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मासिक शिवरात्रि 2026

मासिक शिवरात्रि 2025

देवाधिदेव महादेव की उपासना का पर्व है, शिवरात्रि। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। वहीं साल में एक बार महाशिवरात्रि मनाई जाती है, जो माघ माह की मासिक शिवरात्रि होती है। हालांकि, परन्तु पूर्णिमान्त पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। आपको बता दें कि दोनों पंचांगों में यह चन्द्र मास की नामाकरण प्रथा है, जो इसे अलग करती है। हालांकि पूर्णिमान्त और अमान्त दोनो पञ्चाङ्ग एक ही दिन महा शिवरात्रि के अलावा भी सभी शिवरात्रियों को भी मानते हैं।


मासिक शिवरात्रि की तिथि और समय

तिथि व दिनअवसरनिशिता काल (पूजा समय)तिथिअवधिमाह व पक्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्त
16 जनवरी, शुक्रवारमासिक शिवरात्रि12:23 AM – 01:16 AM (17 जनवरी)चतुर्दशी52 मिनटमाघ, कृष्ण पक्ष10:21 PM, 16 जनवरी12:03 AM, 18 जनवरी
15 फरवरी, रविवारमहा शिवरात्रि / मासिक शिवरात्रि12:28 AM – 01:19 AM (16 फरवरी)चतुर्दशी50 मिनटफाल्गुन, कृष्ण पक्ष05:04 PM, 15 फरवरी05:34 PM, 16 फरवरी
17 मार्च, मंगलवारमासिक शिवरात्रि12:24 AM – 01:12 AM (18 मार्च)चतुर्दशी48 मिनटचैत्र, कृष्ण पक्ष09:23 AM, 17 मार्च08:25 AM, 18 मार्च
15 अप्रैल, बुधवारमासिक शिवरात्रि12:17 AM – 01:02 AM (16 अप्रैल)चतुर्दशी45 मिनटवैशाख, कृष्ण पक्ष10:31 PM, 15 अप्रैल08:11 PM, 16 अप्रैल
15 मई, शुक्रवारमासिक शिवरात्रि12:14 AM – 12:57 AM (16 मई)चतुर्दशी43 मिनटज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष08:31 AM, 15 मई05:11 AM, 16 मई
13 जून, शनिवारअधिक मासिक शिवरात्रि12:19 AM – 01:01 AM (14 जून)चतुर्दशी42 मिनटज्येष्ठ (अधिक), कृष्ण पक्ष04:07 PM, 13 जून12:19 PM, 14 जून
12 जुलाई, रविवारमासिक शिवरात्रि12:24 AM – 01:07 AM (13 जुलाई)चतुर्दशी42 मिनटआषाढ़, कृष्ण पक्ष10:29 PM, 12 जुलाई06:49 PM, 13 जुलाई
11 अगस्त, मंगलवारसावन शिवरात्रि / मासिक शिवरात्रि12:23 AM – 01:07 AM (12 अगस्त)चतुर्दशी44 मिनटश्रावण, कृष्ण पक्ष04:54 AM, 11 अगस्त01:52 AM, 12 अगस्त
9 सितंबर, बुधवारमासिक शिवरात्रि12:14 AM – 01:00 AM (10 सितंबर)चतुर्दशी46 मिनटभाद्रपद, कृष्ण पक्ष12:30 PM, 09 सितंबर10:33 AM, 10 सितंबर
8 अक्टूबर, गुरुवारमासिक शिवरात्रि12:03 AM – 12:52 AM (09 अक्टूबर)चतुर्दशी49 मिनटआश्विन, कृष्ण पक्ष10:15 PM, 08 अक्टूबर09:35 PM, 09 अक्टूबर
7 नवंबर, शनिवारमासिक शिवरात्रि11:58 PM – 12:49 AM (08 नवंबर)चतुर्दशी51 मिनटकार्तिक, कृष्ण पक्ष10:47 AM, 07 नवंबर11:27 AM, 08 नवंबर
7 दिसंबर, सोमवारमासिक शिवरात्रि12:05 AM – 12:58 AM (08 दिसंबर)चतुर्दशी53 मिनटमार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष02:22 AM, 07 दिसंबर04:12 AM, 08 दिसंबर

मासिक शिवरात्रि का महत्व

भारतीय पौराणिक कथाओं में उल्लेखित कथा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन आधी रात को देवाधिदेव महादेव प्रकट हुए थे। इस शिव लिङ्ग की पूजा पहली बार श्रीहरि विष्णु और ब्रह्मा जी ने की थी। माघ माह के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन ही भगवान शिव लिङ्ग रूप में प्रकट हुए थे, इसीलिए उनके महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है, जबकि हर महीने मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। हालांकि कई जगह पर महाशिवरात्रि का उल्लेख पार्वती और शिव के विवाह से भी है। इस पवित्र दिम माता पार्वती और पिता शिव का विवाह संपन्न हुआ है। शिवरात्रि का व्रत प्राचीन काल से प्रचलित है। पुराणों में उल्लेखित किया गया है कि देवी लक्ष्मी, सरस्वती, इन्द्राणी, पार्वती, गायत्री, सावित्री, सीता और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था।

अगर कोई शिवरात्रि के व्रत को शुरू करना चाहते हैं, तो वह महाशिवरात्रि से शुरु कर सकते हैं। महाशिवरात्रि के पर्व के बाद से ही हर शिवरात्रि पर उपवास करना बहुत शुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस उपवास को करने से भक्तों पर भगवान शिव की कृपा बरसती है, और हर मुश्किल काम आसान हो जाता है। अविवाहित और विवाहित दोनों ही इस व्रत को कर सकती है। इसे करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, और अपने भक्तों पर आशीर्वाद की बरसात करते हैं। आपको बता दें कि अगर मासिक शिवरात्रि मंगलवार के दिन पड़ती है, इसे शास्त्रों में बहुत ही शुभ बताया गया है। आइए सबसे पहले हम साल 2026 की सभी शिवरात्रियों की तिथियों को जानते हैं:


शिवरात्रि पूजा विधि

शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। अगर गंगास्नान करते हैं, तो यह सोने पर सुहागा होगा। स्नान के बाद उपासक उपवास का संकल्प लें। व्रत के दौरान भक्तों को किसी भी तरह का भोजन नहीं करना चाहिए। हालांकि, अगर आप फलाहार और दूध को संकल्प मुक्त रखते हैं, तो फलाहार और दूध का सेवन कर सकते हैं। इसके बाद शाम के समय एक बार फिर स्नान करना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग की पूजा के लिए मंदिर में जाना चाहिए। अगर आप मंदिर जाने में असमर्थ हैं, तो घर पर ही एक अस्थायी शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं। इसके बाद रात्रि को पूजा करना चाहिए। वहीं महाशिवात्रि के दिन मंदिरों में अर्ध रात्रि के समय भगवान की पूजा होती है, उपासक को उस पूजा में शामिल होना चाहिए। मासिक शिवरात्रि पर पूजा रात में एक या चार बार की जा सकती है। रात के चारों पहर में आप भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। अगर आप रात भर भगवान शिव की पूजा करते हैं, तो आपको रातभर सोने की इजाजत नहीं है। जो भक्त एकल पूजा करना चाहते हैं, उन्हें पूजा मध्यरात्रि के दौरान करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव का रूद्राभिषेक करना सबसे शुभ माना गया है। अगर आप शिवरात्रि के दिन रूद्राभिषेक पूजा कराते हैं, तो आपकी सारी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं।

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शिव पूजन सामग्री

भगवान शिव की पूजा वैदिक रिति रिवाजों से ही होना चाहिए। अगर आप पूजा में किसी तरह की त्रुटि करते हैं, तो इसका विपरित असर देखने को मिल सकता है। पूजा के दौरान आप शुद्ध देसी घी, पांच प्रकार के फल, पंचमेवा, पुष्प, पवित्र जल, पंचरस, रोली, मौली, गंध, जनेऊ, पंचमेवा, चांदी, शहद, सोना, पांच प्रकार की मिठाई, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, आम्र मंजरी, गाय का दूध, धूप, कपूर, चंदन, मां पार्वती की श्रृंगार सामग्री, दीपक, पवित्र जल, बेर, इत्र, दक्षिणा, रुई, जौ की बाले, तुलसीदल आदि चीजों की जरूरत पड़ेगी।


भगवान शिव के मंत्र

  • ॐ नमः शिवाय॥
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि

    तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

निष्कर्ष

शिवरात्रि का त्योहार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। हरेक माह आने वाले मुख्य त्योहारों में मासिक शिवरात्रि का मुख्य स्थान होता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत बहुत आसान और प्रभावशाली होता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी इस दिन भगवान शिव का पूजन करते हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। 

हम उम्मीद करते हैं, कि आप मासिक शिवरात्रि के बारे में पूरी तरह समझ गए होंगे। और आशा करते हैं कि अगली शिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न कर आशीर्वाद पाने के लिए वैदिक रिवाजों से ही पूजा संपन्न करवाएंगे।

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