क्यों है जीवन में गणेश ज्योतिष (Ganesha Astrology)आवश्यक


कौन है भगवान गणेश

भगवान गणेश के बारे बताने के लिए किन शब्दों का प्रयोग करू समझ नहीं आ रहा। हर घर परिवार में में गणेश जी की पूजा की जाती है, क्योकिं इनको प्रथम पूज्य माना जाता है। विघ्नहर्ता कहे जाने वाले भगवान गणेश सभी के जीवन से परेशानी दूर करते हैं। जब भी कोई किसी भी चीज की नई शुरुआत करता है, तो सबसे पहले गणेश जी को याद किया जाता है। चाहे वो नया घर हो, नया बिजनेस हो या कहीं घूमने जाना हो। गणेश जी को बुद्धि और ज्ञान के देवता भी माना जाता है। गणेश जी की दो पत्नियां रिद्धि-सिद्धि है। ऐसा माना जाता है, जहाँ पर भी भगवान गणेश की पूजा होती है। उस घर में रिद्धि सिद्धि हमेशा रहती है।

भगवान गणेश के जीवन से जुड़ीं हुई कई महान कथाएँ समय-समय पर लोगों की सुनाई जाती है। उसी में से एक कथा है महाभारत को जब भगवान के द्वारा लिखा गया। ऐसा माना जाता है की वेद व्यास जी ने जब महाभारत को देखा, तो उनके मन में इसे लिखने का मन हुआ। तो वे पहुच गये बुद्धि के देव भगवान गणेश के पास। वेदव्यास जी ने बोला प्रभु मैंने जो महाभारत में देखा, उसे लिखवाना चाहता हूँ। गणेश जी महाभारत लिखने के लिए एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि आपको बिना रुके बोलना होगा। जहां आप बोलना बंद करेंगे, तो मैं लिखना रोक दूंगा और फिर दोबारा नहीं लिखूंगा। वेदव्यास जी ने बोला ठीक है। फिर क्या था, वेदव्यास जी ने बोलना शुरू किया और गणेश जी ने लिखना, यह प्रक्रिया लगातार तीन वर्ष तक चलती रही। तब जाकर महाभारत को लिख पाई। इससे हमें यह भी पता चलता है की भगवान गणेश शास्त्रों के भी महान ज्ञाता थे।

अब हम आपको ले चलते हैं, गणेशजी का जन्म किस प्रकार हुआ, इस कथा की ओर। इसके दो मत है। एक मत अनुसार पार्वती जी ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी को बनाया था, फिर उस पुतले में जान डाल दी गई, वहीं दूसरी ओर ऐसा माना जाता है की भगवान विष्णु ने वरदान में संतान दी थी।

एक समय की बात है, भगवान शिव और पार्वती कैलाश पर्वत पर आराम से रह रहे थे। कुछ समय बाद भगवान शिव ध्यान करने के लिए कैलाश से दूर जाते है। तब पार्वती जी स्वयं को अकेला महसूस करती। तब, पार्वती जी ने संतान के लिए विष्णु जी से प्रार्थना करने लगीं। विष्णु जी ने उन्हें एक सुंदर संतान प्रदान की। जिनका नाम था गणेश। गणपति जी की खूबसूरती देखते ही बनती थी, सभी देवी देवता कैलाश पहुंच कर गणेशजी को आशीर्वाद देने लगे। परंतु उनके चाचा शनि देव नहीं पहुंच पाए। जब शनी देव का आशीर्वाद उन्हें नहीं मिला। तो उनकी कुंडली में दोष पैदा हो गया। ऐसा माना जाता है की गणेश जी का जो सिर धड़ से अलग हुआ था। उसकी वजह शनि देव ही थे। यह दोष सत्य भी सिद्ध हो गया। जब शिवजी ध्यान करके वापिस लौटे, तो गणेश जी ने उन्हें पार्वती जी के पास नहीं जाने दिया। भगवान शिव इस बात से अनजान थे की गणेशजी उन्हीं के पुत्र हैं, और अपने त्रिशूल से गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया।


कैसे मिला गणपति जी को हाथी का सिर

जब शोर सुनकर पार्वती जी बाहर आकर देखती है, तो गणेश जी का सिर धड़ से अलग हो गया था। वे रोते हुए शिवजी से कहती है कि प्रभु ये मेरा पुत्र था, जिसे आपने मार दिया। मुझे अपना जीवित पुत्र चाहिए। शिवजी बोले ऐसा नहीं हो सकता। पर पार्वती जी उनकी एक बात भी सुनने को तैयार नहीं थी। तब, विष्णु जी को एक उपाय सूझा। उन्हे कैलाश पर्वत की घाटी पर एक मृत हाथी दिखाई दिया। तब विष्णु जी ने उस हाथी का सिर काट कर गणेशजी के शरीर से जोड़ दिया। यह सब देख कर पार्वती जी काफी डर चुकी थी। पार्वती जी की चिंता दूर हो इसलिए, भगवान शिव के द्वारा गणेश जी को वरदान मिला- जब कहीं भी कोई नया काम शुरू होगा, सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी।

गणेश जी की कृपा सदैव उन पर रहती है, जो नया शुरू करने से पहले उनको याद करके पूजा पाठ करते हैं। गणेश जी और उनकी ज्योतिष शक्ति बहुत ही महत्वपूर्ण है। गणेश ज्योतिष से हम जान सकते हैं, किस प्रकार जीवन में सब कुछ आसानी से हासिल किया जा सकता है।
क्या कहती है आपकी कुंडली,  आज ही हमारे ज्योतिषियों से संपर्क करें। आपका पहला कॉल बिल्कुल FREE!


गणेश ज्योतिष की आवश्यकता

जैसे कि पहले बताया जा चुका है, श्री गणेश जीवन हैं, और ज्योतिष हमारे जीवन का आईना। ज्योतिष के द्वारा श्री गणेश हमारा मार्गदर्शन करते हैं, ताकि हम जीवन में कभी ना हारें। प्रथम पूज्य होने के कारण सभी ग्रह उनके अनुसार काम करते हैं, और उनके आदेश का पालन करते हैं, इसलिए हमें गणेश ज्योतिष को जीवन का हिस्सा बना लेना चाहिए।

हिंदू पुराणों के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती जी के दो पुत्र हैं, गणेश और कार्तिकेय। कार्तिकेय गणेश के बड़े भाई हैं, जिन्हें देवो के सेनापति के रूप में जाना जाता है। आज के समय में श्री गणेश सबसे ज्यादा पूजे जाने देव हैं।


गणेश ज्योतिष और उसके फायदे

जो व्यक्ति रोज गणेश का स्मरण करता है, तो उनकी कृपा से हम कला, ज्ञान, धन, समृद्धि, बुद्धि आदि के क्षेत्र में जीत हासिल करते हैं। भगवान गणेश को हर समस्या को दूर करने वाला माना गया है। वे सफलता, समृद्धि, धन, बुद्धि, ज्ञान, शिक्षा, कला, साहित्य आदि के प्रतीक कहे गए हैं। गणेशजी के अनेक नाम हैं जैसे, एकदंत, वक्रतुंड, विनायक, गणपती, शुभम, कपिल, तरुण इत्यादि।
गणेश ज्योतिष द्वारा आप भविष्य में होने वाली घटना का अनुमान भी लगा सकते हैं, उसका उपचार भी जान सकते, और जीवन में चल रही समस्या किन कारणों से हो रही है, वो भी पता कर सकते हैं। ज्योतिष द्वारा की जाने वाली भविष्यवाणियां और उनके उपाय के बारे में कुंडली के ग्रहों के द्वारा जान सकते हैं। ज्योतिषीय विवेचना लग्न कुंडली से किया जाता है, क्योंकि व्यक्ति की कुंडली में अलग होती है।


गणेश ज्योतिष से किसे विवेचन करवाना चाहिए

जो व्यक्ति अपना भविष्य जानने की जिज्ञासा रखते हैं, या फिर जिन्हे अपने जीवन में चल रही समस्या का समाधान चाहिए। जिन व्यक्तियों का समय खराब चल रहा है, उन्हे ऐसा लगता है किसी ने उनके ऊपर या परिवार के ऊपर कोई जादू-टोन कर दिया है। इसके अलावा जिन्हे यह महसूस होता है, उनके साथ बुरी घटनाएं ही होती है। उनके लिए नसीहत यही है की वे इस इस विद्या का लाभ लें। अपने जीवन की सारी परेशानियों को दूर करें। जिन्हे धन की हानि हो रही हो, या ऐसे व्यक्ति जो कोई भी कार्य करते हैं, उसमें कोई सफलता नहीं, नौकरी नहीं, मन की एकाग्रता में कमी आदि समस्यों से पीड़ित हो। ऐसे लोगों को सही समय पर पेशेवर ज्योतिष से सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।
अपनी समय और समस्या के अनुसार ज्योतिष के विशेषज्ञ से सलाह लेने हेतु mypandit ऐप अभी डाउनलोड करें, और ज्योतिषियों से बात करें केवल १ रुपए प्रति मिनट के शुल्क पर।

क्या आप नए कार्य की शुरुआत करते समय गणेश जी का स्मरण करते हैं? अगर नहीं, तो इस बात को समझ लीजिए। जब भी नया व्यापार या जॉब का आरंभ करें। सबसे पहले गणेश जी का आशीर्वाद जरुर लें, साथ ही शुभ समय पर नए काम को करें। तब जा कर आपको उसमे सफलता मिलेगी।

क्या आप यह जिज्ञासा रखते हैं, कब और कहां अपने व्यापार की शुरुआत करें। तो पाइए हमारी FREE जन्मपत्री रिपोर्ट


गणपति ज्योतिष और उसका महत्व

ज्योतिष के अनुसार, गणेश जी का केतु के साथ गहरा सम्बन्ध है। सूर्य, पृथ्वी और चंद्र के बीच एक सामान्य बिंदु है। जिसे नोड्स कहा जाता है। इन नोड्स को राहु और केतु की संज्ञा प्रदान है। सौर मंडल में इन्हें ग्रहों की श्रेणी में नही माना जाता, फिर भी ज्योतिष में इन दोनों को स्थान दिया गया है। ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों से गणना की जाती है, और राहु केतु उनमें से एक हैं। भगवान गणेश, राहु और केतु तीनो में समानता है, की तीनों पर हमला हुआ और तीनों के धड़ अलग कर दिए गए। इसके साथ ही बुध ग्रह को भी गणेश जी से जोड़ा जाता है। बुध देव को बुद्धि और प्रतिभा देने वाला ग्रह माना गया है। बृहस्पति धन देने वाले ग्रह है, इनका भी गहरा संबंध गणेशजी से है, इसलिए कहा जाता है रोज गणेशजी की आराधना करनी चाहिए।


दुर्भाग्य दूर करने हेतु गणेश ज्योतिष के उपाय

दुर्भाग्य दूर करने के लिए ज्योतिष में कई उपाय हैं। उनमें से सबसे अच्छा उपाय है गणेश जी की रोज पूजा करना। भगवान गणेश की पूजा से सभी कमजोर ग्रह को बल मिलता है, और आप की किस्मत आपका साथ देने लगती है। पूर्णिमा से चौथे दिन गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन सिर्फ और सिर्फ गणेशजी को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा करने से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। सप्ताह में मंगलवार का दिन गणेश जी की पूजा के लिए अच्छा माना जाता है।


अंत में

श्री गणेश की पूजा करना जीवन का हिस्सा बना लें, वे आप की सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाले देव हैं। आप वेदोक्त पद्घति से गणेश पूजा करवाकर गणेशजी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। वेदोक्त पद्धति से गणेश पूजा करवाने के लिए यहां क्लिक करें।