मुंडन संस्कार मुहूर्त का महत्व
भारतीय संस्कृति के प्राचीन रीति-रिवाजों में मुंडन संस्कार का विशेष महत्व है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण भी निहित हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो मुंडन संस्कार के बाद सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी बच्चे के शरीर को अधिक प्रभावी रूप से प्राप्त होता है। यह सर्वविदित है कि जब शरीर खुला होता है, तो सूर्य की किरणें त्वचा द्वारा बेहतर ढंग से अवशोषित होती हैं। इससे बच्चे के शारीरिक विकास को लाभ मिलता है। इसी कारण बाल्यावस्था में मुंडन संस्कार कराने की परंपरा चली आ रही है। आमतौर पर मुंडन संस्कार एक से तीन वर्ष की आयु के बीच या फिर पांच या सात वर्ष की उम्र में किया जाता है।
ज्योतिष के अनुसार, मुंडन संस्कार का उद्देश्य व्यक्ति के पूर्व जन्म के कर्मों को शुद्ध करना और उनसे जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाना होता है। यह संस्कार बच्चे के जन्म के बाद पहली बार उन बालों को हटाने से जुड़ा होता है, जो मां के गर्भ से साथ आते हैं। मान्यता है कि इन बालों को हटाने से शिशु को नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा मिलती है।
इसके अलावा, मुंडन संस्कार से मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं सक्रिय होती हैं, जिससे बच्चे की मानसिक सक्रियता और एकाग्रता में वृद्धि होती है। मुंडन के पश्चात बच्चे के सिर को पवित्र जल से साफ किया जाता है तथा हल्दी और चंदन का लेप लगाया जाता है। इसका उद्देश्य त्वचा को ठंडक देना और कटने-छिलने जैसी समस्याओं से राहत प्रदान करना होता है।
मुंडन संस्कार हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मुंडन संस्कार का मुख्य उद्देश्य बच्चे को पूर्व जन्म की अशुद्धियों से मुक्त करना, सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना और उसके शारीरिक-मानसिक विकास को सुदृढ़ बनाना है।
मुंडन संस्कार 2026 के शुभ मुहूर्त
इस संस्कार को शुभ और निर्विघ्न रूप से संपन्न करने के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से उचित मुंडन मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक माना जाता है। सही मुहूर्त में मुंडन संस्कार करने से किसी भी प्रकार की बाधा या नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है।
मुंडन मुहूर्त की गणना करते समय तिथि, योग, वार, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है। हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, एक दिन में कुल 30 मुहूर्त होते हैं, जिनमें से कुछ शुभ और कुछ अशुभ माने जाते हैं।
मुंडन संस्कार के लिए द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियां विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं। इन तिथियों में किया गया मुंडन संस्कार बच्चे के जीवन में सकारात्मकता, स्वास्थ्य और शुभ फल प्रदान करता है।
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मुंडन संस्कार के लिए शुभ नक्षत्र
मुंडन संस्कार मृगशिरा, अश्विनी, पुष्य, हस्त, पुनर्वसु, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र के अंतर्गत करना शुभ माना जाता है। यदि मुंडन मुहूर्त के लिए जन्म तिथि को ध्यान में रखा जाए, तो इसे वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, माघ और फाल्गुन के उत्तरायण महीनों के दौरान करना चाहिए। इसलिए, यदि आपके बच्चे का जन्म इन महीनों में हुआ है, तो आप मुंडन संस्कार समारोह आयोजित कर सकते हैं या फिर शुभ मुंडन मुहूर्त का उपयोग कर सकते हैं।
साल 2026 में गणना के आधार पर पूरे वर्ष के लिए हर महीने के शुभ मुंडन मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। आप नीचे दी गई तालिका के माध्यम से इन शुभ तिथियों और मुहूर्तों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
मुंडन मुहूर्त 2026
| माह | तिथि | शुभ मुहूर्त (समय) |
|---|---|---|
| जनवरी | 04/01/2026 | 14:40 – 18:47 |
| जनवरी | 05/01/2026 | 08:26 – 12:58 |
| जनवरी | 10/01/2026 | 07:47 – 09:46, 11:16 – 16:09 |
| जनवरी | 11/01/2026 | 07:47 – 11:10, 12:37 – 18:20 |
| जनवरी | 12/01/2026 | 07:47 – 11:06, 12:34 – 18:16 |
| जनवरी | 14/01/2026 | 07:51 – 12:23, 14:01 – 18:08 |
| जनवरी | 21/01/2026 | 07:46 – 10:30, 11:58 – 17:41 |
| जनवरी | 25/01/2026 | 07:45 – 11:39, 13:18 – 19:45 |
| जनवरी | 26/01/2026 | 11:38 – 13:11 |
| जनवरी | 31/01/2026 | 07:42 – 09:51 |
| फरवरी | 06/02/2026 | 07:38 – 08:00, 09:30 – 14:23, 16:41 – 18:58 |
| फरवरी | 07/02/2026 | 07:38 – 07:56, 09:26 – 16:34 |
| फरवरी | 11/02/2026 | 07:43 – 10:33, 12:11 – 18:38 |
| फरवरी | 12/02/2026 | 14:02 – 16:14 |
| फरवरी | 21/02/2026 | 15:42 – 17:59 |
| फरवरी | 22/02/2026 | 07:25 – 11:25 |
| मार्च | 05/03/2026 | 09:09 – 12:37, 14:55 – 19:29 |
| मार्च | 08/03/2026 | 08:57 – 14:40 |
| मार्च | 11/03/2026 | 07:21 – 08:42, 10:21 – 16:48 |
| मार्च | 15/03/2026 | 07:05 – 10:02 |
| मार्च | 16/03/2026 | 14:11 – 18:42 |
| मार्च | 20/03/2026 | 06:57 – 08:07, 09:45 – 16:13 |
| मार्च | 21/03/2026 | 06:56 – 09:38, 11:37 – 18:26 |
| मार्च | 25/03/2026 | 07:50 – 13:33 |
| मार्च | 27/03/2026 | 11:13 – 15:45 |
| मार्च | 28/03/2026 | 09:14 – 15:41 |
| अप्रैल | 03/04/2026 | 10:46 – 12:58, 15:21 – 19:51 |
| अप्रैल | 04/04/2026 | 07:11 – 12:54, 15:17 – 19:48 |
| अप्रैल | 06/04/2026 | 17:26 – 19:40 |
| अप्रैल | 11/04/2026 | 14:49 – 19:06 |
| अप्रैल | 12/04/2026 | 06:40 – 10:07, 12:25 – 14:42 |
| अप्रैल | 13/04/2026 | 06:36 – 12:18, 14:42 – 19:12 |
| अप्रैल | 16/04/2026 | 16:47 – 19:00 |
| अप्रैल | 23/04/2026 | 07:32 – 11:39, 14:02 – 18:33 |
| अप्रैल | 24/04/2026 | 09:23 – 13:55, 16:16 – 18:29 |
| अप्रैल | 29/04/2026 | 07:08 – 09:01, 11:18 – 18:09 |
| मई | 03/05/2026 | 07:40 – 13:20, 15:40 – 20:13 |
| मई | 04/05/2026 | 06:48 – 13:16, 15:36 – 17:50 |
| मई | 09/05/2026 | 06:29 – 08:21, 10:39 – 17:30 |
| मई | 10/05/2026 | 06:25 – 08:17, 10:35 – 19:46 |
| मई | 11/05/2026 | 06:21 – 10:28, 12:51 – 19:42 |
| मई | 14/05/2026 | 14:57 – 18:21 |
| मई | 15/05/2026 | 08:01 – 10:12 |
| जून | 17/06/2026 | 05:55 – 08:03, 12:43 – 19:35 |
| जून | 22/06/2026 | 12:24 – 14:37 |
| जून | 24/06/2026 | 09:58 – 16:49 |
| जून | 27/06/2026 | 07:26 – 09:44, 12:04 – 18:55 |
| जुलाई | 02/07/2026 | 11:44 – 13:58, 16:20 – 18:36 |
| जुलाई | 04/07/2026 | 13:53 – 16:09 |
| जुलाई | 05/07/2026 | 09:15 – 16:05 |
| जुलाई | 08/07/2026 | 06:43 – 09:00, 11:21 – 18:12 |
| जुलाई | 09/07/2026 | 06:39 – 11:14, 13:33 – 15:50 |
| जुलाई | 12/07/2026 | 11:05 – 13:18, 15:41 – 19:34 |
| जुलाई | 15/07/2026 | 13:10 – 17:45 |
| जुलाई | 20/07/2026 | 06:08 – 12:47, 15:09 – 19:05 |
| जुलाई | 24/07/2026 | 06:10 – 07:58, 10:18 – 17:09 |
| जुलाई | 31/07/2026 | 07:33 – 14:23, 16:45 – 18:46 |
| अगस्त | 01/08/2026 | 07:29 – 12:00 |
| अगस्त | 05/08/2026 | 11:47 – 18:26 |
| अगस्त | 09/08/2026 | 06:58 – 13:48 |
| अगस्त | 10/08/2026 | 16:05 – 18:06 |
| अगस्त | 16/08/2026 | 17:46 – 19:25 |
| अगस्त | 17/08/2026 | 06:26 – 10:57, 13:19 – 17:39 |
| अगस्त | 20/08/2026 | 10:48 – 15:23, 17:30 – 19:09 |
| अगस्त | 22/08/2026 | 08:24 – 15:15 |
| अगस्त | 26/08/2026 | 06:28 – 10:21 |
| सितंबर | 05/09/2026 | 07:29 – 09:42, 14:23 – 18:06 |
| सितंबर | 07/09/2026 | 07:21 – 11:54, 16:19 – 17:58 |
| सितंबर | 12/09/2026 | 13:56 – 17:39 |
| सितंबर | 13/09/2026 | 07:39 – 09:11, 11:33 – 17:35 |
| सितंबर | 17/09/2026 | 15:40 – 18:47 |
| सितंबर | 18/09/2026 | 06:39 – 13:29 |
| सितंबर | 24/09/2026 | 06:42 – 10:47, 13:08 – 18:19 |
| अक्टूबर | 12/10/2026 | 07:20 – 09:36, 11:58 – 17:08 |
| अक्टूबर | 15/10/2026 | 07:08 – 11:43, 13:50 – 18:21 |
| अक्टूबर | 21/10/2026 | 07:31 – 09:01, 11:22 – 16:33, 18:01 – 19:33 |
| अक्टूबर | 30/10/2026 | 07:04 – 08:25 |
| अक्टूबर | 31/10/2026 | 07:42 – 08:21, 10:43 – 15:54, 17:22 – 18:54 |
| नवंबर | 01/11/2026 | 07:05 – 10:36, 12:43 – 17:15 |
| नवंबर | 06/11/2026 | 12:23 – 14:03, 15:33 – 18:30 |
| नवंबर | 07/11/2026 | 07:57 – 12:16 |
| नवंबर | 08/11/2026 | 07:10 – 07:50, 10:12 – 12:12 |
| नवंबर | 11/11/2026 | 07:41 – 09:57, 12:04 – 16:35 |
| नवंबर | 12/11/2026 | 07:37 – 09:53, 12:00 – 15:06 |
| नवंबर | 16/11/2026 | 07:21 – 13:23, 14:54 – 19:46 |
| नवंबर | 22/11/2026 | 07:21 – 11:17, 13:03 – 17:27 |
| नवंबर | 26/11/2026 | 09:01 – 14:11, 15:39 – 18:15 |
| नवंबर | 28/11/2026 | 10:57 – 15:28, 17:07 – 18:59 |
| नवंबर | 29/11/2026 | 07:27 – 08:46, 10:53 – 12:32 |
| दिसंबर | 03/12/2026 | 10:37 – 12:16 |
| दिसंबर | 04/12/2026 | 07:31 – 12:12, 13:43 – 18:36 |
| दिसंबर | 06/12/2026 | 08:21 – 13:32 |
| दिसंबर | 07/12/2026 | 16:31 – 18:24 |
| दिसंबर | 14/12/2026 | 07:38 – 11:33, 13:04 – 17:56 |
| दिसंबर | 16/12/2026 | 07:42 – 12:53, 14:21 – 15:53 |
| दिसंबर | 19/12/2026 | 09:34 – 14:06, 15:44 – 19:51 |
| दिसंबर | 20/12/2026 | 07:41 – 09:27 |
| दिसंबर | 25/12/2026 | 07:44 – 12:17, 13:45 – 19:28 |
| दिसंबर | 26/12/2026 | 09:07 – 10:46 |
| दिसंबर | 31/12/2026 | 07:46 – 10:26, 11:57 – 16:50 |
निष्कर्ष
हिंदू संस्कृति में अनेक संस्कारों का उल्लेख मिलता है, जो बच्चे के जन्म से लेकर उसके संपूर्ण जीवन के विभिन्न चरणों में संपन्न किए जाते हैं। इन सभी संस्कारों का गहरा धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। जन्म के पश्चात किए जाने वाले अन्नप्राशन और विद्यारंभ संस्कार की भांति ही मुंडन संस्कार भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य संस्कार माना जाता है।
हिंदू परंपरा के अनुसार, मुंडन संस्कार बच्चे के जन्म के चार महीने से लेकर तीन वर्ष की आयु के बीच संपन्न किया जाता है। यह संस्कार विधि-विधान के साथ, उचित शुभ मुहूर्त और पूर्व निर्धारित तिथि पर, योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में किया गया मुंडन संस्कार बच्चे के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य का संचार करता है।
इसी कारण मुंडन संस्कार के लिए मुंडन मुहूर्त का विशेष महत्व होता है, जिसकी गणना पंचांग और वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों के आधार पर की जाती है।
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