Mundan muhurat 2022: मुंडन के शुभ मुहूर्त और उससे जुड़ी सभी जरूरी जानकरी

मुंडन मुहूर्त 2022 या शुभ मुंडन तिथियां 2022 उन तिथियों की सूची है, जिन पर मुंडन संस्कार किया जाना चाहिए। मुंडन हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक है। मुंडन संस्कार को कुछ हिंदू समुदायों में चौलकर्म, मुंडन, चूड़ाकर्म आदि संस्कार भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि किसी बच्चे के जन्म के बालों में उसके पूर्व जन्मों के कर्म या विकर्म समा जाते हैं। बच्चों को पूर्व जन्म के कर्मों से छुटकारा दिलाने और पुराने चक्रों से निजात दिलाने के लिए किया जाता है। वहीं यदि बात करें कि मुंडन मुहूर्त क्यों जरूरी है तो आपको बता दें कि मुंडन 16 संस्कारों में आठवें नंबर पर आने वाला संस्कार है और हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले शुभ मुहूर्त का बेहद महत्व है। हमारे विशेषज्ञ पंडितों पर साल 2022 मुंडन मुहूर्त महीने के अनुसार नीचे प्रदान किए गए है। लेकिन इसी के साथ मुंडन का अर्थ? मुंडन के लाभ जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी गंभीरता से समझाया गया है।

मुंडन शुभ मुहूर्त के साथ बच्चे की कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखकर किया जाना चाहिए,
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मुंडन का अर्थ

मुंडन सनातन धर्म में किया जाने वाला एक पौराणिक अनुष्ठान है जिसमें जन्म के बाद पहली बार बच्चे के बाल निकाले जाते हैं। मुंडन समारोह हमेशा सबसे शुभ मुंडन तिथियों में 7, 9 या 11 महीने की उम्र में किया जाता है। कुछ लोग इसे बाद की उम्र में 1-3 साल के बीच या कुछ समय बाद भी मुंडन करते हैं। लड़कों के साथ ही लड़कियों का भी मुंडन संस्कार किया जाता है इसे चैला कर्म कहा जाता है और लड़कियों की सही उम्र 2, 4 और 6 साल को माना जाता है। मुंडन का शाब्दिक अर्थ किसी वस्तु अपने मूल से रूप से अलग करना है, यहां सिर से बालों को अलग करने को मुंडन कहा गया है।

मुंडन संस्कार हमारे सौलह संस्कारों में से एक है, इसलिए इसे विधिवत रूप से ही किया जाना चाहिए विशेषज्ञों से संपर्क करें….

मुंडन समारोह और मुंडन मुहूर्त का महत्व

सनातन रीति-रिवाजों के अनुसार, मुंडन संस्कार एक बच्चे को उसके पिछले जन्म के पापों और नकारात्मकताओं से छुटकारा दिलाने के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक आत्मा 84 लाख योनियों से गुजरने के बाद मानव रूप प्राप्त करती है, इन सभी योनियों का मानव जन्म पर एक निश्चित प्रभाव पड़ता है। इन योनियों के अच्छे बुरे कर्मों से छुटकारा पाने के लिए बच्चे का सिर मुंडवाने जाता है, ताकि उसे सभी बुरे प्रभावों से मुक्ति मिल सके। यजुर्वेद के अनुसार, मुंडन संस्कार बच्चे की बुद्धि, स्वास्थ्य, आयु, शक्ति और चपलता को बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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मुंडन के लाभ - वैज्ञानिक कारण

हिंदू धर्म से जुड़ी परंपराएं और मान्यताओं के संबंध में हमें कई प्रकार की वैज्ञानिक या तर्कसंगत वजहें पता चलती है। सनातन धर्म के अधुनिक समय तक बचे रहने की सबसे बड़ी वजह ही यह रही कि वह अपने साथ वैज्ञानिक और तर्क संगत परंपाराएं और मान्यताएं बनाए रख पाए। आइए मुंडन से जुड़े कुछ वैज्ञानिक कारण भी जानें।

  • वैज्ञानिक रूप से देखें तो मां के गर्भ में कई हानिकारक बैक्टीरिया होते हैं, जो शिशु के बालों और स्कैल्प पर चिपक सकते हैं। इनमें से कई बैक्टीरिया ऐसे भी होते हैं जिन्हें कई बार धोने के बाद भी नहीं हटाया जा सकता है। बच्चे के सिर को शेव करने से ये बाल निकल जाते हैं। ऐसे करने से बच्चे के बाल और सिर की त्वचा स्वस्थ रहती और उसका अच्छा विकास भी होता है।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मुंडन के बाद बच्चे के शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है और इस तरह वे अच्छे मानसिक और शारीरिक विकास कर पाते हैं।
  • सिर का मुंडन सूर्य के प्रकाश के उचित अवशोषण में मदद करता है, जो विटामिन-डी का एक स्रोत है। यह बच्चे की खोपड़ी में समान रक्त परिसंचरण में मदद करता है, जिसके परिणामस्वरूप बालों का अच्छा विकास होता है।
  • मुंडन संस्कार बच्चे के पहले दांत निकलने पर होने वाले दांत के दर्द को कम कर सकता है।
  • शास्त्रों के अनुसार, मुंडन संस्कार बच्चे के जीवन में शुभता लाता है और बहुतायत और ज्ञान प्रदान करता है।

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मुंडन मुहूर्त 2022

मुंडन मुहूर्त 2022 की तारीख, वार और मुहूर्त महीने के अनुसार

मुंडन जीवन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसे विशेषज्ञों की देखरेख में रही करवाएं, अभी विशेषज्ञों से बात करें…

जनवरी 2022 मुंडन के मुहूर्त

जनवरी के महीने में मुंडन के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।

फरवरी 2022 मुंडन के मुहूर्त

आरंभ कालसमाप्ति काल
03 फरवरी गुरुवार, 07:08:32 से03 फरवरी गुरुवार, 16:35:19 तक
07 फरवरी सोमवार 07:06:01 से07 फरवरी सोमवार, 18:59:14 तक
11 फरवरी शुक्रवार, 07:03:11 से12 फरवरी, 06:37:54 तक
14 फरवरी सोमवार, 07:00:50 से14 फरवरी सोमवार, 20:30:57 तक
21 फरवरी सोमवार, 06:54:45 से21 फरवरी सोमवार, 20:00:08 तक
28 फरवरी सोमवार, 07:02:52 से01 मार्च, 03:18:44 तक

मार्च 2022 मुंडन के मुहूर्त

आरंभ कालसमाप्ति काल
14 मार्च सोमवार, 06:32:44 से14 मार्च सोमवार, 12:08:11 तक
24 मार्च गुरुवार, 06:21:12 से24 मार्च गुरुवार, 17:30:22 तक
28 मार्च सोमवार, 06:16:32 से28 मार्च सोमवार, 16:17:25 तक
30 मार्च बुधवार, 06:14:13 से30 मार्च बुधवार, 10:49:08 तक

मुंडन मुहूर्त अप्रैल 2022

आरंभ कालसमाप्ति काल
20 अप्रैल बुधवार, 13:55:02 से20 अप्रैल बुधवार, 23:42:01 तक
25 अप्रैल सोमवार, 05:46:15 से26 अप्रैल, 05:46:15 तक

मुंडन मुहूर्त मई 2022

आरंभ कालसमाप्ति काल
13 मई शुक्रवार, 18:49:23 से14 मई, 05:31:52 तक
27 मई शुक्रवार, 11:49:23 से28 मई, 02:26:42 तक

मुंडन मुहूर्त जून 2022

आरंभ कालसमाप्ति काल
01 जून बुधवार, 05:23:39 से01 जून बुधवार, 13:00:09 तक
02 जून गुरुवार, 16:03:57 से03 जून, 00:17:57 तक
10 जून शुक्रवार, 05:22:34 से11 जून, 05:22:34 तक
23 जून गुरुवार, 06:14:57 से24 जून, 05:24:03 तक
30 जून गुरुवार, 10:50:20 से1 जुलाई, 05:26:09 तक

मुंडन मुहूर्त जुलाई 2022

आरंभ कालसमाप्ति काल
01 जुलाई शुक्रवार, 05:26:31 से02 जुलाई, 03:56:19 तक
08 जुलाई शुक्रवार, 18:26:46 से9 जुलाई, 05:29:23 तक
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मुंडन मुहूर्त अगस्त 2022

अगस्त के महीने में मुंडन के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।

मुंडन मुहूर्त सितंबर 2022

सितंबर के महीने में मुंडन के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।

मुंडन मुहूर्त अक्टूबर 2022

अक्टूबर के महीने में मुंडन के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।

मुंडन मुहूर्त नवंबर 2022

नवंबर के महीने में मुंडन के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।

मुंडन मुहूर्त दिसंबर 2022

दिसंबर के महीने में मुंडन के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।

मुंडन संस्कार की विधि

मुंडन संस्कार के वैदिक रीति रिवाजों को नियमों के अनुसार करना बेहद जरूरी होता है। इसका अर्थ यह है कि यदि इस संस्कार को पूरे विधि विधान से ना किया जाए, तो यह बालक के लिए शुभ फलों की प्राप्ति नहीं कर सकता है। इसलिए किसी विशेषज्ञ पंडित जो मुंडन कराते है, वे इससे संबंधित हर महत्वपूर्ण विधि और प्रक्रिया का ध्यान रखते हैं। यहां आपको सबसे जरूरी बात जो ध्यान रखना है, वह यह कि मुंडन संस्कार सदैव किसी धार्मिक स्थान पर किया जाना चाहिए और इस संस्कार में सभी परिवार वालों और कुटुंब की मौजूदगी जरूरी है। मुंडन की प्रक्रिया तभी पूरी की जानी चाहिए, जब बच्चा शांत अवस्था में अर्थात हिले-डुले नहीं तभी सिर के बाल उतरवाने चाहिए। मुंडन की विधि शुरू करने से पहले जिस उस्तरे या कैंची से बाल उतारे जाने हैं, उसकी विधिवत पूजा करें। इसके अलावा आप जिस ब्लेड व रेजर का इस्तेमाल करने वाले हैं, उसको भी अच्छी तरह से साफ करें और हो सके तो एंटीबायोटिक से साफ कर लें। जब बाल उतारने की विधि पूरी हो जाये तो मुंडन किये जाने वाले बच्चे के हाथों से दान-पुण्य कराएं, यह मुंडन का एक जरूरी हिस्सा है।