नीलम रत्न के ज्योतिषीय लाभ और धारण करने के जानकारी


नीलम रत्न (Blue Sapphire) के बारे में जानकारी

नवरत्न का अर्थ है एक साथ नौ रत्नों का कॉम्बिनेशन, और नीलम उन्हीं नौ नवरत्नों में से एक है। यह अन्य रत्नों की तुलना में जल्द ही अपना असर दिखाता है। ब्लू फाइअर, जिसे नीलम रत्न भी कहा जाता है नीलम का अर्थ होता है नीला। यह शानदार विशेषताओं और गुणों की वजह से एक अद्भुत रत्न है।

ओरिजनल नीलम रत्न शायद सबसे मूल्यवान रत्नों में से एक है। यह रत्न शनि देव के अंतर्गत आता है। जिन्हें हम कर्मों के स्वामी मानते हैं। इस प्रकार यह रत्न आपको लाभ भी दे सकता है और आपकी उम्र भी कम कर सकता हैं। नीलम रत्न की आभा इमर्शन और टोन की वजह से हल्के नीले रंग में बदल जाती है। यह रत्न पहनने के बाद हमें अपने कर्मों में सुधार करने की जरूरत होती है।


नीलम धारण करने के लाभ

नीलम धारण करने के वैसे तो कई फायदे हैं, यहाँ हमने नीचे कुछ मुख्य फायदे लिखें है। जिनको ध्यान से पढ़िए :

  • यह रत्न दोस्ती, प्रोफेशन और प्यार को जीवन में बढ़ाता है।
  • नीलम रत्न आपको भरपूर धन, शुभकामनाएं और सफलता प्रदान कर सकता है। इसी तरह, अतीत से लाये मानटेरी दुर्भाग्य को भी हमेशा के लिए दूर कर सकता है।
  • यह रत्न धारण करने वाले को मानसिक शांति मिलती है। नीलम रत्न चिंताओं को भी दूर करने में मदद करता है। एक शांत मन और आत्मा आपको सही विकल्प चुनने में मदद करेगी। इसी तरह, निर्णय लेने में आप स्पष्टता का अनुभव करेंगे।
  • यह रत्न व्यक्ति में एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
  • नीलम रत्न दुख और मृत्यु से जुड़ी हुई, सभी नकारात्मक भावनाओं को समाप्त कर सकता है। यह रत्न धारण के बाद यह व्यक्ति किसी भी गंभीर दुख से बच सकता है। जो भी इसे पहनता है वो निडर हो जाता है, और मानसिक संतुलन भी हासिल करता है।
  • नीलम रत्न पहनने से व्यक्ति को कई चिकित्सीय लाभ मिलते है। उसकी सेहत में सुधार होता है।
  • यह रत्न पेट की पथरी को ठीक करने में मदद करता है, और पेट से जुड़ी हुई हर प्रकार की समस्या में भी सुधार करता है।
  • यह रत्न किसी भी तरह के दबाव, घबराहट और अवसाद दूर रखने में भी सहायता करता है।
  • नीलम धारण करने से ब्रोंकाइटिस, गठिया, जी मिचलाना और जकड़न जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
  • यह रत्न हड्डियों, घुटनों, दांतों, पैरों और पसलियों से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाने में मदद करता है।
  • नीलम धारण करने से आपको अपनी गुप्त शक्तियों का पता लगाने में मदद मिलती है।
  • इस रत्न को धारण करने वाले से शनिदेव खुश रहते हैं। यह व्यक्ति को नाम, लोकप्रियता, भाग्य और धन प्रदान करता है।
  • व्यक्तियों के पास एक से अधिक आय के साधन होते हैं। यह बिज़नस और घर में आर्थिक मजबूती भी प्रदान करता हैं।
  • नीलम रत्न को अत्यंत रक्षात्मक माना जाता है। इसे धारण करने वाले व्यक्ति को डकैती, भय, दुर्घटना, और तूफान, आग, आदि जैसी विशिष्ट आपदाओं के कारण होने वाली समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है।
  • यह शत्रुओं से भी सुरक्षा प्रदान करता है। यह आँखों की परेशानी और झुंझलाहट से भी बचाता है।
  • नीलम रत्न एक सुरक्षा कवच की तरह होता है, जो पहनने वाले को हर खतरे से बचाता है।
  • शनिदेव के दंड से भी बचाता है।

रत्न धारण करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

ज्योतिषीय लाभों को प्राप्त करने के लिए हमेशा, नीलम रत्न को किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद ही पहनना चाहिए। यह रत्न हर किसी को सूट नहीं करता है, क्योकि यह रत्न किसी ज्योतिषी की सलाह के बाद भी सिर्फ 40% व्यक्तियों के लिए उपयुक्त होता है। इस प्रकार, नीलम रत्न धारण करने की कोई भी सलाह दें, तो पहले आप किसी योग्य पेशेवर ज्योतिषियों द्वारा कुंडली की जांच करवा लें। इस रत्न में कर्म ग्रह शनि की ऊर्जा भी होती है। शनि की अंतर दशा व्यक्ति के जीवन को सवारने और बिगाड़ने का काम करती हैं, इसलिए नीलम रत्न को धारण करते समय पर्याप्त ध्यान रखना चाहिए। जो भी यह रत्न धारण करें उसे ध्यान रखना चाहिए की 100% प्राकृतिक और असली हो। तभी उसे सही दिन और समय के अनुसार पहनना चाहिए।

इसके अलावा, शनि की महादशा और अंतर्दशा के दौरान रत्न कई प्रकार का परिणाम देता है। यदि आप साढ़े साती के दौर से गुजर रहे हैं, तो भी यह रत्न आपको असाधारण परिणाम भी दे सकता है। इस रत्न को धारण करने वाला व्यक्ति के जीवन से सभी तरह के गतिरोध और निराशा दूर हो सकती है, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनको यह रत्न फायदा नहीं देता है। उनके जीवन में कई तरह की समस्या आने लगती है। रत्न पहनने वाले व्यक्ति में तत्काल ऊर्जा और उत्सुकता प्रदान करके यह व्यक्ति के पाचन में सुधार करता है। यह शनि की साढ़े साती अवस्था में भी व्यक्ति को लाभ देता है। जब भी रत्न धारण करें, तप पहले उसके परिणाम जान लों। अब आप सोच रहे होंगे की बिना पहने कैसे परिणाम पता चलेगा। इसकी एक विधि है जब भी आप नीलम रत्न लेकर आये, तो उसे दो से तीन दिन तक अपनी तकिया के नीचे रखें। यदि उन तीन दिनों के अंदर आपको शुभ समाचार और कुछ अच्छा नजर आता हाई तो आप मान सकते हैं यह आपको लाभ देगा।


नीलम किसे पहनना चाहिए

  • यदि आपका जन्म सितंबर में हुआ है, तो भी आप पहन सकते हैं। नीलम रत्न केवल मकर और कुंभ राशि वाले के लोगों तक ही सीमित नहीं है।
  • इसे कुंडली का विश्लेषण करवाकर ही पहनना चाहिए।
  • यह रत्न आपकी एकाग्रता में सुधार करता है, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि जो लोग टीचर है, वो भी इसे पहन सकते हैं। इसके अलावा छात्र और विशेषज्ञ भी इसे धारण कर सकते हैं। इसे पहनने से उन्हें लाभ मिलेगा।
  • यह रत्न उन लोगों के भी काम आता है जो लोग सरकारी विभाग में ऐसे पदों पर होते हैं। जहाँ उन्हें लोगों की मदद करनी होती है।
  • शनि ग्रह कर्म प्रधान होने की वजह से यह व्यक्ति को उसके कर्मों का फल प्रदान करता है। यदि आप इस ग्रह को प्रसन्न कर देते हैं, तो यह आपको बहुत लाभ देता है। यह रत्न आत्म-सम्मान में सुधार करता है, अच्छे या बुरे की पहचान करने और आत्म-स्वीकृति में मदद करता है।
  • यह रत्न मानव शरीर में क्राउन चक्र से जुड़ा होता है। जिसकी ऊर्जा कुंडलिनी शक्ति से जाकर जुड़ती है।
  • नीलम रत्न आज्ञा चक्र को भी जागृत कर सकता है। यह चक्र पिट्यूटरी अंग को भी लाभ पहुंचाता है।
  • नवीन और आविष्कारशील क्षमताओं को इकट्ठा करने में भी मदद करता है।
  • यह रत्न उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो लोग एक्टर, डिजाइनर, लेखन, समाचार कवरेज और आविष्कारक के रूप में करियर बनाना चाहते हैं।
  • जो लोग एक्टिंग, डांस, शो, सिनेमैटोग्राफी क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं, वे भी नीलम धारण करके अपने प्रोफेशन में टॉप पर आ सकते हैं।
  • यह विशेषज्ञों, ज्योतिषियों, शोधकर्ताओं, निबंधकारों और मैकेनिकल डिजाइनरों को भी लाभ पहुंचाता है। यह रत्न उन्हें अपनी क्षमताओं और जानकारी में सुधार करने में मदद करता है।
  • यह उन्हें सामान्य और टेस्टिंग से जुड़ी स्थितियों को आसानी से संभालने में भी मदद करता है।

नीलम धारण करने के टिप्स

  • कम से कम 2 कैरेट का नीलम रत्न व्यक्ति को धारण करना चाहिए।
  • चांदी और प्लेटिनम की अंगूठी या पेंडेंट में पहने जाने पर ही रत्न सकारात्मक परिणाम देता है। रत्न को कभी भी सोने की अंगूठी या पेंडेंट के साथ नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक परिणाम देता है।
  • नीलम रत्न को शनिवार के दिन दाएं या बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए।
  • व्यक्ति को यह रत्न धारण करने से पहले उसे दूध की कटोरी में लगभग एक घंटे तक रखना चाहिए और उसके बाद गुलाब जल में भी रखना चाहिए ताकि रत्न को बल मिले।
  • नीलम रत्न के विकल्प ब्लू स्पिनेल, ब्लू टोपाज और एमेथिस्ट स्टोन हैं।
  • यदि आप नीलम रत्न को नहीं खरीद सकते तो आप उनके विकल्प भी पहन सकते हैं।
  • यह बात सही है कि नीलम रत्न की तुलना में विकल्प थोड़े कम फायदेमंद होते हैं।
  • नीलम रत्न आपको लाभ दे रहा होगा, तो आप पहले दिन से ही इसके रिजल्ट दिखना शुरू हो जायेगा। नीलम पहनने के पहले दिन से लेकर एक महीने के अंदर आपको , शुभ समाचार, नये अवसर, नेम-फेम और उन्नति प्रदान करने लगता है।

निष्कर्ष

जैसा की हमने इस लेख में पाया की नीलम रत्न शनि ग्रह के बुरे प्रभावों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, हम आपको एक सलाह जरुर देना चाहते हैं कि आप आप इसे पहनने से पहले सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषियों से परामर्श जरूर लें। ऐसा करने से आपको इसके अधिकतम लाभ मिल सकते हैं।