प्रवीण कुमार: मंगल और गुरु लगवा रहे कॅरियर को हाईजंप

प्रवीण कुमार: मंगल और गुरु लगवा रहे कॅरियर को हाईजंप

टोक्यो पैरालिंपिक में भारत की शुरुआत अच्छी रही है। अब प्रवीण कुमार ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया है। पैरालंपिक में भारत को अब तक 11 पदक मिल चुके हैं, जिनमें दो गोल्ड मेडल शामिल है। प्रवीण कुमार महज 18 साल के हैं। उनकी कुंडली बेहद पॉजिटिव है। कुंडली के अनुसार प्रवीण को आगे सरकार से काफी सम्मान मिल सकते हैं। देखते हैं क्या कहती है हाई जंप में मेडल जीतने वाले प्रवीण कुमार की कुंडली….


उच्च के मंगल और गुरु ने दिया प्रवीण का साथ

नोएडा के प्रवीण कुमार का जन्म 15 मई 2003 को हुआ। उसकी कुंडली में उच्च का मंगल और उच्च का गुरु एक-दूसरे की पूर्ण दृष्टि में है। गुरु प्रवीण का लग्नेश है और मंगल भाग्येश है। लग्नेश और भाग्येश का संबंध प्रवीण को काफी ऊंचाइयों तक ले जाएगा। प्रवीण की कुंडली में सूर्य भी मेष राशि में है। जो सूर्य की उच्च की राशि है। सूर्य के उच्च होने से सरकार की ओर से सम्मान के साथ विशेष पुरस्कार भी प्रवीण को आगे मिलते रहेंगे। वे आगामी दिनों में विदेशों में होने वाली एथलिट प्रतियोगिताओं में भारत का नाम ऊंचा करेंगे।


प्रवीण का एक पैर छोटा, लेकिन हिम्मत बड़ी

बचपन से ही प्रवीण का एक पैर छोटा है, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। घरवालों की प्रेरणा से प्रवीण ने खेलकूद में रुचि बढ़ाई और पैरालिंपिक तक पहुंचे हैं। हालांकि उन्होंने अपने खेल की शुरुआत वालीबॉल से की थी, लेकिन कोच सत्यपाल की प्रेरणा से उन्होंने हाई जंप में कॅरियर बनाया। पूरी मेहनत और हिम्मत से लगातार खुद के खेल को संवारा। ग्रहों ने भी साथ दिया और प्रवीण इस काबिल बन पाए।