क्यों है New Chancellor of Germany ‘Olaf Scholz’ के लिए आने वाला समय मुश्किल !

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26 सितंबर 2021 को जर्मनी में हुए चुनाव में 63 वर्षीय Olaf Scholz की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी ने मामूली अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद से वे ग्रीन पार्टी और फ्री डेमोक्रेट्स पार्टी के साथ गठबंधन सरकार को लेकर चर्चा कर रहे थे। 7 दिसंबर 2021 को इन तीनों ही पार्टी की सहमति से Olaf Scholz को पूर्व चांसलर Angela Merkel के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया और अब से वह New Chancellor of Germany कहलाएंगे। इसके पहले Olaf कैबिनेट में वित्त मंत्री के तौर पर भी पदस्थ रह चुके हैं। इस बड़े बदलाव में इनके ग्रहों का भी बहुत बड़ा हाथ है, लेकिन देश के प्रमुख के तौर पर उनके लिए कैसा होगा आगे का सफर, जानिए उनकी सूर्य कुंडली से-

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Olaf Scholz को विवादों में रखेंगे ये दो ग्रह

14 जून 1958 को जन्मे Olaf Scholz मेष राशि के जातक है, इसलिए वे नेतृत्व अच्छा कर लेते हैं। इनकी सूर्य कुंडली में चंद्र-केतु का ग्रहण दोष है। ग्रहण दोष के कारण व्यक्ति को उसके किए हुए काम का यश मिलना मुश्किल हो जाता है। वह जो भी काम करता है, उसमें सफलता के चांस भी कम रहते हैं। Olaf Scholz की कुंडली में सूर्य और शनि भी पूर्ण दृष्टि में है। सूर्य राजनीति में सफलता के लिए प्रमुख ग्रह माना जाता है। इस पर शनि की दृष्टि के कारण व्यक्ति हमेशा विवादों में रहता है। उनके लिए आने वाला समय थोड़ा मुश्किल होगा। जर्मनी में जिनके सहयोग से वे चांसलर बन रहे हैं, उनमें भी आपस में विवाद हो सकते हैं, क्योंकि अप्रेल 2022 के बाद राहु और केतु का ट्रांजिट उनके लिए नेगेटिव रहेगा। साथ ही यह दुनिया के बड़े नेताओं के साथ भी उनके तालमेल में मुश्किल डाल सकते हैं।

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Olaf Scholz को मिल रही बधाइयां

आगे Olaf Scholz का दुनिया के नेताओं से कैसा भी संबंध रहें, लेकिन फिलहाल उनके New Chancellor of Germany बनने पर विश्व के नेता उन्हें बधाई दे रहे हैं। हाल ही में हुए इस बदलाव पर चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ ही भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी Olaf Scholz को बधाई दी है। यह जर्मनी के साथ भारत के और भी बेहतर संबंधों की शुरुआत भी मानी जा सकती है। Olaf Scholz का चुनाव जर्मनी का पहला त्रिपक्षीय गठबंधन होगा। इस गठबंधन में संप्रभु यूरोप का महत्व, फ्रांस के साथ मित्रता और अमेरिका के साथ साझेदारी जैसे मुद्दे सरकार की विदेश नीति के प्रमुख आधार होंगे।

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