)

वास्तु के अनुसार, बेसमेंट के लिए सीढ़ी किस दिशा में होनी चाहिए?

सीढ़ी हमेंशा घर के पश्चिमी या दक्षिणी भाग में ही होनी चाहिए। सीढ़ियां उत्तर-पूर्व कोने में अशुभ मानी गई है। यह दुर्भाग्य का संकेत देती है। दरअसल, पश्चिमी या दक्षिणी कोने को छोड़कर किसी भी कोने में सीढ़ियों का होना हताहत का कारण माना जाता है।

बेसमेंट में सीढ़ियां कहां रखें?

यदि संभव हो, तो सीढ़ी को ऐसे केंद्र बिंदु पर रखें, जहां घर से बाहर निकलने में बाधा उत्पन्न न हो। कई घरों में इन बातों का विशेष ध्यान नहीं रखा जाता है, जिससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


निष्कर्ष

आपको अपने घर में बेसमेंट का निर्माण करने से पहले वास्तु शास्त्र का पालन करना महत्वपूर्ण है। अगर आप अपने घर के निर्माण में वास्तु शास्त्र का ख्याल रखते हैं, तो यह आपकी आर्थिक स्थिति सहित कई बाधाओं से बचाता है। वहीं अगर यह वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों से कोई किनारा करता है, तो यह उसके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

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