प्रथम भाव में मंगल के होने का प्रभाव


परिचय

ज्योतिष से प्रेम करने वालों सावधान हो जाएं। यदि आपके लग्न भाव में मंगल मौजूद है, तो इसके नकारात्मक प्रभाव से आप पीड़ित हो सकते हैं। यह बिल्कुल सच है, क्योंकि मंगल जीवन में उथल-पुथल भी ला सकता है। मंगल के प्रथम भाव में रहने वाले जातक थोड़े-बहुत लापरवाह भी हो सकते हैं। उन्हें अपनी वास्तविक शक्तियों का एहसास ही नहीं हो पाता है। दूसरे की भावनाओं को भी वे नहीं समझ पाते हैं। यह पहला भाव ज्योतिष का मूल है, जो जातक से ही संबंध रहता है।

यदि मंगल ग्रह लग्न भाव में मौजूद होता है, तो ऐसा जातक शक्तिशाली और साहसी बनता है। फिर भी वह इधर-उधर झांकता रहता है। इसकी वजह से आप क्रोधी भी बन सकते हैं और बहुत ही जल्द आपको गुस्सा भी आ सकता है। इसके अलावा जातक ऊर्जा से भर जाता है और उसमें उत्साह भी प्रचुर मात्रा में होता है। आइए जानते हैं कि मंगल के पहले भाव में प्रवेश करने पर क्या होता है।


लग्न भाव में मंगल हो तो क्या करें?

लग्न भाव में स्थित लाल ग्रह मंगल आपकी जिंदगी में चुनौतीपूर्ण वक्त लेकर आ सकता है। अपने सपनों को यदि आपको हकीकत में बदलना है, तो आपको संभव है कि कुछ और अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़े। आपको शायद यह नहीं मालूम होता कि आप कौन-कौन सी चीजें करने में सक्षम हैं। हालांकि, यदि आप अपनी ताकत का एहसास कर लेते हैं, तो इससे आपका काम बेहद आसान बन जाता है। आपके शब्दों से ज्यादा आपका काम बोल सकता है। पहले भाव में मंगल वाले जातक के रूप में आप थोड़े संवेदनशील होते हैं। इसलिए यदि रिश्ते में थोड़ा भी धक्का लगे, तो इसकी वजह से आपके रिश्ते में परेशानियां पैदा हो सकती हैं।

प्रथम भाव में मंगल के होने की वजह से आपका स्वभाव बेहद सहज हो सकता है। इससे नए दोस्त बनाने में भी आपको काफी मदद मिलती है। फिर भी आपको अकेले ही काम करना अधिक पसंद होता है। आपसे संबद्ध मंगल आपके मार्ग में व्यवधान पैदा कर सकता है। इसकी वजह से आप सड़क किनारे दुर्घटनाओं की चपेट में आ सकते हैं। मंगल ग्रह की इस स्थिति से आप में काफी आत्मविश्वास भी जाग सकता है। हालांकि, यदि चीजें ठीक तरीके से नहीं हों, तो आप निराशा में भी डूब सकते हैं। आपकी अधीरता की वजह से आपको नकारात्मक नतीजे मिलने की आशंका रहती है। फिर भी आप यदि कड़ी मेहनत करना जारी रखें, तो आप अपने वांछित लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। मंगल के प्रथम भाव में होने की वजह से वैवाहिक जीवन पर असर पड़ सकता है, क्योंकि इससे आप मांगलिक बन जाएंगे।

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पहले भाव में मंगल ग्रह से प्रभावित जीवन के क्षेत्र

  • पेशेवर जिंदगी
  • रिश्ता
  • सामाजिक छवि
  • रवैया

प्रथम भाव में मंगल का प्रभाव

प्रथम भाव में मंगल का प्रभाव : सकारात्मक

लग्न भाव में विराजमान मंगल जीवन में कई चुनौतियां लेकर आ सकता है। फिर भी आप जो अंधेरे में काम कर रहे हैं, उसमें यह प्रकाश भर सकता है। अपने काम को करने में आपको जो भी कठिनाई हो रही है, उनसे निबटने के लिए यह आपको ऊर्जा प्रदान कर सकता है। साथ ही यह अपने काम के प्रति आपके समर्पण को भी बढ़ाता है। यही वजह है कि एक बार जब आप अपने काम पर पूरा ध्यान लगा लेते हैं, तो इसे आप तब तक नहीं रोक सकते, जब तक कि आप इसे पूरा नहीं कर लेते हैं। ऐसे जातकों के पास अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी क्षमता होती है। फिर भी उन्हें अपनी महत्वाकांक्षाओं के पीछे दौड़ते वक्त सावधान रहना चाहिए। अनजाने में हो सकता है कि आप दूसरों को चोट पहुंचा दें।

जो नौकरीपेशा लोग हैं, उन्हें नए प्रोजेक्ट को हैंडल करने के लिए और अधिक जिम्मेवारियां मिल सकती हैं। वे खुशी-खुशी इसे स्वीकार कर लेते हैं और इन्हें पूरा भी करने की कोशिश करते हैं। इस स्थिति से आपके जीवन में उत्साह का स्तर बढ़ता चला जाता है। मूल जातक अपने काम को अधिक सटीकता के साथ कर पाते हैं। साथ ही इसके लिए अपनी दक्षता को और बढ़ा सकते हैं। लग्न भाव में मंगल की मौजूदगी की वजह से ही जातकों के लिए अपने कार्यों में मिलने वाले अप्रत्याशित नतीजों से निबटना संभव हो पाता है।

मंगल ग्रह के इन सकारात्मक प्रभावों की वजह से समाज में आपको अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही आप सकारात्मक मानसिकता के साथ काम कर पाते हैं। इसके अलावा आप तेजी से महत्वपूर्ण निर्णय भी ले पाते हैं।

पहले भाव में मंगल का प्रभाव : नकारात्मक

मंगल के प्रथम भाव में होने की वजह से आपको अधिक नकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं। लग्न भाव में इसकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि अपने भविष्य को लेकर जातक गंभीर नहीं हो सकते हैं। इन जातकों के मार्ग में जो बाधाएं आती हैं, उन्हें दूर करना ही इन्हें बहुत ही चुनौतीपूर्ण प्रतीत होने लगता है। अपने खराब निर्णय लेने की आदतों की वजह से टीम में ये एक अच्छे खिलाड़ी नहीं हो सकते हैं। इसलिए इन्हें यही सलाह दी जाती है कि इन्हें दूसरों को सुनना चाहिए और दूसरों को भी अपने विचार रखने देना चाहिए।

इन्हें शायद यह नहीं पता होता कि दूसरे लोगों से संपर्क किस तरह से स्थापित किया जाए। इसके अलावा पहले घर में मंगल की उपस्थिति का यह अर्थ होता है कि जातकों को किसी भी काम को बड़े ही संगठित और नियोजित तरीके से करने की जरूरत है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अपनी काम करने वाली जगह पर वे अपनी जगह खो सकते हैं। हो सकता है कि आपके पास जल्दबाजी में निर्णय लेने की एक अच्छी क्षमता मौजूद हो, मगर आपको इससे बचना चाहिए। नहीं तो आपको इसकी वजह से नकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं।

जानकारों की यह राय है कि जातकों को बड़ों से सलाह लेकर ही कोई भी निर्णय लेना चाहिए। सामूहिक परियोजनाओं में यदि ये शामिल होते हैं, तो इनके लिए यह बहुत कठिन हो सकता है। वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव में मंगल वाले जातकों के साहसिक यात्राओं पर जाने की पूरी संभावना रहती है। हालांकि, इसकी वजह से ये परेशानी में भी पड़ सकते हैं। इसलिए इनके लिए सावधान रहना बेहतर होता है। ऐसा इस वजह से होता है कि पहला भाव पहली राशि मेष राशि से संबंध रखता है। साथ ही प्रथम भाव में मंगल के होने से महिला जातकों को सफल वैवाहिक जीवन का आनंद नहीं मिल पाता है।


समापन

पहले भाव में मंगल की उपस्थिति से आपको ऊर्जा मिल सकती है और एक रहस्यमयी तरह की आभा भी। फिर भी आपको यह नहीं मालूम होता कि इनका सही तरीके से उपयोग कैसे किया जाए। ज्योतिष में पहला भाव स्वयं का प्रतिनिधित्व करता है। यदि मंगल लग्न भाव से गुजर रहा है, तो जातक बिना दोबारा विचार किए जल्दबाजी में कोई काम कर सकते हैं।

कुल मिलाकर हमने यही पाया है कि आप जिद्दी, आवेग में आ जाने वाले और असावधान हैं। फिर भी यदि आप अपने आसपास के लोगों के प्रति ईमानदार रहते हैं, तो इन पर आप अपना प्रभाव डाल सकते हैं। इसके साथ ही हम यह उम्मीद करते हैं कि आपको इस जानकारी से भरे ब्लॉग में अपने सवालों के जवाब मिल गए होंगे।