कन्या राशि के तीन डेक्कन (virgo decans) और ज्योतिष का महत्व

ज्योतिष के मुताबिक डेक्कन सबसे छोटा ज्योतिष तत्व है। यह हमें किसी व्यक्ति के गुणों, विशेषताओं के बारे में तो बताता ही है साथ ही उससे जुड़ी भविष्यवाणियां करने में भी मदद करता है। उसके बारे में गहन जानकारी प्रदान करता है। हर राशि में तीन डेक्कन होते हैं, जो समान रूप से दस-दस डिग्री में विभाजित होते हैं। हम यहां कन्या राशि के जातकों के बारे में बात करेंगे।


कन्या डेक्कन : क्विक बाईट

  • कन्या राशि के पहले डेक्कन में वे लोग शामिल होते हैं, जिनका जन्म 23 अगस्त और 2 सितंबर के बीच हुआ है। इनका स्वामी बुध होता है स यह उन्हें संवाद या बातचीत करने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है।
  • कन्या राशि के दूसरे डेक्कन में वे लोग शामिल होते हैं, जिनका जन्म 3 सितंबर और 12 सितंबर के बीच होता है। इनका स्वामी शनि होता है, यह उन्हें ताकत और संवेदनशील बनाता है।
  • कन्या राशि का तीसरे डेक्कन में वे लोग आते हैं, जिनका जन्म 13 सितंबर से 22 सितंबर के बीच हुआ होता है, इनका स्वामी शुक्र होता है। यह उन्हें प्यार और कला में महारत देता है।

कन्या डेक्कन क्या है?

ऐसे जातक जिनका जन्म 23 अगस्त से 22 सितंबर के बीच होता है, वे कन्या राशि के जातक होते हैं। ज्योतिष के मुताबिक उन्हें तीन और छोटे भागों में बांटा जा सकता है। तिथि के मुताबिक इसका उल्लेख हम ऊपर कर चुके हैं। एक डेक्कन की मदद से हम एक व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं। एक राशि 30 डिग्री से बनी होती है, ऐसे में उसे दस-दस डिग्री के बराबर तीन भागों में बांटा जा सकता है। ऐसे में अब आप जान चुके हैं कि कन्या राशि का डेक्कन यानी उसका एक तिहाई बाग है।


कन्या पहला डेक्कन : 23 अगस्त से 2 सितंबर तक जन्में लोग

कन्या के प्रथम डेक्कन के जातक दाता यानी दान करने वाले होते हैं। वे बेहद उदार प्रवृति के होते हैं दूसरी की देखभाव करने वाले और विचारशील होते हैं। वे जिनसे एक बार जुड़ जाते हैं, हमेशा उनकी परवाह करते हैं। इनकी वाकपटुता सभी को पसंद आती है। भाषा और व्यवहार के धनी होते हैं, रचनात्मक भी होते हैं। ये हमेशा मुश्किलों के समाधान तलाशने में जुटे रहते हैं। ये अच्छे रणनीतिकार भी हो सकते हैं। हो सकता है कि लोग इनके बारे में बहुत अधिक न जान पाएं। ये हमेशा अपनी बात को सबसे सामने सही तरीके से पेश करते हैं, बिना किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाए सधे शब्दों में अपनी बात कह देते हैं। ये व्यंग्यों करने में भी महारथी होते हैं। ये हमेशा ज्यादा से ज्यादा सीखने के लिए तत्पर रहते हैं।


कन्या राशि के पहले डेक्कन को बुध कैसे प्रभावित करता है

बुध हमेशा संवाद और जिज्ञासा का प्रतिनिधित्व करता है। उनकी कई विशेषताएं हम पहले बता चुके हैं। यह ग्रह इस राशि के जातकों को बहुमुखी बनाता है और नया करने की प्रेरणा देता है। ये जीवन में अनुशासन स्थापित करता है। ये किसी भी काम को व्यवस्थित रूप से करने में विश्वास करते हैं। कन्या का प्रथम डेक्कन के जातक जीवन में अपनी मनचाही जीचें पाने के लिए कड़ी मेहनत करने में विश्वास करते हैं।

बुध उन्हें विश्लेषणात्मक और तार्किक कौशल प्रदान करता है। कॅरियर के मामले में इन जातकों को पूरी तरह फोकस्ड होने की जरूरत होती है। किसी भी कार्य को व्यवहारिका के साथ करने की जरूरत होती है। ये अपने कार्य को लेकर पूरी तरह समर्पित होते हैं। कार्यस्थल पर उनके समर्पण और ईमानदारी की सभी तारीफ करते हैं। ये कोई भी काम अच्छी तरह से पूरा करते हैं। उसके लिए ईमानदारी से प्रयास करते हैं।

एक व्यक्ति किसी विशिष्ट स्थिति में कैसे व्यवहार करता है, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। न कि सिर्फ डेक्कन पर। उदाहरण के लिए, आपका लग्न और चंद्र राशि आपको आपके व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ बताता है। लेकिन आपको अपना लग्न और चंद्र राशि कहां मिलती है? इसका उत्तर आपकी जन्मपत्री में है।


कन्या दूसरा डेक्कन: 2 सितंबर से 12 सितंबर तक जन्में लोग

कन्या राशि के दूसरे डेक्कन के जातकों में स्वाभाविक रूप से एक विशेषता होती है, वे समस्याओं को हल करने में माहिर होते हैं। वे जहां भी जाते हैं अपने आत्मविश्वास से लोगों को ध्यान आकर्षित कर ही लेते हैं। अगर आपको कोई मित्र कन्या राशि के दूसरे डेक्कन का जातक है, तो आप उन्हें बुद्धिमत्ता से बात करते हुए देखेंगे। ये बातचीत करने में, संवाद स्थापित करने में माहिर होते हैं। ये साफ सफाई को लेकर बेहद संजीदा होता है। इन बातों का ज्यादा ध्यान रखते हैं। ये जीवन में तय किए गए निर्देशों का पालन करने में यकीन करते हैं। कोई गड़बड़ होती है तो इन्हें पता चल जाता है। ये बेहत सर्तक होते हैं और किसी भी तरह के डर के बीच रहना पसंद नहीं करते। किसी अनजान का मिलना उनके परेशान कर देता है।


कन्या राशि के दूसरे डेक्कन को शनि कैसे प्रभावित करता है

शनि जैसे ग्रह के व्यवहार के विपरीत ये जातक संवेदनशील, सहानुभूति रखने वाले और देखभाल करने वाले होते हैं। इसके साथ ही शनि के कारण इनमें आत्मविश्वास, व्यस्थित होने और ढृढ़ इच्छा शक्ति जैसे गुण तो होते ही हैं। इनमें कुछ बहुत ही व्यवस्थित लोग भी शामिल होते हैं। कन्या राशि के जातक बहुत ही व्यावहारिक और अनुशासित होते हैं। हर काम में उनका परफेक्शन होता है, यह सफलता पाने में उनकी मदद करता है। इनमें नेतृत्व के गुण होते हैं, ये न केवल खुद को बल्कि दूसरे लोगों को भी आगे बढऩे के लिए प्रेरित करते रहते हैं। ये प्रखर वक्ता होते हैं, समूह में अपनी छाप छोडऩे की क्षमता रखते हैं। ये लीडर के साथ ही अच्छे मैनेजर भी होते हैं। इतने गुणों का होना कई बार परेशानी का सबब बन जाते हैं, वे अपने सामने वाले से भी इसी तरह की क्षमताओं की मांग करते हैं। ये मानसिक रूप से सशक्त होते हैं। उन्हें अपने काम काज में सफलता व समृद्धि प्राप्त करना बहुत अच्छा लगता है।


कन्या तीसरा डेक्कन : 13 सितंबर से 22 सितंबर तक जन्में लोग

ये अपना जीवन शानदार ऐशो आराम से बिताना पसंद करते हैं। ये भौतिकतावादी नहीं होते हैं। ये किसी के चेहरे पर मुस्कान खिलाने के लिए कुछ भी कर जाते हैं। ये अपने पर किसी भी तरह की पाबंदी लागू नहीं करना चाहते हैं। ये हमेशा स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं। इनके पास विपरीत परिस्थितियों का सामना करने और उन्हें जीतने की प्रतिभा है। फिर चाहे रास्ते में कितने ही रोड़े क्यों न आएं।

ये लाइम लाइट में रहना पसंद नहीं करते हैं। परदे के पीछे काम करना इन्हें पसंद आता है। ये जल्दी से किसी से खुल नहीं पाते हैं, शर्मिले स्वभाव के होते हैं, लेकिन जैसे ही ये एक बार किसी से सहज हो जाते हैं तो फिर आपको अपने बारे में सब कुछ बता देते हैं।


कन्या राशि के तीसरे डेक्कन को शुक्र कैसे प्रभावित करता है

शुक्र के कारण ही इनके जीवन में प्यार सबसे अहम होता है। शुक्र ग्रह इन जातकों को प्यार करने वाला और शर्मिले स्वभाव का व्यक्ति बनाता है। ये रिजर्व नेचर के होते हैं। इनके मन मस्तिष्क में कला का वास होता है। ये बेहद संवेदनशील होते हैं। ये जातक हमेशा खुश रहने वाले व एक जगह स्थिर रहने वाले होते हैं। उन्हें सकारात्मक रहना पसंद है। इसके साथ ही दृढ़ संकल्प और ताकत इनके गुणों में से एक है। इनमें अस्थिरता नहीं होती है।

ये हमेशा यही कहते हैं कि मैं यह कर सकता हूं। ये हमेशा अपनी ऊर्जा एक सही और अच्छे काम में लगाते रहते हैं। उनका दृढ़ संकल्प ही किसी भी बाधाको पार कर सकता है। शुक्र इन्हें वफादार बनाता है। अपने साथी के प्रति ये पूरी तरह समर्पित होते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि ये जातक ईर्ष्यालु भी होते हैं। वे अन्य लोगों से ईमानदारी की उम्मीद करते हैं।

अंत में यही कहा जा सकता है कि कन्या डेक्कन के जातक सच्चे, दृढ़ निश्चय और ईमानदारी से परिपूर्ण होते हैं।

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