अजा एकादशी व्रत और उसका महत्व 2022

अजा एकादशी व्रत और उसका महत्व 2022

सितंबर महीने के पहले सप्ताह में बड़ी एकादशी है। तीन सितंबर को अजा एकदाशी (aja) पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकदाशी का व्रत करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। हालांकि एकादशी की तिथि दो सितंबर से शुरू हो जाएगी, लेकिन उदयकालीन तिथि के अनुसार अजा एकादशी का व्रत 22 अगस्त 2022 को किया जाएगा। अजा एकादशी के दिन तुलसी पूजा जरूर करें।

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कैसे करें अजा एकादशी का व्रत

भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं ही अजा एकादशी का महत्व बताया है। उनके अनुसार इस दिन सुबह व्रत करने वाले को व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और कुछ मिनट के लिए मौन रहें। मन ही मन भगवान विष्णु के दिव्य मंत्रों का जाप करते रहें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है। यदि आप पाठ करने में असमर्थ हैं, तो इसे सुना भी जा सकता है। घी में हल्दी मिलाकर भगवान की आरती करें। व्रत करने वाले लोग फलाहार ही करें। रोगी और गर्भवती महिलाओं को व्रत से छूट प्राप्त रहती है। अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ जरूर करें। शाम में भगवान विष्णु की आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करें। दूसरे दिन गरीबों को जरूरत का सामान दान करने के बाद व्रत खोलें।


अजा एकादशी व्रत कथा

राजा हरिशचंद्र बहुत ही स्वाभिमानी और सत्य का साथ देने वाले थे। ऋषि विश्वामित्र को उन्होंने सबकुछ दान कर दिया। इसके बाद फिर विश्वामित्र ने 500 सोने की मुद्रा मांगी, लेकिन वे दे नहीं सकें। विश्वामित्र का ऋण चुकाने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे को गिरवी रखा और खुद श्मशान में काम करने लगे। एक दिन उनकी पत्नी बेटे का शव लेकर आई। पत्नी के पास शव जलाने के लिए शुल्क नहीं था। तब हरिशचंद्र ने अपने मालिक के प्रति अपने कर्तव्य को निभाते हुए शव जलाने की अनुमति नहीं दी। हरिशचंद्र की पत्नी ने अपनी साड़ी फाड़कर शव का शुल्क चुकाया। उस दिन एकादशी थी और उनका परिवार दिनभर भूखा रहा और हरि नाम का जाप करता रहा। भगवान विष्णु हरिशचंद्र के इस व्रत और उसकी कर्तव्य परायणता से प्रसन्न हुए और उनके पुत्र के साथ राज्य भी लौटा दिया।