प्लॉट खरीदते समय वास्तु (Plot Vastu tips) का रखें ध्यान

अगर आप अपने सपनों का घर बनाना चाहते हैं तो आपको वास्तु टिप्स को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन पर विचार किया जाना बहुत ही जरूरी है। संभव है कि बाकी कार्यों के आगे आप वास्तु को प्राथमिकता पर न रखें, लेकिन यह याद रखना बहुत जरूरी है कि सही वास्तु आपके जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। यह आपके जीवन को सही दिशा में ले जा सकता है। आपके आस पास सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है, जो स्वस्थ मन और शरीर के लिए अच्छी होती है। वास्तु की प्रक्रिया प्लॉट के चयन से शुरू हो शुरू होती है, यह एक ऐसे घर की नींव रखती है जो उस घर के निवासियों के लिए सकारात्मक ऊर्जा को न्यौता दे, अच्छी तरंगों को आमंत्रित करे। इसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। इन वास्तु नियमों की पालना आपके लिए मानसिक, शारीरिक या सामाजिक कल्याण देने वाली हो सकती है।


भूखंड का आकार

वास्तु शास्त्र के नियमों के मुताबिक प्लॉट खरीदते समय जमीन खरीदते समय जमीन के आकार को देखना जरूरी माना जाता है। त्रिकोण और अन्य जैसे अनियमित आकार वाले भूखंडों को खरीदना से बचना चाहिए। आयताकार और वर्गाकार आकार वाली संपत्तियों को वरीयता दी जानी चाहिए, जिसमें अनुपात 1:2 का हो और सभी भुजाएं 90 डिग्री पर हों। ये वास्तु की दृष्टि से अनुकूल माने जाते हैं और समृद्धि और सुख लाने वाले माने जाते हैं। चुंबकीय तरंगें समान रूप से वर्गाकार और आयताकार भूखंडों में बनाई और घिरी हुई होती हैं। यदि भूखंडों के आकार या आकार में कोई दोष होता है और ये चुंबकीय बल असमान रूप से वितरित हो जाते हैं और उस भूखंड की वास्तु ऊर्जा को प्रभावित करते हैं। इसका सीधे तौर पर असर हमारे जीवन पर पड़ता है।


ऐसे आकार से बचना चाहिए

  • गोल आकार
  • अंडाकार आकार का प्लॉट
  • अर्ध-गोलाकार आकार का प्लॉट

ये होते हैं अनुकूल आकार

  • एक भूखंड के सबसे अनुकूल रूपों में से एक गोमुख भूखंड। इस तरह के भूखंड आगे के भीतर संकरे और पीछे के भीतर चौड़े होते हैं। यदि भूखंड के दक्षिण और पश्चिम की ओर सड़कें हों तो घर बनाने के लिए इन्हें बहुत भाग्यशाली माना जाता है।
  • शेरमुखी या सिंहमुखी भूखंड आगे के हिस्से में चौड़ा और पीछे की तरफ संकरा होता है। ये केवल दुकानों आदि के लिए व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयुक्त हैं। यह अधिक अनुकूल हो जाता है यदि सड़कें भूखंड के पूर्वी और उत्तरी तरफ से गुजर रही हों।
  • घरों के निर्माण के लिए हमेशा वर्गाकार या आयताकार आकार के भूखंडों का चयन करें। ये तत्वों और ऊर्जाओं की शक्तियों को संतुलित करने और रहने वालों के लिए समग्र समृद्धि को आमंत्रित करने के लिए जाने जाते हैं।

सड़क

  • अपने प्लॉट से जुडऩे वाली सड़कों को समझना जरूरी है।
  • प्लॉट की तरफ आने वाली सड़क पूर्व से होती है और भूखंड के उत्तर-पूर्व भाग से टकराती है तो यह बहुत अच्छा माना जाता है।
  • जब प्लॉट की तरफ आने वाली सड़क उत्तर से हो और भूखंड के उत्तर पूर्व भाग से टकराती है, तो यह न तो खराब होती है और न ही अच्छी। इसे ठीक ठाक स्थिति माना जाता है।
  • वहीं, जब आने वाली सड़क पश्चिम से हो और भूखंड के उत्तर-पश्चिम भाग पर जाकर मिलती है।
  • इसके साथ ही जब आने वाली सड़क दक्षिण से होती है और भूखंड के दक्षिण-पूर्व भाग से टकराती है, तो साइट अनुकूल नहीं होती है।

जमीन या प्लाट खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • किसी भी भूखंड या प्लॉट को खरीदते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भूखंड के पास कोई मंदिर मौजूद नहीं है। उनके बीच उचित दूरी होनी चाहिए क्योंकि मंदिर अनुयायियों की नकारात्मक ऊर्जाओं को वहन करता है।
  • प्लॉट के आस पास बिजली के खंभे भी देख लें। ईशान कोण में बिजली का खंभा एक गंभीर वास्तु दोष हो सकता है क्योंकि यह दिशा जल का स्थान होती है। ऐसे में इस जगह पानी बिजली का खंभा होना गंभीर दोष माना जा सकता है। यह खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा बिजली का खंभा अगर दक्षिण दिशा में हो तो कोई समस्या नहीं होता है।
  • सुनिश्चित करें कि आपका प्लॉट कब्रिस्तान या अस्पताल के पास नहीं है।
  • यह भी देख लें कि आपके प्लॉट के पास कोई औद्योगिक भवन तो नहीं है।
  • प्लॉट को दो बड़े भवनों के बीच में नहीं होना चाहिए।
  • भूखंड के दक्षिण में नदी और भूखंड के उत्तर में पहाड़ शुभ नहीं माने जाते हैं।
  • हरे-भरे पेड़ पौधों की हरियाली के बीच अगर भूखंड और मकान हों तो वे शुभ माने जाते हैं। –
  • अगर भूखंड के चारों तरफ सड़क हों, तो ऐसे भूखंड व्यावसायिक उद्देश्यों के लिहाज से सही माने जाते हैं।

प्लॉट में दोष दूर करने के लिए वास्तु टिप्स

  • एक अनियमित आकार के भूखंड को दो नियमित भूखंडों में विभाजित कर सकते हैं, जिनमें प्रत्येक भाग के लिए अलग-अलग परिसर की दीवार बनाई जाएं।
  • आकार को नियमित करने के बाद अगर कोई एक हिस्सा बाहर निकलता है, तो उसमें दक्षिण-पश्चिम की ओर एक स्टोर या गैरेज बना सकते हैं। उत्तर पूर्व दिशा में एक छोटा सा मंदिर। उत्तर, पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में उद्यान बना जा सकता है।
  • विस्तृत भूखंडों के दोष को कम करने करने के लिए वास्तु पिरामिड का उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए दक्षिण-पश्चिम विस्तार के लिए एक सीसा पिरामिड, उत्तर-पश्चिम विस्तार के लिए पीतल पिरामिड स्ट्रिप्स और दक्षिण-पूर्व विस्तार के लिए तांबे की पट्टियां लगाई जा सकती है।
  • यदि प्लॉट की मिट्टी में सडऩे जैसी गंघ आती है या भूमि बड़े पत्थरों, कीड़ों, कांटों, हड्डियों या अन्य अशुभ पदार्थों से लदी है तो भूखंड को लेने का मन त्याग दें। मृदा परीक्षण के लिए आप किसी वास्तु विशेषज्ञ की सेवाएं भी ले सकते हैं।
  • यदि खुदाई करते समय गाय के सींग, शंख, कछुआ, तांबा, बजरी, ईंट आदि जैसी चीजें प्राप्त हों तो भूखंड शुभ माना जाता है। यदि भूमि में कौड़ी, टाइलें, फटे कपड़े, कोयला, लोहा, सीसा, सोना, रत्न और पेट्रोलियम आदि मिलता है ऐसे भूखंडों से बचना बेहतर है।
  • किसी भी उद्देश्य के लिए भवन निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता होती है। किसी भी जमीन को खरीदते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए जमीन किस उद्देश्य के लिए ली जा रही है और इससे पूर्व किस उद्देश्य से ली गई थी। व्यावसायिक तौर पर जमीन एक ही जैसे उद्देश्य के लिए खरीदी या बेची नहीं जानी चाहिए। यानी पहले अगर उसी कार्य के लिए ली गई थी, जिसके लिए अब ली जा रही है तो ऐसे भूखंड से बचना बेहतर होता है। ऐसी भूमि को खरीदना बेहतर होता है जो खेती के लिए काम में ली जाती रही हो, उपजाऊ हो।

मिट्टी का भी रखें ध्यान

कई तरह की मिट्टी होती है, यह अलग अलग रंगों की होती है। इनका रंग लाल, भूरा, गहरा भूरा, सफेद, लाल, पीला, काला आदि होता है। आम तौर पर मिट्टी जो खेती के लिए सही रहती है वह लाल, ईंट लाल, भूरी, पीली मिट्टी आदि होती है। यही भवन निर्माण के लिए भी उपयुक्त है। जबकि काली और चिकनी मिट्टी, जो खेती के लिए आदर्श नहीं होती है, यही मकानों के लिए भी सही नहीं रहती। इनमें पानी बरकरार रहता है, जो दीवारों में नमी या सीलन का कारण बन सकता है। यही कारण है कि काली और चिकनी मिट्टी वाली जगह से बचने की सलाह दी जाती है।

इससे बचना ही सबसे बेहतर उपाय है, अगर इसे खरीदते हैं तो इसके लिए बेहद मजबूत नींव और वॉटरप्रूफिंग की आवश्यकता होगी, इससे लागत बढ़ेगी। निर्माण के लिए अगर जमीन खरीदना चाहते हैं चट्टानी भूमि को खरीदने से बचे, बहुत अधिक चट्टानों और कांटेदार वृक्षों वाली भूमि को उचित नहीं माना जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चट्टानी भूमि को समतल करने के लिए चट्टानों को हटाया जाता है, इसमें अच्छा खासा पैसा खर्च होता है। यह खर्च अप्रत्याशित होता है। जिस भूमि में बहुत सारे कीड़े हों, उसे खरीदने से भी बचना चाहए। यह एक संकेत हो सकता है कि मिट्टी असाधारण रूप से ढीली है, उसमें पोल है, ऐसे में वहां इमारत बनाना सही फैसला साबित नहीं होगा।


कैसे करें मिट्टी की जांच

आप चाहें तो मिट्टी से जुड़े कुछ परीक्षण कर सकते हैं, जो अनुकूल भूखंड चुनने में आपकी मदद कर सकते हैैं।

  • इसके लिए प्लॉट के बीचों-बीच 1.5 फीट गहरा गड्ढा खोदें। इस भूखंड के बीच में 1.5 फीट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें पानी भर दें। अगर कुछ मिनट बाद भी गड्ढे में पानी का स्तर वही रहता है या 10 फीसदी कम हो जाता है, तो प्लॉट मजबूत माना जाता है। यदि स्तर 50 प्रतिशत नीचे चला जाता है, तो भूखंड को औसत माना जाता है। यदि स्तर 60 प्रतिशत नीचे चला जाता है, तो भूखंड अशुभ होता है।
  • भूखंड के केंद्र में 1 मीटर व्यास वाला एक गड्ढा खोदेंं। इसे पहले से खोदी गई मिट्टी से फिर से भरें। यदि गड्ढों को भरने के बाद कुछ मिट्टी बची है, तो खरीदने का विचार बना सकते हैं।
  • प्लॉट से मिट्टी को अपनी मुट्ठी में रख लें। यदि कुछ मिनटों के बाद, मिट्टी जल्दी से हाथ से निकल जाती है, तो ऐसे भूखंड को खरीदने से बचें। वहीं अगर आपकी हथेली में मिट्टी चिपकी हुई है तो इस जमीन को खरीद सकता है।


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