शिव रुद्राभिषेक पूजा से दूर होते हैं नवग्रह दोष, जानिए विधि, मंत्र सहित संपूर्ण जानकारी

शिव रुद्राभिषेक पूजा से दूर होते हैं नवग्रह दोष, जानिए  विधि, मंत्र सहित संपूर्ण जानकारी

सदियों से इतिहासकारों और भक्तों ने भगवान शिव की छवि को भिन्न भिन्न प्रकार से हमारे सामने प्रस्तुत किया है। भस्म में रमा शरीर, बाघ की खाल, सिर पर अर्धचंद्र, गले में सर्प, तीसरी आंख, उलझे हुए बाल, बालों से बहने वाली गंगा नदी, एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरू, तांडव नृत्य और कभी – कभी अखंड समाधि में लीन योग। उनकी पूजा का विशेष विधान है। रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे आसान उपाय है।

शिव को सही मायने में समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि शिव तीन चीजों तक सीमित नहीं हैं नाम, रूप और समय। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि शिव किसी स्थान पर या आकाश में ऊपर बैठे व्यक्ति नहीं हैं। शिव जीवन और गति के साथ शरीर का प्रतिनिधित्व करते हैं। शिव जीवन है, शिव जीवन की क्षमता है, शिव सर्वव्यापी है, सार्वभौमिक आत्मा या चेतना भी है। इस शिव तत्व को महसूस करने से आनंद की प्राप्ति होती है। आइए शिव की महीमा और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रुद्राभिषेक की चर्चा करें।


रुद्राभिषेक के लाभ (rudrabhishek ke laabh)

रुद्राभिषेक एक प्राचीन शास्त्रीय विधा है जिसे आकाशीय की ध्वनि के नाम से भी जाना जाता है। जब प्राचीन ऋषि – मुनि ध्यान में बैठे, तो उन्होंने सुना, और जो उन्होंने सुना, वे दूसरे लोगों तक पहुंचाया। रुद्राभिषेक का प्रभाव यह है कि यह सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है और नकारात्मक वाइब्स को दूर करता है। जब रुद्राभिषेक होता है तो प्रकृति फलती – फूलती है, प्रकृति हर्षित और प्रसन्न होती है। रुद्राभिषेक की मुख्य बात कंपन है। रुद्राभिषेक के दौरान उच्चारित मंत्रों का कंपन आपके और आपके परिवार के लिए एक सकारात्मक कवच तैयार करने का कार्य करता है। रुद्राभिषेक के कई तरह के लाभ हो सकते हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है, शिव का आशीर्वाद। वैसे तो आप रुद्राभिषेक के माध्यम से घर परिवार की समस्या, विवाह बाधा, जमीन जायदाद, शत्रूओं पर विजय सहित अन्य कई प्रकार के लाभ प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन किसी खुशी या बिना किसी उद्देश्य के किया गया रुद्राभिषेक अधिक फलदायी माना गया है। नीचे रुद्राभिषेक के फयदों का उल्लेख किया गया है।

  1. यह धन और सद्भाव लाता है।
  2. नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और बुरे कर्मों को दूर कर आत्मा को शुद्ध करता है।
  3. बुराइयों से बचाता है और मुश्किलों से निपटने की ताकत देता है।
  4. यह किसी की कुंडली में विभिन्न दोषों जैसे राहु दोष, श्रापित दोष आदि के बुरे प्रभावों को भी समाप्त कर सकता है।

रुद्राभिषेक के प्रकार (rudrabhishek ke prakar)

शिव लिंग पर जल चढ़ाने की प्रक्रिया को ही अभिषेक कहा जाता है। वेद मंत्रों के जाप के साथ शिव लिंग पर निरंतर जल चढ़ाने की विधि ही रुद्र अभिषेक के नाम से जानी जाती है। रुद्राभिषेक के प्रकार कई तरह के होते हैं। आइए रुद्राभिषेक के प्रकारों के बारे में अधिक जानें।

रुद्राभिषेक - जल

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जल अभिषेक से भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ ही हर मनोकामना पूरी होती हैं।

रुद्राभिषेक - दूध

दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से व्यक्ति को दीर्घायु प्राप्त होती है।

रुद्राभिषेक - शहद

शहद से शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्त को अपना जीवन स्वतंत्र रूप से और खुशी से जीने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शहद से अभिषेक अपको अपने जीवन की सभी परेशानियों और समस्याओं से मुक्त कर सकता है।

रुद्राभिषेक -पंचामृत

पंचामृत में 5 अलग अलग वस्तुओं जैसे दूध, दही, मिश्री, शहद और घी को एक साथ मिलाया जाता है। ये 5 वस्तुएं मिलकर पंचामृत बनाती हैं। पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने पर भक्त को धन और सफलता प्राप्त होती है।

रुद्राभिषेक - घी

घी से रुद्राभिषेक करने पर आपको बीमारी या शारीरिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

रुद्राभिषेक - दही

दही से रुद्राभिषेक उन लोगों के लिए उपयोगी होता है, जो संतान की चाह रखते हैं।


रुद्राभिषेक कैसे करें (rudrabhishek kaise karen)

यदि आप खुद रुद्राभिषेक पूजा करना चाहते हैं तो शिव लिंगम को पहले वैदिक मंत्र रुद्र सूक्त के निरंतर जाप के साथ – साथ पानी से अभिषेक करें, जिसे शिव रुद्राभिषेक मंत्र के रूप में जाना जाता है। गाय का दूध, नारियल पानी, चावल, पिसी चीनी, घी, दही, शहद, गन्ने का रस आदि अन्य वस्तुओं को एक साथ मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। वैसे तो वैदिक साधक रुद्राभिषेक करते समय सुबह लक्ष्मी गणेश पूजा से शुरूआत करते हैं। इसके बाद रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए उपरोक्त वस्तुओं का प्रयोग कर पूरे दिन शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। बाद में, शिवलिंग को सजाने के लिए विशेष रूप से कमल के फूलों का उपयोग किया जाता है और फूलों के अलावा, बिल्व पत्र के पेड़ की पत्तियों को भी सजावट के लिए उपयोग किया जाता है। इन सभी अनुष्ठानों के बाद, अंत में 108 दीयों की आरती की जाती है और पूजा में शामिल होने वाले भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। रुद्राभिषेक की पूजा विधि या रुद्राभिषेक करने के तरीकों की बात करें तो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास समय की कमी है। यदि आप भी रुद्राभिषेक करना या किसी के नाम से करवाना चाहते हैं तो सबसे अच्छा उपाय है, ऑनलाइन रुद्राभिषेक पूजा! आज ही बुक करें।


रुद्राभिषेक की सामग्री (rudrabhishek ki samagri)

आइए रुद्राभिषेक में उपयोग होने वाली चीजों के बारे में जानें।

  • कर्पूर -1 पैकेट
  • चंदन पेस्ट -1 पैकेट
  • एक पैकेट धूप
  • 2 फूल माला
  • 25 बेताल नट या पत्तियां
  • 4 फूलों के गुच्छा
  • 10 नारियल
  • 12 केले या 5 अन्य प्रकार के फल
  • तौलिया या 2 गज कपड़ा
  • 2 माला
  • शहद – 1 छोटी बोतल
  • 2 कप दही
  • 2 लीटर दूध

रुद्राभिषेक कब करें (rudrabhishek kab karen)

हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम से पहले शुभ मुहूर्त देखने का चलन है। मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए किसी भी कार्य के सिद्ध होने की संभावना अधिक होती है। आइए जानें शिव का रुद्राभिषेक करने का सबसे अच्छा समय कब होता है।

  • रुद्राभिषेक करने से पहले आपको शिव जी की उपस्थिति देखना चाहिए।
  • शिव जी का निवास देखे बिना रुद्राभिषेक न करें।
  • शिव जी का निवास तभी देखें जब मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक किया जा रहा हो।
  • हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी तिथि को शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं।
  • हर माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या के दिन भी शिव जी मां गौरी के साथ रहते है।
  • कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को महादेव कैलाश पर निवास करते हैं।
  • शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को भी महादेव कैलाश पर ही रहते हैं।
  • कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को शिव जी नंदी पर सवार होकर पूरा विश्व भ्रमण करते हैं।
  • शुक्ल पक्ष की षष्ठी को भी शिव जी विश्व भ्रमण पर होते हैं।

रुद्राभिषेक के लिए इन तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है।


रुद्राभिषेक से ग्रह दोष निवारण (rudrabhishek se grah dosh nivaran)

वैसे तो भगवान के नाम का जाप करने से ही नवग्रह दोष निवारण हो जाता है। लेकिन फिर भी यदि अपनी कुंडली के अनुसार किसी ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह से राशि के अनुसार ग्रह दोष निवारण बेहद सटीक और कारगर माने जाते है। आज ही अपनी कुंडली के ग्रह दोषों से छुटकारा पाएं और सुखी जीवन जिएं।

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नीचे हमारे ज्योतिष विशेषज्ञों ने ग्रह दोष निवारण के लिए कुछ घरेलू उपाए सुझाएं है। अधिक जटिल समस्याओं के लिए आज ही ज्योतिषाचार्य से बात करें

  • कुंडली में सूर्य दोष की स्थिति में शिवरात्रि के दिन शिवजी का पवित्र नदी के जल से अभिषेक करें।
  • चंद्र दोष की स्थिति में शिवरात्रि के दिन कच्चे दूध में काले तिल डालकर भगवान का दुग्धाभिषेक करें।
  • मंगल दोष की स्थिति में गिलोय बूटी के रस के भगवान का अभिषेक करें।
  • बुध दोष होने पर आपको शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर दही और मिश्री अर्पित करने चाहिए।
  • गुरु की स्थिति में कच्चे दूध में हल्दी मिलाकर भगवान का दुग्धाभिषेक करें।
  • शुक्र दोष होने पर पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करें।
  • शनि दोष की स्थिति में शिवरात्रि पर भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेक करें।

रुद्राभिषेक के मंत्र (rudrabhishek ke mantra)

रुद्राभिषेक भगवान शिव की सबसे प्रभावी पूजा आराधना में से एक है। रुद्राभिषेक के दौरान शिव लिंग का पवित्र जल, दूध, रस, दही, शहद या पंचामृत जैसी चीजों से अभिषेक किया जाता है। जब शिवलिंग का अभिषेक किया जा रहा होता है तब मंत्रों का उच्च स्वर में उच्चारण किया जाता है। शिवलिंग का अभिषेक करने के साथ इन मंत्रों का जाप वातावरण में मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मकताओं को नष्ट कर सकारात्मक तरंगों का निर्माण करता है। आइए रुद्राभिषेक के दौरान पढ़े जाने वाले कुछ मंत्रों के बारे में जानें।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

वांछित फल की प्राप्ति के लिए

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥

अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।

अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।

निरोगी और स्वस्थ्य जीवन के लिए

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।

भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।

कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।

सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

इसका करें पाठ नमामिशमीशान निर्वाण रूपं।

विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेद स्वरूपं।।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।

चिदाकाश माकाश वासं भजेयम।।

निराकार मोंकार मूलं तुरीयं।

गिराज्ञान गोतीत मीशं गिरीशं।।

करालं महाकाल कालं कृपालं।

गुणागार संसार पारं नतोहं।।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूति कोटि प्रभा श्री शरीरं।।

स्फुरंमौली कल्लो लीनिचार गंगा।

लसद्भाल बालेन्दु कंठे भुजंगा।।

चलत्कुण्डलं भू सुनेत्रं विशालं।

प्रसन्नाननम नीलकंठं दयालं।।

म्रिगाधीश चर्माम्बरम मुंडमालं।

प्रियम कंकरम सर्व नाथं भजामि।।

प्रचंद्म प्रकिष्ट्म प्रगल्भम परेशं।

अखंडम अजम भानु कोटि प्रकाशम।।

त्रयः शूल निर्मूलनम शूलपाणीम।

भजेयम भवानी पतिम भावगम्यं।।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।

सदा सज्ज्नानंद दाता पुरारी।।

चिदानंद संदोह मोहापहारी।

प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।

न यावत उमानाथ पादार विन्दम।

भजंतीह लोके परे वा नाराणं।।

न तावत सुखं शान्ति संताप नाशं।

प्रभो पाहि आपन्न मामीश शम्भो


समापन

वास्तव में, रुद्राभिषेक पूजा भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी तरीका है। और जब स्वयं महादेव आपसे प्रसन्न हैं, तो फिर कौन सी समस्या आपको परेशान कर सकती है?



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