होटल तथा रिसोर्ट बिजनेस के लिए वास्तु टिप्स (Vastu for Hotel)

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को उसकी बेस्ट सर्विसेज तथा कन्ज्यूमर्स को पूरी तरह से आराम उपलब्ध करवाने के लिए जाना जाता है। यदि एक होटल या रिसोर्ट को पूरी तरह से वास्तु के अनुकूल बनाया जाए तो वहां आने वाले विजिटर्स खुद को रिलेक्स और कंफर्टेबल फील करेंगे और इससे उस होटल या रिसोर्ट की पब्लिसिटी होगी और वहां के संचालकों को अच्छा मुनाफा होगा।

इन दिनों हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में होटल बिजनेस काफी ग्रोथ कर रहा है। कई नए स्टार्टअप इस सेक्टर में मोटा प्रॉफिट कमा रहे हैं। परन्तु एक अच्छे होटल या रिसोर्ट को बनाना और फिर उसे लंबे समय तक चलाना एक कठिन कार्य है जिसमें कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं। कई तरह के जोखिम होते हैं जिनके चलते आपको आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। निस्संदेह ऐसी स्थिति में आपका मोटा इन्वेस्टमेंट खतरे में पड़ सकता है और प्रॉफिट के बजाय हानि हो सकती है।

कहा जाता है कि दुनिया में अगर कोई समस्या है तो उसका समाधान भी है। इसी तरह होटल इंडस्ट्री के लिए वास्तु एक वरदान की तरह है। यदि आप अपनी बिल्डिंग को वास्तु के अनुसार बनाएं तो इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विद्या है जिसे बिल्डिंग्स की डिजाईनिंग, लेआउट तथा स्ट्रक्चरल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। भवन निर्माण से जुड़ी हर स्टेप पर वास्तुशास्त्र के नियमों का पालन किया जाता है।


होटल एवं रेस्टोरेंट के लिए वास्तु टिप्स

हम सभी के जीवन में वास्तु शास्त्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, फिर चाहे आप अपने रहने के लिए घर बना रहे हों या होटल अथवा रेस्तरां। वास्तु के नियमों का पालन करने से जीवन और व्यापार में सफलता, समृद्धि तथा ग्रोथ बनी रहती है।

भवन निर्माण से जुड़े वास्तु के कुछ ऐसे नियम हैं जिन्हें सभी जगह पर प्रयोग किया जाता है उदाहरण के लिए रेस्टोरेंट का प्लॉट चौकोर होना चाहिए। वास्तु के नियमों का पालन करने से आपके होटल में आने वाले विजिटर्स तथा कस्टमर्स की संख्या बढ़ेगी। यहां कुछ ऐसे वास्तु टिप्स बताए गए हैं जिन्हें आप अपना रेस्टोरेंट या होटल बनवाते समय उपयोग कर सकते हैं।

एंट्रेंस (Entrance)
रेस्टोरेंट तथा होटल का एंट्रेंस गेट विजिटर्स के आकर्षण का केन्द्र होता है। एंट्रेंस को दूसरों का मन मोह लेने वाला, सुंदर, देखते ही रिलैक्स कर देने वाला होना चाहिए, उसमें ब्राइट कलर्स का प्रयोग करना चाहिए। इन सभी चीजों को ध्यान रखने से होटल में आने वाले विजिटर्स की संख्या बढ़ेगी।

वास्तु के अनुसार होटल तथा रेस्टोरेंट का एंट्रेंस नॉर्थ या ईस्ट डायरेक्शन में होना चाहिए। मेन गेट को सुंदर फूलदार पौधों, वाटर फाउंटेन से सजाना चाहिए, वहां पर दिल को मोह लेने वाली विंड चाइम की आवाज हों तथा गार्ड सभी का मुस्कुराते हुए स्वागत करें, तो क्या बात है।

बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement)
वास्तु के अनुसार होटल तथा रेस्टोरेंट में बैठने की व्यवस्था ग्राउंड फ्लोर पर होनी चाहिए। होटल में आने वाला प्रत्येक ग्राहक आपके लिए बिजनेस लाता है, इसलिए उन्हे ग्राउंड फ्लोर पर ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए।

किचन कहां पर हो (Placement of the Kitchen)
किसी भी होटल में ग्राहकों की सुविधा के लिए किचन प्रत्येक फ्लोर पर होना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन को रेस्टोरेंट की साउथ-ईस्ट डायरेक्शन में होना चाहिए। साउथ-ईस्ट डायरेक्शन को फायर एलिमेंट (अग्नि तत्व) से जुड़ा माना गया है। इसलिए किचन में कुकिंग चूल्हा या गैस भी साउथ-ईस्ट डायरेक्शन में ही होने चाहिए।

किचन में हवा तथा रोशन की व्यवस्था के लिए पर्याप्त आकार की खिड़कियां होनी चाहिए ताकि अदंर का धुआं बाहर निकल सके और बाहर की ताजा हवा अंदर आ सकें। मेन किचन को बिल्डिंग के साउथ-ईस्ट कॉर्नर में ही होना चाहिए। किचन के दरवाजे के निकट ही बाथरूम बनाने के बचना चाहिए।

होटल में कौनसे कलर्स यूज करें (Colours of the Hotel)
होटल की दीवारों पर ऊर्जा से भरे वाइब्रेंट कलर्स ऑरेंज, येलो, क्रीम, ब्लू तथा ब्राउन कलर का प्रयोग करना चाहिए। ये सभी कलर्स वहां के वातावरण को जीवंत और खुशनुमा बनाते हैं। होटल में कभी भी ठंडे कलर्स जैसे ग्रे या ग्रीन कलर की थीम का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

वाटर फाउंटेन (Water Fountain)
होटल्स तथा रेस्टोरेंट में वाटर फाउंटेन, स्विमिंग पूल तथा साइड फाउंटेन का प्रयोग विजिटर्स को लुभाने के लिए किया जाता है। होटल के वास्तु के अनुसार वाटर फाउंटेन या स्टोरेज या पानी से जुड़ी किसी भी चीज के लिए कुछ भी बनाने के लिए नॉर्थ, ईस्ट या नॉर्थ-ईस्ट दिशा का प्रयोग करना चाहिए। नॉर्थ-ईस्ट दिशा जल से संबंधित हैं और बिल्डिंग के मालिक के लिए सौभाग्य लाती है।

होटल तथा रेस्टोरेंट में टॉयलेट तथा बाथरूम्स की व्यवस्था (Toilets and Bathrooms in Restaurant and Hotel)
होटल के सभी रूम में एक प्राइवेट बाथरूम होता है। इसके अलावा होटल के एक्सटीरियर में बाथरूम और टॉयलेट एक साथ ही बनाए जाते हैं। वास्तु के अनुसार रेस्टोरेंट तथा होटल के नॉर्थ या नॉर्थ-वेस्ट दिशा को टॉयलेट तथा बाथरूम बनाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। परन्तु यहां यह ध्यान रखने की बात है कि टॉयलेट और किचन के बीच एक ही कॉमन दीवार नहीं होनी चाहिए।

होटल का भूखंड (Plot of the Hotel)
होटल बनाने के लिए प्लॉट चुनना भी अपने आप में एक जटिल कार्य है। किसी भी होटल या रेस्टोरेंट जैसी बिल्डिंग के लिए आयताकार, चौकोर, गोलाकार, अष्टकोणीय या षटकोणीय प्लॉट उत्तम माने गए हैं।

भंडार गृह (Storage)
रेस्टोरेंट तथा होटल में स्टोरेज अथवा भंडार गृह की व्यवस्था साउथ-वेस्ट दिशा में रखनी चाहिए। यहां पर अनाज, सब्जियां, तेल तथा अन्य काम आने वाले आइटम्स को स्टोर करना चाहिए।

गंदा तथा अंधकारमय रेस्टोरेंट (Dark and Dirty Restaurant)
रेस्टोरेंट्स तथा होटल को सदैव साफ-सुथरा और चमकता रहना चाहिए। गंदे और अनाकर्षक होटल या रेस्टोरेंट को लोग बाहर से देख कर चले जाते हैं। ऐसी जगहों पर नेगेटिव एनर्जी की प्रचुरता होती है जिसके चलते वहां आदमी अनकम्फर्टेबल अनुभव करने लगता है। स्टोर रूम तथा बेसमेंट में भी लाइट्स की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।

कैश काउंटर तथा रिसेप्शन एरिया (Cash Counter and Reception Area)
होटल में कैश काउंटर तथा रिसेप्शन एरिया के लिए नॉर्थ या ईस्ट डायरेक्शन को परफेक्ट माना गया है। यह दोनों ही दिशाएं पैसे से संबंधित है तथा पैसे का काउंटर या तिजोरी यहां रखने से लक्ष्मी का आगमन होता है। सबसे बड़ी बात कैश काउंटर के ठीक ऊपर कोई बीम या पिलर नहीं होना चाहिए अन्यथा इनकम से ज्यादा खर्च होने की संभावना रहती है।

खिड़की तथा एंट्रेंस के नजदीक कौनसे प्लांट्स लगाएं (Plants Near Windows and Entrance)
पौधों की हरियाली घर में पॉजिटिव एनर्जी लाती है। खिड़की के निकट एवं एंट्रेंस गेट पर सुंदर दिखने वाला पौधे लगाने से उस जगह की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ वहां पर रहने वालों का मन तथा मस्तिष्क शांत रहते हैं और स्वास्थ्य लाभ होता है। परन्तु आपको किसी भी हालत में रूम तथा गलियारों में आर्टिफिशियल प्लांट्स नहीं लगाने चाहिए।

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होटल तथा रेस्टोरेंट की डिजाईन और लेआउट में वास्तु का महत्व

वास्तु शास्त्र के नियमों के आधार पर बनाया गया होटल ग्राहकों तथा मालिक दोनों को सेटिस्फेक्शन तथा मन की शांति प्रदान करता है। इसके विपरीत जिस होटल में वास्तु के नियम प्रयोग नहीं किए जाते हैं, वहां पर ग्राहकों की शिकायतें बनी रहती हैं, स्टाफ का व्यवहार सही नहीं होता और ग्राहक नाखुश होकर जाते हैं। इसलिए इन सभी समस्याओं से बचने तथा होटल में हुए इन्वेस्टमेंट से अधिकतम लाभ कमाने के लिए आपको होटल की बिल्डिंग बनाते समय वास्तु के नियमों का ध्यान रखना चाहिए। इससे हमें ये फायदे होते हैं।

  • ग्राहकों की शिकायतें कम से कम आती हैं।
  • सर्विस में सुधार होता है।
  • संतुष्ट ग्राहक बार-बार वहां आते हैं और बिजनेस बढ़ता है।
  • गेस्ट होटल के बारे में पॉजिटिव रिव्यू देते हैं।
  • बेहतर सर्विसेज, आरामदायक वातावरण तथा ग्राहकों की मानसिक शांति ये सभी मिलकर होटल की रेपुटेशन बढ़ाते हैं।
  • ज्यादातर गेस्ट अपने मिलने वालों को रेफर करते हैं जिससे रैंकिंग सुधरती हैं, ज्यादा बुकिंग होती हैं और ज्यादा रेवेन्यू मिलती है।

अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा सेट-अप के बल पर पूरे वर्ष हजारों ग्राहकों को आकर्षित किया जा सकता है। वास्तु के नियमों का ध्यान रखने से वहां पर गेस्ट्स ज्यादा आते हैं और प्रॉफिट बढ़ता है। अत: आपको भी होटल या रेस्टोरेंट बनवाते समय यहां बताए गए वास्तु के सभी नियमों का पालन करना चाहिए।

होटल के लिए वास्तु गाइडलाइन का प्रयोग करने से होटल तथा वहां के वातावरण में एक पॉजिटिव बैलेंस बना रहता है। इसके लिए आप वास्तु एक्सपर्ट्स के मिल कर सुधार के लिए सलाह ले सकते हैं ताकि आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों।

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