सोमवती अमावस्या व्रत 2022: महत्व, कथा और अनुष्ठान

हर महीने में एक बार अमावस्या आती है, और यह शुक्ल पक्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन आकाश में चंद्रमा नहीं दिखाई देता है, इसलिए इसे ‘नो मून डे’ भी कहा जाता है। यह दिन आपके जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसके नकारात्मक प्रभावों से छुटकारा पाने के लिए लोग उपवास और अनुष्ठान करते हैं। इस दिन, भक्त पवित्र स्नान करने के लिए गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी के घाट पर जाते हैं। यह दिन कभी-कभार सोमवार को पड़ता है, तो इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। आइए सोमवती अमावस्या के बारे में विस्तृत रूप से जानते हैं…

सोमवती अमावस्या का महत्व

सोमवती अमावस्या एक शुभ दिन है, क्योंकि इसे भगवान शिव से भी जोड़ा गया है। इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। साथ ही इस विशेष दिन पर लोग अपने पूर्वजों से प्रार्थना भी करते हैं। इस प्रकार, सोमवती अमावस्या के शुभ दिन पर पितृ पूजा की जाती है। इसके अलावा, लोग पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाने के बाद मोक्ष की कामना करते हैं।

महाभारत महाकाव्य में भीष्म पितामह और युधिष्ठिर के बीच के वर्तालाप में भी सोमवती अमावस्या के महत्व का व्याख्यान किया गया है। महाभारत कथा के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर कुरु-पांडव परंपरा के भाग्य को लेकर चिंतित थे। अपनी यह चिंता लेकर वह भीष्म पितामाह के पास गए, और उनसे अपनी चिंता व्यक्त की। भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को सलाह दी कि वह अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सोमवती अमावस्या व्रत रखें। पितामाह के कहने पर युधिष्ठिर ने अमावस्या का व्रत रखा, जिसके परिणाम स्वरूप उनकी सारी चिंताओं का हल उनको मिल गया।

सोमवती अमावस्या समय

सोमवती अमावस्या 2022 30 मई, 2022, सोमवार
तिथि प्रारम्भ 29 मई, 02:54 PM
तिथि समाप्त 30 मई, 04:59 PM

सोमवती अमावस्या की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण की एक बेटी थी। वह बहुत ही सुंदर, सुशील और सर्वगुण संपन्न थी। लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन उस ब्राह्मण ने अपनी पुत्री की कुंडली एक साधु महाराज को दिखाई। साधु महाराज ने कहा कि इस कन्या के जीवन में विधवा योग है। इस बात से उस लड़की के मां-बाप परेशान हो गए, और उन्होंने साधू महाराज से इसका उपाय पूछा कि महाराज ऐसा क्या करें, जिससे इसके जीवन से यह दोष दूर हो जाए। साधू ने कहा कि पास ही के गांव में सोना नाम की एक धोबिन अपने बेटे और बहू के साथ रहती है। वह संस्कारों से संपन्न, पति परायण और निष्ठावान है। यदि यह कन्या उसकी सेवा करें, और इस कन्या के विवाह में वह महिला अपनी मांग का सिंदूर लगा दें, तो इसका विधवा योग मिट सकता है। अगले दिन वह कन्या जल्दी उठकर धोबिन की सेवा करने के लिए चली गई और वहां उसके घर का सारा काम कर, उसके जागने से पहले वापस आ जाती। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा, कन्या सुबह जाती और सारा काम करके वापस लौट आती। इस बात की खबर धोबिन को नहीं हुई। एक दिन धोबिन ने अपनी बहू से कहा कि तुम तो सुबह ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता। बहू ने कहा कि मांजी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम कर लेती हैं। मैं तो देरी से जागती हूं। इसके बाद दोनों ने निगरानी करने का मन बनाया कि आखिर कौन काम करके जाता है। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या अंधेरे में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है। एक दिन वह धोबिन उस कन्या से विनती की और पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर का काम क्यों करती हैं। तब कन्या ने साधू के द्वारा बताई हुई सारी बात बता दी। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह मान गई। सोना धोबिन के पति अस्वस्थ रहते थे। उसने अपनी बहू से लौटने तक घर पर ही रहने का कहकर कन्या के साथ चली गई। इसके बाद जैसे ही धोबिन अपनी मांग का सिंदूर उस कन्या की मांग में लगाया, उसका पति मर गया। धोबिन को इस बात का पता चल गया। वह घर से निर्जल ही चली थी, ये सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा, तो उसे भंवरी देकर उसकी परिक्रमा करने के बाद ही जल ग्रहण करेगी। उस दिन सोमवती अमावस्या थी। ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी देकर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसका पति वापस जीवित हो गया। इसलिए माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

सोमवती अमावस्या व्रत करने के लाभ

अगर कोई भी व्यक्ति सोमवती अमावस्या का पालन करता है, तो उसे कई लाभ होते हैं। आइए जानते हैं…

  • जो सोमवती अमावस्या करता है, वह सभी संकटों को दूर कर सकता है और एक संपन्न जीवन प्राप्त कर सकता है।
  • सोमवार के शुभ दिन पर आप पर भगवान शिव की कृपा बनी रहेगी।
  • इस दिन व्रत रखने से आश्चर्यजनक रूप से अच्छा जीवन प्राप्त होता है।
  • निःसंतान दंपति को इस दिन रुद्राभिषेक पूजा करने से आपको अच्छी संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है।
  • व्रत रखने वाली विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए लंबी उम्र पा सकती हैं, और आपको जीवन भर शांति और सद्भाव का आशीर्वाद मिल सकता है।

निष्कर्ष

सोमवती अमावस्या व्रत का पालन करने से जीवन में सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है और साथ ही भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद भी मिलता है। जो कोई भी अपनी प्रार्थना में भगवान शिव का स्मरण करता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इसी के साथ आशा है कि भगवान शिव की कृपा से आपकी मनोकामनाएं जल्द ही पूरी होगी।