शारदीय नवरात्रि 2022: मां दुर्गा की नौ रातें और नौ अवतार

शारदीय नवरात्रि चंद्र मास आश्विन महीने के पहले दिन से शुरू होती है, और चंद्र मास अश्विन के दसवें दिन यह समाप्त होती है। यह 9 दिन माँ दुर्गा की पूजा-पाठ और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे शुभ दिन माने जाते हैं। इन 9 दिनों को दुर्गा पूजा के रूप में भी जाना जाता है और इसे ज्यादातर उत्तरी और पूर्वी भारत में मनाया जाता है।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने रावण से लड़ने और उसे मारने के पहले माँ दुर्गा की पूजा की थी। उन्हें बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्रि के दसवें दिन को ‘विजयादशमी’ या ‘दशहरा’ के नाम से जाना जाता है। शरद नवरात्रि आश्विन महीने के दौरान मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है की इस दिन के बाद से ही सर्दियों के मौसम के शुरुआत होती है।

लोग नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के विभिन्न अवतारों की पूजा करते हैं। लोग अपने घर या मंदिर में इनकी स्थापना करके इन नौ दिनों में मंत्र जाप, भजन, पूजा-पाठ और स्त्रोत का पाठ करते हैं। इन दिनों में हवन और अनुष्ठान का भी बहुत महत्व होता है। कहा जाता है जो भी नवरात्रि में पूरे भक्ति भाव के साथ माँ दुर्गा की पूजा करते हैं उनके सारे दुख दर्द दूर होते हैं।


शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों का महत्व और पूजा

यहा पर हम शारदीय नवरात्रि 2022 के नौ दिनों के महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही नवदुर्गा के 9 रूपों की कृपा कैसे पाए। उनकी पूजा पाठ कैसे करें। इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

पहला दिन – मां शैलपुत्री : नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। यह मां दुर्गा का पहला अवतार हैं, और वह चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करती हैं। कुंडली में चन्द्र अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। यदि पूरे समर्पण के साथ इनकी पूजा की जाती है, तो मंगल के सभी प्रतिकूल प्रभावों को दूर कर सकते हैं। कुंडली में मंगल अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा : नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे रूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह शुक्र ग्रह पर शासन करती है और साहस प्रदान करती है। कुंडली में शुक्र अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

चौथा दिन – मां कुष्मांडा: नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे अवतार, मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। जो सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके भविष्य की रक्षा करती है। कुंडली में सूर्य अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

पांचवां दिन – मां स्कंदमाता: नवरात्रि के पांचवे दिन मां दुर्गा का पांचवे रूप, मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। जो की बुध ग्रह पर शासन करती है। अपने भक्तों पर हमेशा कृपा करती है। कुंडली में बुध अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

छठा दिन – मां कात्यायनी : नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे रूप, मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह बृहस्पति ग्रह पर शासन करती है। इनके भक्त उनके साहस और दृढ़ संकल्प से लाभान्वित होते हैं। कुंडली में गुरु अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

सातवां दिन – मां कालरात्रि : नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा का सातवें रूप, मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। यह शनि ग्रह पर शासन करती है। इसके साथ ही यह साहस का प्रतिनिधित्व करती है। कुंडली में शनि अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

आठवां दिन – मां महागौरी : नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें रूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। यह राहु ग्रह पर शासन करती है। यह हानिकारक प्रभावों और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करती है। कुंडली में राहु अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री : नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के आठवें रूप, मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह केतु ग्रह पर शासन करती हैं। ये ज्ञान प्रदान करती हैं। कुंडली में केतु अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इनकी पूजा पाठ करें।

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शारदीय नवरात्रि का उत्सव और 2022

नवरात्रि के दौरान नौ दिन तक देवी-देवताओं की पूजा करना, उन्हें मंच पर बैठना सजावट करना, दुर्गा सप्तशती का पाठ करना, उनके चरित्र को नाटक के रूप में लोगों को बताना, गरबा खेलना और हिंदू धर्मग्रंथों का पाठ यह सभी इस उत्सव का हिस्सा हैं। यह पूरे नौ दिन बिलकुल त्योहार से नजर आते हैं। लोग जगह-जगह पर देवी के रूपों की झांकियां बनाकर रखते हैं। लोग इन पंडालों में जा कर पूजा अर्चना करना पसंद करते हैं। विजय दशमी तक लोग सुबह-शाम दोनों समय आरती और प्रसाद का वितरण करते हैं।

इस समय जो पंडाल सजाए जाते हैं उन में आपको सिर्फ मां दुर्गा की मूर्ति ही नहीं, बल्कि उन्हें पंडाल में कई तरह की एक्टिविटी का भी आनंद मिलता है। लोग म्यूजिक और डांस सहित विभिन्न गतिविधियों का भी लुफ्त उठाते हैं। नवरात्रि के दसवें दिन मां दुर्गा की मूर्तियों को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है। मां दुर्गा की झाकियों को विसर्जन के लिए ले जाते समय ढोल- नगाड़े का जमकर प्रयोग किया जाता है। लोग नाचते हुए इनको विदा करते हैं। दसवें दिन को विजयदशमी या दशहरा के रूप में जाना जाता है। बुराई का प्रतीक रावण के पुतले दहन किया जाता है। यह देश का सबसे लोकप्रिय त्यौहार है। दशहरे के बाद से ही लोग दिवाली के लिए उल्टी गिनती शुरू कर देते हैं। शरद नवरात्रि के बीस दिन बाद ही दिवाली आ जाती है।


शारदीय नवरात्रि की पूजा विधि, तारीख और शुभ मुहूर्त

कहा जाता है कि नवरात्रि साल में चार बार आती है। वैसे यह चारों नवरात्रि चंद्र मास में ही आती है। हिन्दू धर्म में स्थान के हिसाब से पूजा-पाठ और उत्सव को मनाने में भिन्नता आ जाती है, इसलिए लोग अपने क्षेत्र के अनुसार उन्हें मनाते हैं। दुर्गा पूजा की सबसे ज्यादा धूम बंगाल में होती है। बंगाल का यह सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है।

चारों नवरात्रि में शारदीय नवरात्रि सबसे ज्यादा प्रसिद्ध होती है, इसका नाम मां शारदा के नाम पर रखा गया है, जिसका अर्थ है शरद ऋतु। यह अश्विन मास के चंद्र महीने (सितंबर-अक्टूबर, मानसून के बाद) में आता है। कुछ जगह पर यह त्योहार शरद ऋतु की फसल के बाद और दूसरी जगहों पर फसल के दौरान मनाया जाता है।

नवरात्रि का पहला दिन (प्रतिपदा)

दिनांक: 26 सितंबर 2022, सोमवार।
त्योहार के अन्य नाम : घट स्थापना, चंद्र दर्शन, शैलपुत्री पूजा की जाती है ।
पसंदीदा फूल : हिबिस्कस (गुड़हल) का फूल इनको बहुत पसंद है।
दिन का रंग: नारंगी।
मंत्र: ‘ ॐ देवी शैलपुत्री नमः’

नवरात्रि का दूसरा दिन (द्वितीया)

दिनांक: 27 सितंबर 2022, मंगलवार।
त्योहार के अन्य नाम : चन्द्र दर्शन, ब्रह्मचारिणी पूजा।
पसंदीदा फूल : हिबिस्कस (गुड़हल) का फूल इनको बहुत पसंद है।
दिन का रंग: लाल।
मंत्र: ‘ ॐ देवी ब्रह्मचारिणी नमः’

नवरात्रि का तीसरा दिन (तृतीया)

दिनांक: 28 सितंबर 2022, बुधवार।
त्योहार के अन्य नाम: गौरी पूजा, सौभाग्य तीज, चंद्रघंटा पूजा की जाती है
पसंदीदा फूल: कमल का फूल इनको बहुत पसंद है।
दिन का रंग: लाल।
मंत्र: ‘ॐ देवी चंद्रघंटा नमः’

नवरात्रि का चौथा दिन (चतुर्थी)

दिनांक: 29 सितंबर 2022, गुरुवार।
त्योहार के अन्य नाम: कुष्मांडा पूजा, विनायक चतुर्थी, लक्ष्मी पंचमी
पसंदीदा फूल: चमेली का फूल इनको बहुत पसंद है ।
दिन का रंग: रॉयल ब्लू।
मंत्र: ‘ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः’।

नवरात्रि का पांचवा दिन (पंचमी)

दिनांक : 30 सितंबर 2022, शुक्रवार।
त्योहार के अन्य नाम: नाग पूजा, स्कंदमाता पूजा, स्कंद षष्ठी।
पसंदीदा फूल: पीला गुलाब का फूल इनको बहुत पसंद है ।
दिन का रंग: पीला।
मंत्र : ॐ देवी स्कंदमाता नमः’

नवरात्रि का छठा दिन (षष्ठी)

दिनांक : 01 अक्टूबर 2022, शनिवार।
त्योहार के अन्य नाम: यमुना छठ, कात्यायनी की पूजा की जाती है।
पसंदीदा फूल : गेंदा का फूल इनको बहुत पसंद है।
दिन का रंग: हरा
मंत्र: ‘ॐ देवी कात्यायनी नमः’।

नवरात्रि का सातवां दिन (सप्तमी)

दिनांक: 02 अक्टूबर 2022, रविवार।
त्योहार के अन्य नाम: महा सप्तमी, कालरात्रि पूजा।
पसंदीदा फूल: कृष्ण कमल का फूल इनको बहुत पसंद है।
दिन का रंग: ग्रे।
मंत्र: ‘ॐ देवी कालरात्रि नमः’

नवरात्रि का आठवां दिन (अष्टमी)

दिनांक: 03 अक्टूबर 2022, सोमवार।
त्योहार के अन्य नाम: दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा, अन्नपूर्णा अष्टमी, संधि पूजा।
पसंदीदा फूल: रात में खिलने वाली चमेली, मोगरा का फूल इनको बहुत पसंद है ।
दिन का रंग: बैंगनी।
मंत्र: ‘ॐ देवी महागौरी नमः।

नवरात्रि का नौवां दिन (महानवमी)

दिनांक : 04 अक्टूबर 2022, मंगलवार।
त्योहार के अन्य नाम : नवरात्रि पारण, सिद्धिदात्री पूजा।
पसंदीदा फूल: चंपा का फूल इनको बहुत पसंद है।
दिन का रंग: मयूरी हरा।
मंत्र: ‘ॐ देवी सिद्धिदात्री नमः’

नवरात्रि का अंतिम दिन (विजय दशमी)

दिनांक: 05 अक्टूबर 2022, बुधवार।
त्योहार के अन्य नाम: दशहरा, दुर्गा विसर्जन।


निष्कर्ष

शारदीय नवरात्रि, दुर्गा के नौ अवतारों का प्रतीकात्मक उत्सव है। यह पूरे भारत में अलग-अलग शैली के रूप पूजा जाता है। जैसे पंजाब में जगराता किया जाता है। जैसे उत्तर भारत में नवरात्रि में रामलीला होती है। बंगाल की दुर्गा पूजा दुनिया भर में मशहूर है। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में नवरात्रि को गोलू, बोम्मा गोलू, बॉम्बे हब्बा कहा जाता है।नवरात्रि में कन्याओं पूजन और अखंड दिए का सबसे ज्यादा महत्व है। इस नवरात्रि देवी दुर्गा आपको अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।