ग्यारहवें भाव में बृहस्पति (Guru in 11th House)

बृहस्पति को सबसे शुभ ग्रह के रूप में जाना जाता है। यह गुरु ग्रह के नाम से भी लोकप्रिय है। इसमें कुछ रहस्यमयी विशेषताएं मौजूद होती हैं, जिनसे जीवन की अधिकतर बाधाएं दूर हो सकती हैं। जी हां, यह बिल्कुल सच है, क्योंकि बृहस्पति एक ऐसा अकेला शक्तिशाली ग्रह है, जो आपके जीवन में अनुकूल नतीजे देने में पूरी तरह से समर्थ है। फिर भी यदि अन्य ग्रहों के साथ यह अनुकूल तरीके से नहीं जुड़ता है या फिर यदि यह किसी अशुभ ग्रह के प्रभाव में आ जाता है, तो ऐसे में जातकों को बृहस्पति से प्रत्यक्ष तौर पर उचित आशीर्वाद प्राप्त नहीं हो सकता है।

ग्यारहवें भाव में बृहस्पति की उपस्थिति को लेकर हम आपके लिए यहां एक बहुत ही शानदार ब्लॉग लेकर आए हैं। जब काम की या फिर पारिवारिक जिम्मेदारियों की बात होती है, तो बृहस्पति के उपस्थित होने की वजह से आप इन सभी चीजों के प्रति न केवल ईमानदार, बल्कि पूरी तरीके से समर्पित भी बन जाते हैं। इतना ही नहीं, आपकी आय के स्रोतों को भी बृहस्पति बढ़ाता है। इससे आपको अच्छी आय होने की संभावना बढ़ जाती है। फिर भी बृहस्पति यदि एकादश भाव में होता है, तो इसका प्रभाव कहीं अधिक होता है। तो चलिए एकादश भाव में गुरु की उपस्थिति से क्या नतीजे निकलते हैं, इस पर हम डालते हैं एक नजर।


यदि ग्यारहवें भाव में बृहस्पति हो तो क्या होता है?

ज्योतिष में ग्यारहवें भाव को लाभ का घर के नाम से भी जाना जाता है। यही वजह है कि जब इस भाव में एक मजबूत ग्रह की मौजूदगी होती है, तो इससे जातकों के लिए अपने सपनों को हकीकत में बदलना मुमकिन हो जाता है। इतना ही नहीं, जातक यह उम्मीद कर सकते हैं कि उनका जीवन सफल रहने वाला है।

यदि ग्यारहवें भाव में बृहस्पति ग्रह गोचर कर रहा है, तो जातक अपना संपर्क बढ़ाते हुए अपनी सामाजिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार कर सकते हैं। वे अपने दोस्तों की संख्या भी बढ़ा सकते हैं। वे मिलनसार प्रवृत्ति के होने लगते हैं। उनके साथ लोग भी उठने-बैठने लगते हैं और उनसे बातचीत करना भी उन्हें पसंद होता है। इनकी ख्याति दूर-दूर तक फैलने लगती है। इस वजह से समाज में इन्हें प्रतिष्ठा प्राप्त करने में भी मदद मिलती है।

गुरु का 11वें भाव में होना और भी कई तरीकों से फायदेमंद होता है। अपने मित्रों से जातकों को वांछित सहायता मिलने की पूरी उम्मीद रहती है। इसलिए जब भी इनके लिए कोई चुनौतीपूर्ण समय होता है और वे अपने दोस्तों को मिलने के लिए बुलाते हैं, तो इनके दोस्त शायद ही ‘नहीं’ कह पाते हैं।

जिन जातकों का गुरु एकादश भाव में निचले स्तर का होता है, उन्हें इस ग्रह से कोई भी सहायता नहीं मिल सकती है। बृहस्पति के कमजोर होने की वजह से अपने व्यवसाय को लेकर जो रणनीतियां आपने तैयार की हैं, उन्हें नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इस तरह से आप लाभ कमाने से वंचित रह जाते हैं। साथ ही आपके वित्तीय संकट को भी यह बढ़ा सकता है। इतना ही नहीं, यह दीर्घकालिक संकट में भी तब्दील हो सकता है।

हालांकि ऐसे जातक इन परिस्थितियों का सामना करने से बच जाएंगे, जिनके ग्यारहवें भाव में गुरु उच्च होता है। ऐसे में इनकी आत्म छवि के बहुत ही अच्छी तरह से विकसित होने की संभावना रहती है। गुरु के उच्च होने वाले जातकों की अपनी खुद की आर्थिक स्थिति पर भी अच्छी पकड़ हो सकती है। यहां पर यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि इस पीले रंग के ग्रह का प्रभाव कितना पड़ेगा, यह अन्य ग्रहों की स्थिति के साथ जातक की राशि पर भी निर्भर करता है।

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क्या दर्शाता है 11वां भाव?

आपकी इच्छाओं, आपकी आशाओं और आपके सपनों को पूरा करने वाला होता है ग्यारहवां भाव। पेशेवर दृष्टि से देखें, तो इस भाव वाले जातकों का कॅरियर बहुत ही तेजी से आगे बढ़ता है। उन्हें तुरंत नतीजे मिलने शुरू हो जाते हैं। बृहस्पति यदि 11वें भाव में हो तो ऐसे में जातकों का झुकाव अध्यात्म और दर्शन दोनों की ओर हो सकता है। इतना ही नहीं, अपने संवाद कौशल में भी जातक उल्लेखनीय सुधार कर सकते हैं। साथ ही वे और भी बेहतर तरीके से खुद को अभिव्यक्त कर सकते हैं।

बृहस्पति का ग्यारहवें भाव में गोचर होता है, तो इससे जातकों के अंदर खुद को ठीक करने की क्षमता विकसित होने लगती है। साथ ही मूल जातकों के लिए अपने सामाजिक दायरे को फैलाने के भी अवसर मिलने लगते हैं। मेष, कर्क, तुला या मकर राशि के ग्यारहवें भाव में बृहस्पति के होने से जातक एकदम निडर और बहादुर बन सकते हैं। वहीं सिंह, मीन, मिथुन या धनु राशियों के ग्यारहवें भाव में गुरु के होने से जातकों को जीवन में आध्यात्मिकता की ओर बढ़ने के लिए बढ़िया मार्गदर्शन मिल सकता है।

11वें भाव में बृहस्पति द्वारा प्रभावित होने वाले जीवन के क्षेत्र

  • भाग्य
  • धन और समृद्धि
  • सामाजिक सर्किल

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आपके व्यक्तिगत जीवन पर बृहस्पति के ग्यारहवें भाव में गोचर का प्रभाव

ग्यारहवें भाव में बृहस्पति यदि होता है, तो इसे सबसे लाभकारी स्थानों में से एक माना जाता है। बृहस्पति यदि अनुकूल स्थान पर मौजूद होता है, तो इससे इसके पास जो देने वाला घर है, उससे यह बहुत कुछ दे सकता है।

मूल जातकों को इससे बेहतर सेंस ऑफ ह्यूमर मिल पाता है। इससे वे एक बहुत ही अच्छे लीडर बन सकते हैं। साथ ही उनके लिए माहौल भी बेहद खुशनुमा बनाए रखने में भी बृहस्पति की यह स्थिति मददगार होती है।


आपके पेशेवर जीवन पर गुरु के ग्यारहवें भाव में गोचर का प्रभाव

जातकों को इससे अपने दोस्तों से अच्छा सहयोग मिलने की उम्मीद रहती है। धीरे-धीरे उनके समाज में दोस्तों की सूची लंबी होती चली जाती है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बड़ा ही लाभप्रद होता है, क्योंकि वे जिस भी प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं या जो भी उन्होंने अपने काम के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है, उनमें उन्हें काफी मदद मिलती है। ग्यारहवें भाव में गुरु वाले जातक जहां भी जाते हैं, उनके साथ उनका सौभाग्य भी जाता है। इस वजह से वे स्वस्थ रहते हैं। उनकी जीवनशैली भी समृद्ध रहती है। इससे वे महंगी कारों में चल पाते हैं। उनके पास आलीशान इमारत भी हो सकती है।

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विवाह पर 11वें भाव में गुरु का प्रभाव

विवाह के संदर्भ में देखा जाए तो बृहस्पति का 11वें भाव में गोचर वैवाहिक संबंधों के लिए बहुत ही लाभप्रद होता है। वह इसलिए कि अपने वैवाहिक जीवन में जिन चीजों को पाने का लक्ष्य आपने निर्धारित किया है, उन्हें हासिल करने में यह आपकी मदद कर सकता है। इससे उन्हें एक वफादार और आकर्षक साथी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही उनके साथी उन्हें बहुत ही अच्छी तरह से समझते हैं। इसके अलावा जीवनसाथी का कॅरियर तेजी से आगे बढ़ सकता है।

ग्यारहवें भाव में बृहस्पति के होने से महिला जातकों को एक ऐसा जीवनसाथी आसानी से मिल सकता है, जो उनकी बहुत ही अच्छी तरीके से देखभाल करेगा।

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आपकी सेहत पर एकादश भाव में गुरु का प्रभाव

एकादश भाव में बृहस्पति वाले जातकों को अधिक खाने की वजह से या फिर अत्यधिक शराब के सेवन के कारण स्वास्थ्य से जुड़ीं समस्याएं हो सकती हैं। जातक धीरे-धीरे अधिक शराब पीने और खाने के भी आदि हो सकते हैं।

गुरु के ग्यारहवें भाव में होने की वजह से जातक बड़ी संख्या में दोस्त बना सकते हैं। हालांकि, इनसे मिलने-जुलने से, अचानक से पार्टियों में जाने के कारण और इनके साथ बाहर जाने की वजह से अनावश्यक रूप से इनके बहुत से पैसे खर्च हो सकते हैं। इतना ही नहीं, ग्यारहवें भाव में बृहस्पति वाले जातक कर्ज में भी डूब सकते हैं। वह इसलिए कि इनके लिए कर्ज चुकाना आसान नहीं होता है। बृहस्पति के प्रभाव की वजह से जब आय में गिरावट आ जाती है, तो इसकी वजह से निराशा जिंदगी पर हावी हो सकती है।


समापन

बृहस्पति उपचय भावों में से एक ग्यारहवें भाव में जब पहुंचता है, तो इससे जातकों को कई प्रकार से मदद मिल सकती है। हालांकि, यदि उसका उल्टा हो जाए, तो बृहस्पति के गोचर की वजह से जातकों को जिंदगी के कई क्षेत्रों में बाधाओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि इस शुभ ग्रह की ग्यारहवें भाव में उपस्थिति ज्यादातर सकारात्मक चीजें ही लेकर आती हैं और नकारात्मक चीजें बहुत ही कम होती हैं। ऐसे में यह निष्कर्ष निकलता है कि यह बृहस्पति के लिए एक सुरक्षित जगह है, जहां से यह ग्रह अपने जातकों पर खूब आशीर्वाद बरसा सकता है।

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